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नर्स कैसे बनते हैं, नौकरी कैसे मिलती है, क्या पढ़ाई करनी होती है?
- Author, प्रियंका झा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
दिल्ली में रहने वाली स्वाति बचपन में जब भी अपनी मौसी को सफे़द यूनिफॉर्म में अस्पताल जाते देखती, तो उनके मन में ख़्याल आता कि उन्हें भी एक दिन ऐसे ही लोगों की सेवा करनी है.
वो डॉक्टर नहीं बन पाईं, लेकिन उन्होंने वो रास्ता चुना, जिसके बिना कोई डॉक्टर, कोई अस्पताल, कोई ऑपरेशन थिएटर पूरा नहीं हो सकता, यानी नर्सिंग.
फिलहाल स्वाति एक मल्टीनेशनल आईटी कंपनी के कॉर्पोरेट क्लिनिक से जुड़ी हुई हैं.
भारत में इस समय 39 लाख से ज्यादा नर्स हैं. सुनने में ये संख्या बड़ी लगती है, लेकिन 140 करोड़ की आबादी के हिसाब से ये संख्या कम ही है.
जाने-माने कार्डियक सर्जन और नारायणा हेल्थ के फ़ाउंडर डॉक्टर देवी प्रसाद शेट्टी के मुताबिक अमेरिका और यूरोप में हर एक डॉक्टर के हिसाब से चार-पांच नर्स हैं. अगर भारत को भी इसी मानक तक पहुंचना है तो उसे क़रीब 20 लाख और नर्सों की ज़रूरत होगी.
तो क्या नर्सिंग, नौकरी एक सिर्फ़ एक विकल्प है या आने वाले समय का बड़ा मौका? बारहवीं के बाद इस फ़ील्ड में कैसे कदम रखा जाए? और क्या इसमें अच्छा करियर बन सकता है? इसी पर बात करेंगे आज 'करियर कनेक्ट' में.
नर्सिंग में कौन-कौन से प्रोग्राम हैं?
देश में नर्सिंग की पढ़ाई की देख-रेख इंडियन नर्सिंग काउंसिल (आईएनसी) के हाथों में है. यह भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत आता है और एक ऑटोनोमस बॉडी है.
भारत में नर्स बनने के लिए बीएससी नर्सिंग के अलावा जो प्रोग्राम सबसे ज़्यादा चलन में हैं, वो है जीएनएम यानी जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफ़री.
इसके अलावा एएनएम यानी ऑक्सिलियरी नर्सिंग एंड मिडवाइफ़री भी एक कोर्स है, लेकिन ये बेसिक हेल्थकेयर स्किल्स सीखने भर के लिए होने वाला कोर्स है.
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली के नर्सिंग ऑफ़िसर कनिष्क यादव ने इसे आसान भाषा में समझाया, "आम तौर पर एएनएम कम समय में होने वाला डिप्लोमा कोर्स है. इसका फ़ोकस होता है मातृ-शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, बेसिक इलाज और ज़्यादातर ग्रामीण या सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाओं में काम करना."
उन्होंने बताया, "वहीं जीएनएम या बीएससी नर्सिंग लंबी और विस्तृत पढ़ाई है. जीएनएम तीन साल का कोर्स होता है और बीएससी चार साल का. दोनों ही कोर्स के बाद इंटर्नशिप भी होती है. तो इन कोर्स से निकलने वाले पूरी तरह से तैयार होते हैं."
आईएनसी पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, एएनएम के लिए 12वीं किसी भी स्ट्रीम में हो सकती है, लेकिन जीएनएम के लिए साइंस से कम से कम 40 फ़ीसदी अंकों के साथ 12वीं पास करना ज़रूरी है.
न्यूनतम उम्र 17 साल और अधिकतम 35 साल हो सकती है. साथ ही स्टूडेंट का मेडिकली फ़िट होना ज़रूरी है.
बीएससी नर्सिंग के लिए उम्र की सीमा एक जैसी ही है.
साथ ही 12वीं क्लास फ़िज़िक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी, इंग्लिश कोर/इंग्लिश इलेक्टिव के साथ होनी चाहिए और कम से कम 45 फ़ीसदी अंक लाने ज़रूरी हैं.
कनिष्क यादव ने बताया कि अब केंद्र सरकार के तहत आने वाले सारे अस्पताल नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट यानी नीट के ज़रिए ही नर्सिंग कोर्स में भी दाख़िला देते हैं. लेकिन राज्य सरकार के कॉलेज या फिर प्राइवेट कॉलेज में अलग एंट्रेंस टेस्ट के आधार पर एडमिशन मिलता है. सरकारी कॉलेजों में फ़ीस सालाना एक लाख रुपए तक और प्राइवेट कॉलेज में अलग-अलग होती है.
नर्सिंग कैसे है अच्छा पेशा?
