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ईरान में लड़कियों के स्कूल पर हुए हमले के बारे में बीबीसी के सवाल पर अमेरिका ने क्या कहा?
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि ईरान में एक स्कूल पर हुए हमले की अमेरिकी रक्षा मंत्रालय जांच करेगा.
उन्होंने कहा कि ये जांच की जाएगी कि क्या ये वाकई 'अमेरिकी हमला' था.
ईरान की सरकारी इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज़ एजेंसी (आईआरएनए) ने शनिवार, 28 फ़रवरी को दक्षिणी होर्मोज़गन प्रांत के मिनाब काउंटी में लड़कियों के एक प्राइमरी स्कूल पर हमले की जानकारी दी थी.
मार्को रुबियो ने सोमवार शाम (भारतीय समय के अनुसार मंगलवार की सुबह) एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस की. इस दौरान बीबीसी संवाददाता टॉम बेटमैन ने रुबियो से ईरान के एक स्कूल पर हुए हमले के बारे में पूछा.
ईरान के स्कूल पर हमला
रुबियो से सवाल किया गया कि ट्रंप प्रशासन को इसके बारे में क्या जानकारी है.
इस पर रुबियो ने जवाब दिया कि उन्होंने रिपोर्ट्स देखी हैं और रक्षा मंत्रालय इस बात की जांच करेगा कि "क्या वह हमारा (अमेरिका का) हमला था."
उन्होंने कहा, "अमेरिका जानबूझकर किसी स्कूल को टारगेट नहीं करेगा." उन्होंने ईरान पर ही आरोप लगाया कि वो क्षेत्र में बेगुनाह लोगों को निशाना बना रहा है.
टॉम बेटमैन ने जब उनसे पूछा कि अगर स्कूल पर हुए हमले में वाकई बच्चे मारे गए हैं तो इस पर वह क्या कहेंगे?
इस पर रुबियो ने जवाब दिया, "अगर ऐसा हुआ है तो यह दुखद है."
हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें इस बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं है.
अमेरिका-इसराइल ने शनिवार, 28 फ़रवरी को ईरान पर हमला किया.
ईरानी अधिकारियों ने इस दौरान दावा किया कि इस हमले में मिनाब में लड़कियों के एक स्कूल को भी टारगेट किया गया.
वहीं सामने आए वीडियो में एक क्षतिग्रस्त बिल्डिंग के चारों ओर परेशान लोगों की भीड़ जमा दिखी.
यह जगह इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) बेस के पास है, जिसे पहले भी टारगेट किया जा चुका है.
ईरानी अधिकारियों के मुताबिक़ स्कूल पर हुए हमले में कम से कम 153 लोग मारे गए, जिसमें बच्चे भी शामिल हैं.
अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने रविवार को कहा कि वह इस घटना की रिपोर्ट्स की जांच कर रहा है.
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने 28 फ़रवरी को एक्स पर एक क्षतिग्रस्त बिल्डिंग की तस्वीर शेयर की थी.
अराग़ची ने लिखा था कि यह बिल्डिंग ईरान के दक्षिण में लड़कियों का एक प्राइमरी स्कूल है, जो नष्ट हो गया है.
उन्होंने लिखा था, "इस (स्कूल) पर दिनदहाड़े बमबारी की गई, जब यहां छोटे बच्चे मौजूद थे. अकेले इसी जगह पर दर्जनों मासूम बच्चों की हत्या की गई है. ईरानी लोगों के ख़िलाफ़ इन अपराधों का जवाब दिया जाएगा."
सोमवार की प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान रुबियो ने ये भी कहा कि अमेरिका ने ईरान पर हमला अपने "बचाव" में किया.
रुबियो ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर हमला इसलिए किया क्योंकि उसे इसराइली हमले पर ईरान के जवाब का पहले से अंदाज़ा था.
उन्होंने कहा, "ट्रंप प्रशासन जानता था कि ईरान के ख़िलाफ़ इसराइल की कार्रवाई होने वाली है और अगर अमेरिका पहले हमला नहीं करता तो ईरान की जवाबी कार्रवाई से अमेरिका को बहुत ज़्यादा नुक़सान होता."
जेडी वेंस ने क्या कहा?
