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बिहार बोर्ड के टॉपर्स की कहानी: किसी ने मज़दूरी करते हुए तो किसी ने यूट्यूब के ज़रिए की पढ़ाई
- Author, सीटू तिवारी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- पढ़ने का समय: 7 मिनट
सबरीन परवीन के घर मुबारकबाद देने वालों का तांता लगा हुआ है. रविवार डेढ़ बजे के आसपास बिहार बोर्ड ने जैसे ही दसवीं की परीक्षा का रिज़ल्ट जारी किया, सबरीन की एक झलक पाने के लिए लोगों का तांता लग गया.
बच्चों से लेकर बुज़ुर्ग तक सभी के ये जानकर चेहरे खिल गए कि सबरीन ने दसवीं की परीक्षा में टॉप किया है. सबरीन के साथ-साथ बांका की रहने वाली पुष्पांजलि ने भी संयुक्त रूप से टॉप किया है.
वैशाली के छौराही के उच्च माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने वाली सबरीन और पुष्पांजलि दोनों ने 500 में से 492 अंक हासिल किए हैं.
सबरीन बताती हैं, " स्कूल में शिक्षकों ने पढ़ाई में बहुत मदद की. परिवार में माता-पिता का सहयोग मिला. मैंने बहुत अनुशासित होकर पढ़ाई की और जहां कहीं मुझे समझ नहीं आता था वहां मैंने यूट्यूब की मदद लेकर पढ़ाई की. मैं आगे पढ़कर डॉक्टर बनना चाहती हूं."
सबरीन के पिता सज्जाद आलम का पश्चिम बंगाल में टायर का बिज़नेस है तो मां अंगूरी ख़ातून होममेकर हैं.
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बीती रविवार को बिहार बोर्ड ने दसवीं का रिज़ल्ट जारी कर दिया था. इस रिज़ल्ट में पहले चार स्थान पर छात्राएं हैं.
सरकारी स्कूल की छात्राओं ने मारी बाज़ी
नतीजों में पहले स्थान पर सबरीन परवीन और पुष्पांजलि कुमारी हैं, वहीं दूसरे स्थान पर नाहिद सुल्ताना हैं. नाहिद सुल्ताना बेगूसराय के राजकीयकृत हाईस्कूल, बनवारीपुर की छात्रा हैं. उन्हें इस परीक्षा में 489 अंक मिले हैं.
वहीं तीसरे स्थान पर बक्सर की अनूपा कुमारी हैं जिन्हें 488 अंक मिले हैं. अनूपा बक्सर के उच्च माध्यमिक विद्यालय खरहना की छात्रा हैं. तीसरे स्थान पर बेगूसराय के छात्र ओम कुमार भी रहे हैं.
बिहार बोर्ड की दसवीं की परीक्षा 15 लाख से ज़्यादा परीक्षार्थियों ने दी थी, जिसमें छात्राओं की संख्या छात्रों से ज़्यादा थी. सफल परीक्षार्थियों की बात करें तो 12 लाख से ज़्यादा परीक्षार्थी सफल हुए.
बोर्ड ने परीक्षा के सिर्फ़ 28 दिन बाद रिज़ल्ट जारी कर दिया है. बोर्ड के दावे के मुताबिक वो इंटरमीडिएट और मैट्रिक परीक्षाओं का रिज़ल्ट मार्च में ही जारी करने वाला देश का पहला बोर्ड बन गया है.
शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने रिज़ल्ट जारी करते हुए कहा, " हमारी सरकार महिला शिक्षा पर लगातार ज़ोर दे रही है जिसके नतीजे में आप छात्राओं को टॉप पोज़ीशन पर देखते हैं. हमारी सरकार अब शिक्षा की गुणवत्ता पर काम कर रही है. जो छात्र असफल हुए हैं वो निराश न हों, उनको दूसरा मौक़ा मिलेगा."
'किसी टॉपर के बारे में सुनती थी तो टॉप करने का मन करता था'
इन नतीजों में पहले 10 टॉपर्स में 139 स्टूडेंट्स शामिल हैं. जमुई स्थित सिमुलतला आवासीय विद्यालय में पढ़ने वाली पुष्पांजलि संयुक्त टॉपर हैं.
बांका के रजौन प्रखंड के गोपालपुर गांव की रहने वाली पुष्पांजलि को भी 492 अंक मिले हैं. उनके पिता लालमोहन शर्मा रजौन प्रखंड के मध्य विद्यालय भगनावपुर में शिक्षक हैं.
लालमोहन शर्मा बताते हैं, "पुष्पांजलि शुरू से ही पढ़ने में तेज़ थी. उसको हम कई स्कूल की भर्ती परीक्षाओं को इंट्रेस दिलवाए. वो नवोदय सहित कई परीक्षाओं को पास कर गई लेकिन हमने उसका दाख़िला सिमुलतला आवासीय विद्यालय में करवाया."
दरअसल जमुई स्थित सिमुलतला आवासीय विद्यालय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ड्रीम स्कूल रहा है. साल 2015 से इस स्कूल के ज़्यादातर छात्र ही पहले 10 टॉपर्स में रहते थे. साल 2016 में बिहार बोर्ड के कुल टॉपर (टॉप 10) 42 थे और वो सभी इसी स्कूल के थे.