कुछ दिन पहले ही भारत में हेल्थ वर्कफ़ोर्स पर सरकार ने ताज़ा आंकड़े जारी किए थे और इसमें बताया गया था कि भारत में एक हज़ार मरीज़ों पर तकरीबन दो नर्स मौजूद हैं.
नर्सिंग की पढ़ाई के लिए देश में 5,310 संस्थान हैं, जिनमें से 806 सरकारी हैं.
हर साल 3.82 लाख नर्सिंग करने वाले पास हो रहे हैं.
एम्स दिल्ली, कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग - क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (सीएमसी) वेल्लोर, बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी - इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी- लखनऊ, पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च - चंडीगढ़, सेंट स्टीफ़ंस हॉस्पिटल कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग - दिल्ली जैसे कुछ संस्थान हैं, जो नर्सिंग कोर्स के लिए काफ़ी अच्छे माने जाते हैं.
सरकारी आंकड़े कहते हैं कि भारत में फिलहाल करीब एक लाख बीस हज़ार बीएससी नर्सिंग सीट हैं. इसके अलावा जीएनएम, एमएससी नर्सिंग और पीएचडी करने वाले भी हैं. हालांकि, जानकार कहते हैं कि नर्सिंग में अक्सर स्टूडेंट कहीं और सफलता ना मिलने की वजह से आते हैं. मसलन, कोई एमबीबीएस या बीडीएस में दाख़िला नहीं पा सका तो वो नर्सिंग में आ गया.
नर्सिंग में भरसक संभावनाओं का ज़िक्र करते हुए कनिष्क यादव कहते हैं, "हर साल सरकारी और प्राइवेट मिलाकर हज़ारों वैकेंसी आती हैं. लेकिन अभी तक नर्स के काम को हल्का समझा जाता आया है. हालांकि, कोरोना के बाद स्थितियां बदली हैं, लेकिन लोगों को जागरूक बनाने की ज़रूरत है कि नर्सिंग कोई कम तर पेशा नहीं है. आप एक दिन अस्पताल, नर्सिंग होम या कोई भी हेल्थ फेसिलिटी को नर्स के बिना सोचकर देखिए. क्या वो चल पाएंगे?"
उनके मुताबिक, "जागरुकता कम होने से एक फ़ायदा स्टूडेंट के लिए ये है कि प्रतिस्पर्धा भी तुलनात्मक रूप से कम है. यानी एक टीचर की वैकेंसी के लिए अगर लाखों आवेदन आ रहे हैं तो नर्सिंग के लिए ऐसा नहीं होगा. क्योंकि उतने कैंडिडेट ही नहीं हैं."
क्या है ग्रोथ की संभावनाएं?
अगर आप एनएम, जीएनएम या बीएससी नर्सिंग करने का सोच रहे हैं, तो जानकार ऐसी कुछ स्किल बताते हैं जिन पर अभी से काम शुरू किया जा सकता है.
स्वाति ने बताया, "सबसे ज़रूरी है कम्युनिकेशन. यानी मरीज़ हो या डॉक्टर दोनों से साफ़ बात करनी है. एम्पैथी, ताकि मरीज़ के दर्द को समझा जा सके. धैर्य, क्योंकि लंबी ड्यूटी करनी होती है, अलग-अलग स्वभाव के लोगों से सामना होता है. और लीडरशिप, क्योंकि अचानक स्थितियां बदलने पर तुरंत फ़ैसले लेने पड़ सकते हैं."
वहीं भविष्य में मिलने वाले मौके को लेकर कनिष्क यादव ने बताया, "बीएससी नर्सिंग करने वाले तो पढ़ाने की तरफ़ भी रुख कर सकते हैं. हालांकि, अब कई स्टूडेंट एमएससी नर्सिंग और पीएचडी भी कर रहे हैं. तो ऐसे में बीएससी वाले बड़े-बड़े सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में अच्छे पदों तक जा सकते हैं."
हालांकि, नर्सिंग के करियर में कमाई के सवाल पर उन्होंने कहा कि ये इस बात पर निर्भर है कि नौकरी कहां मिली है.
कनिष्क यादव ने कहा, "अगर किसी को केंद्र सरकार के अस्पताल में नौकरी मिली है तो शुरुआत ही 80 हज़ार से होगी. राज्य सरकार में ये कम होगी, क्योंकि वहां भत्ते कम होते हैं. और प्राइवेट में अस्पताल कितना बड़ा है, उसके हिसाब से. लेकिन आम तौर पर 25-30 हज़ार रुपए शुरू में मिलते हैं."
वह बताते हैं कि करीब साढ़े छह लाख भारतीय नर्स दूसरे देशों में काम कर रहे/रही हैं. यानी नर्सिंग के बाद जिस भी देश का चाहें, ज़रूरी टेस्ट दें और अगर पास हो जाते हैं तो वहां जाकर प्रैक्टिस करें. साथ ही क्लिनिक, स्कूल, आर्मी, डीआरडीओ, इसरो भी नर्स को अच्छा पैसा देते हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिवन्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.