अमेरिका-इसराइल और ईरान संघर्ष के बारे में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने फ़ॉक्स न्यूज़ को दिए एक बयान में कहा, "अमेरिका किसी ऐसे संघर्ष में नहीं फंसेगा जो सालों तक खिंचता रहे."
उन्होंने यह भी जोड़ा कि राष्ट्रपति ट्रंप का एक ही स्पष्ट उद्देश्य है- यह सुनिश्चित करना कि ईरान 'कभी भी परमाणु हथियार न हासिल कर सके.'
वेंस ने कहा, "डोनाल्ड ट्रंप किसी भी हालत में इस देश को कई सालों तक चलने वाली लड़ाई में नहीं फंसने देंगे... हम इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान जैसी समस्याओं में नहीं उलझेंगे, जैसा पहले हुआ."
वेंस ने यह भी दावा किया कि ईरान की परमाणु सुविधाएं केवल असैन्य संवर्धन (एनरिचमेंट) के उद्देश्य से नहीं बनाई गई हैं, जैसा कि वहां की सरकार कहती है, बल्कि उनका निर्माण परमाणु हथियार विकसित करने के लिए किया गया है.
'यूनेस्को की धरोहर तबाह'
बीबीसी संवाददाता ग़ोंचे हबीबीज़ाद ने ईरानी सरकारी मीडिया के हवाले से बताया कि तेहरान का ऐतिहासिक गोलिस्तान पैलेस हमलों में तबाह हो गया है.
इसे संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) की विश्व धरोहर स्थल सूची में शामिल किया गया है.
यूनेस्को ने इस पर चिंता जताई है.
गोलिस्तान पैलेस क़ाजार वंश के दौरान ईरानी शासकों का शाही निवास रहा था और बाद में इसे पहलवी वंश की आधिकारिक गद्दी (सीट ऑफ पावर) के रूप में इस्तेमाल किया गया.
इस बीच एक ईरानी अधिकारी ने कहा है कि जो भी होर्मुज़ स्ट्रेट (जलडमरूमध्य) से गुज़रने की कोशिश करेगा, उसे ईरान "आग के हवाले कर देगा."
यह चेतावनी ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के कमांडर-इन-चीफ़ के सलाहकार इब्राहिम जब्बारी ने सरकारी टीवी पर बोलते हुए दी.
उन्होंने कहा कि यह स्ट्रेट बंद है और जहाज़ों को चेतावनी दी, "उन्हें इस क्षेत्र में नहीं आना चाहिए. अगर वे आए, तो उन्हें हमारी ओर से गंभीर जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा."
जब्बारी ने यह भी कहा कि अमेरिकी "इस क्षेत्र के तेल के प्यासे हैं" और ईरान "इलाके में उनकी पाइपलाइनों पर हमला करेगा और इस क्षेत्र से तेल का निर्यात नहीं होने देगा."
होर्मुज़ स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है और तेल परिवहन का सबसे महत्वपूर्ण 'चोक प्वाइंट' माना जाता है.
दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस इसी स्ट्रेट से होकर गुज़रता है.
ईरान का जवाबी हमला
ईरान ने इसराइल के कई क्षेत्रों की ओर मिसाइलें दागीं.
जिसके बाद इसराइली सेना ने देश भर में लोगों को शेल्टर लेने के लिए फ़ोन अलर्ट भेजे.
इसराइल रक्षा बल (आईडीएफ़) का कहना है कि हवाई रक्षा प्रणालियां हमलावरों के मिसाइल ख़तरे को रोकने के लिए सक्रिय हैं.
लोगों को मोबाइल फ़ोन पर अलर्ट भेजकर कहा गया है कि वे तुरंत सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं और आधिकारिक निर्देश आने तक वहीं रुकें.
अमेरिका ने भी मध्य पूर्व के बड़े हिस्से में मौजूद अमेरिकियों से 'गंभीर सुरक्षा जोखिम' के कारण अब तुरंत देश छोड़ने की अपील की है.
जिन देशों के लिए ये अपील जारी की गई है वे हैं- बहरीन, मिस्र, ईरान, इराक़, इसराइल, वेस्ट बैंक, ग़ज़ा, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, ओमान, क़तर, सऊदी अरब, सीरिया, संयुक्त अरब अमीरात और यमन.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.