ट्रंप बोले अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने पर हुई बातचीत, ईरान के विदेश मंत्रालय ने किया इनकार

पढ़ने का समय: 9 मिनट

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि मध्य पूर्व में चल रहे टकराव को पूरी तरह ख़त्म करने को लेकर बातचीत हुई है. उन्होंने कहा कि 'पूरी तरह समाधान' के मुद्दे पर 'सकारात्मक बातचीत' हुई है.

ट्रंप ने यह भी कहा कि वह ईरान के बिजली संयंत्रों और ऊर्जा ढांचे पर किसी भी तरह के हमलों को पांच दिन के लिए टालेंगे.

लेकिन ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बातचीत वाले बयान को नकार दिया है.

इससे पहले ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने लिखा, "मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि अमेरिका और ईरान के बीच पिछले दो दिनों में मध्य पूर्व में टकराव के पूरी तरह समाधान को लेकर बहुत अच्छी और सकारात्मक बातचीत हुई है."

"इस रचनात्मक बातचीत के रुख़ और माहौल को देखते हुए, जो पूरे सप्ताह जारी रहेंगी, मैंने वॉर डिपार्टमेंट को निर्देश दिया है कि ईरान के बिजली संयंत्रों और ऊर्जा ढांचे पर सभी सैन्य हमलों को पांच दिन के लिए टाल दिया जाए. यह फ़ैसला बैठकों और चर्चाओं की सफलता पर निर्भर करेगा."

बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

लेकिन ईरान ने ऐसी किसी बातचीत से मना किया है.

बीबीसी के अमेरिकी साझेदार सीबीएस न्यूज़ के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "हम अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कही गई उस बात को नकारते हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत चल रही है."

बयान में आगे कहा "हम (ईरान) अपनी उसी बात पर क़ायम हैं कि किसी भी तरह की बातचीत तभी होगी जब युद्ध से जुड़े ईरान के लक्ष्य पूरे हो जाएंगे."

इससे पहले बीबीसी फ़ारसी की वरिष्ठ संवाददाता घोंचेह हबीबीज़ाद के मुताबिक़ ईरान की फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी ने एक अज्ञात ईरानी स्रोत के हवाले से कहा है कि "ट्रंप के साथ कोई सीधा या अप्रत्यक्ष संपर्क नहीं है."

ये एजेंसी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर यानी आईआरजीसी से जुड़ी है.

हबीबीज़ाद के अनुसार, स्रोत का कहना है कि "जब ट्रंप ने सुना कि हमारे निशाने पर पश्चिम एशिया के सभी पावर स्टेशन होंगे, तो वह पीछे हट गए."

परमाणु मामले पर ईरान हो सकता है सहमत-ट्रंप

ईरान के बिजली ढांचे को तबाह करने की 48 घंटे की डेडलाइन से पीछे हटने के बाद ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में संकेत दिया कि ईरान के 'एक शीर्ष व्यक्ति से अमेरिका की बातचीत' हो रही है.

फ़्लोरिडा के पाम बीच में डोनाल्ड ट्रंप ने अपने विमान में बैठने से पहले पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "वे (ईरान) चाह रहे हैं कि समझौता हो, हम भी समझौता करना चाहते हैं. आज हम शायद फ़ोन पर बात करेंगे."

ट्रंप ने आगे कहा, "अगर सब ठीक रहा, तो हम इसे सुलझा लेंगे. नहीं तो हम बस लगातार बम बरसाते रहेंगे."

ईरान के साथ बातचीत पर उन्होंने कहा, "देखेंगे कि वे क्या करते हैं. हमारे बीच में ज़्यादातर मुद्दों पर सहमति है. मैं कहूंगा कि लगभग सभी मुद्दों पर सहमति है."

राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिक एक शीर्ष व्यक्ति से बात कर रहा है लेकिन सर्वोच्च नेता से नहीं. ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा ख़ामेनेई के बारे में उन्होंने कहा, "पता नहीं वो ज़िंदा हैं या नहीं."

ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान शांति के बदले अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम की योजनाओं को छोड़ने के लिए तैयार हो सकता है.

उन्होंने कहा, "कल सुबह, उनके समय के अनुसार, हम उनके सबसे बड़े बिजली उत्पादन प्लांटों को उड़ाने वाले थे, जिनके निर्माण पर 10 अरब डॉलर से ज़्यादा ख़र्च हुआ है."