इस स्कूल की पुष्पांजलि कुमारी ने इस बार बिहार बोर्ड टॉप किया है लेकिन ये भी सच है कि पिछले एक दशक में सिमुलतला स्कूल का ये सबसे कमज़ोर प्रदर्शन रहा है जब तीन स्टूडेंट्स टॉपर लिस्ट में शामिल है.
पुष्पांजलि बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहती हैं, "किसी टॉपर के बारे में सुनते थे तो लगता था कि मैं भी कभी टॉपर बनूंगी. अब टॉपर बनने के बाद बहुत अच्छा लगा रहा है. सिमुलतला (स्कूल) से जब भी आते थे तो पापा पढ़ाई के बारे में बहुत पूछते थे. हमको कोई भी चीज़ समझनी होती थी तो पापा से पूछते थे. स्कूल में टीचर्स भी बहुत अच्छे से पढ़ाते हैं. मैं साइंटिस्ट बनना चाहती हूं क्योंकि मुझे साइंस बहुत पसंद है."
ख़ुद खेत मज़दूरी करके पढ़ाई करने वाले नवरत्न
बिहार बोर्ड के रिज़ल्ट में मेहनतकशों के बच्चों ने सफलता का परचम लहराया है.
नतीजों में पहले 10 टॉपर्स में 139 स्टूडेंट शामिल हैं. इनमें कई ऐसे बच्चे हैं जिनके पिता या तो प्रवासी मज़दूर हैं या भाई होटल में वेटर है या मां जीविका दीदी है.
रोहतास की ख़ुशी कुमारी उनमें से एक हैं. ख़ुशी के पिता चंद्रमा प्रसाद झारखंड में फेरी करके कपड़े बेचते हैं. ख़ुशी, आठवीं टॉपर हैं. उनके पिता की पहले कपड़े की दुकान थी, लेकिन कुछ वजहों से उसे बेचना पड़ा. पिता परिवार चलाने के लिए फेरी का काम करने लगे.
माइक्रोफ़ाइनेंस से सात कर्ज़ ले चुके इस परिवार में तनाव के बीच ये सफलता आई है.
ख़ुशी बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहती हैं, "रिज़ल्ट के बाद पापा से बात हुई थी. वो ख़ुश थे लेकिन उन्होंने कहा कि मुझे तुमसे और अच्छे की उम्मीद थी. मैं अब और पढ़ाई करूंगी. मैं बड़े होकर डीएम बनना चाहती हूं. पापा कहते है कि इसके लिए बहुत पढ़ाई करनी होगी."
नतीजों में छठी रैंक लाने वाले नवरत्न तो ख़ुद खेत मज़दूरी करके पढ़ाई करते रहे. मूलरूप से मधेपुरा के रहने वाले नवरत्न के पिता सुभाष यादव दिल्ली में मज़दूरी करते हैं और मां द्रौपदी देवी खेत मज़दूरी करती हैं. नवरत्न सहरसा में रहकर पढ़ाई करते हैं.
नवरत्न के भाई विकास कुमार बीबीसी से बताते हैं, "ये शुरू से ही बहुत तेज़ बच्चा था. इसके पास मोबाइल तक नहीं था. ये कीपैड मोबाइल रखता था और उसी से परिवार के संपर्क में रहता था. ये जब भी घर (मधेपुरा) आता, तब खेत मज़दूरी करता ताकि घर से पैसे जुट जाएं."
सोशल मीडिया से दूरी ने दिलाई सफलता
बीबीसी न्यूज़ हिन्दी ने जिन टॉपर्स से बात की, उन सभी ने कहा कि उन्होंने सोशल मीडिया से दूरी बनाई.
टॉपर ख़ुशी कुमारी बताती हैं, "घर में एक फ़ोन है क्योंकि भैया ने जब मैट्रिक पास किया था तो सरकार से पैसा मिला था जिससे मोबाइल लिया गया. लेकिन उस पर मेरा कोई फ़ेसबुक या इंस्टा अकांउट नहीं है. हम इन सबसे दूरी बनाए रखे."
इनमें से ज़्यादातर ने इंटरनेट का इस्तेमाल सिर्फ़ ऑनलाइन क्लासेज़ करने के लिए किया.
नतीजों के बाद बिहार बोर्ड ने पहला स्थान प्राप्त करने वाली छात्राओं को दो लाख, दूसरा स्थान प्राप्त करने वाली छात्रा को 1.5 लाख और तीसरा स्थान प्राप्त करने वालों को 1 लाख रुपये की राशि दी जाएगी.
चौथी से दसवीं रैंक पाने वाले स्टूडेंटस को 20 हज़ार की राशि दी जाएगी. इसके अलावा हर एक स्टूडेंट को लैपटॉप दिया जाएगा.
बिहार के ग्रामीण अंचलों से आने वाले सफल स्टूडेंट्स ज़्यादातर सरकारी और आर्थिक तौर पर बेहद सामान्य परिवार से आते हैं. परिवार के आर्थिक हालात और दूसरी मुश्किलों को पार करके उन्होंने अपने सुनहरे भविष्य की तरफ़ पहला क़दम उठाया है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.