"वह बहुत बड़ा था, पैसे की कोई कमी नहीं थी. एक वार में सब ख़त्म हो जाता. वह ढह जाता. वे ऐसा क्यों चाहेंगे? इसलिए उन्होंने कॉल किया, मैंने नहीं किया. उन्होंने कॉल किया. वे समझौता करना चाहते हैं."

ट्रंप ने कहा, "और हम समझौता करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. यह एक अच्छा समझौता होना चाहिए और इसमें आगे कोई युद्ध नहीं होना चाहिए, कोई परमाणु हथियार नहीं होना चाहिए. वे अब परमाणु हथियार नहीं रखेंगे. वे इस बात पर सहमत हो रहे हैं. अगर इनमें से कुछ भी होता है, तो कोई समझौता नहीं होगा."

गिरे तेल और गैस के दाम

डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद शेयर बाज़ारों में तेज़ी आना शुरू हो गई है.

बयान के बाद ब्रेंट क्रूड की क़ीमत में 13% की गिरावट आई है और यह लगभग 96 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है.

लंदन के एफ़टीएसई सूचकांक में अब 0.5% की वृद्धि हुई है, जबकि इससे पहले इसमें 2% से अधिक की गिरावट आई थी.

गैस की क़ीमतें 159 पेंस प्रति थर्म से गिरकर लगभग 139 पेंस प्रति थर्म हो गई हैं.

ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में ये भी कहा कि अगर ईरान के साथ समझौता हो जाता है तो तेल के दाम तेज़ी से नीचे आ जाएंगे.

कई अहम सवालों के जवाब नहीं मिले

बर्नड डेबसमैन जूनियर, व्हाइट हाउस रिपोर्टर

डोनाल्ड ट्रंप का कुछ देर पहले दिया गया संदेश शायद 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' की शुरुआत के बाद से उनका सबसे सुलह वाला संदेश था. लेकिन इससे कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब नहीं मिलते.

उन्होंने ईरान के साथ 'बहुत अच्छी और उपयोगी' बातचीत का ज़िक्र किया. लेकिन ईरान की ओर से इसकी पुष्टि नहीं आई है. यह बयान बीते दो दिनों में दोनों पक्षों के अपनाए गए आक्रामक लहज़े के बिल्कुल विपरीत है.

इसके अलावा, यह स्पष्ट नहीं है कि इन वार्ताओं का मुख्य विषय क्या था.

शायद यह ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम या परमाणु संवर्धन या मात्र युद्धविराम का मुद्दा रहा होगा.

ये एक ऐसी संभावना है जिसे ट्रंप ने शुक्रवार को विशेष रूप से नकार दिया था.

इसके पीछे यह होर्मुज़ स्ट्रेट भी वजह हो सकती है, हालांकि ईरान ने अभी तक सार्वजनिक रूप से इसे समुद्री यातायात के लिए खोलने का वादा नहीं किया है.

ज़्यादातर जानकार इसे नामुमकिन मानते हैं, क्योंकि होर्मुज़ पर ईरान का मजबूत नियंत्रण युद्ध में उसकी सबसे बड़ी ताक़त है.

अब दुनिया की नज़र इन वार्ताओं के बारे में किसी भी अपडेट या विवरण पर है. सब यही जानने की कोशिश करेंगे कि भविष्य में इसका क्या मतलब हो सकता है.

ट्रंप के बयान पर क्या बोले ईरान के लोग?

घोंचेह हबीबीज़ाद, वरिष्ठ संवाददाता, बीबीसी फ़ारसी

ईरान में सरकार की ओर से लगाए गए इंटरनेट बैन के बीच भी कुछ लोग किसी तरह इंटरनेट का इस्तेमाल कर पा रहे हैं. जिन लोगों से मेरी बात हो रही है, वे सभी मौजूदा व्यवस्था के ख़िलाफ़ हैं.

मेरे ट्रुथ सोशल देखने से पहले ही राजधानी तेहरान में रहने वाले करीब 20 साल के एक युवक ने मुझे अमेरिकी राष्ट्रपति के फ़ैसले की ख़बर भेजी.

युवक ने बताया, "इस जंग का अंत ईरान के लोगों के लिए बहुत महंगा साबित होगा, चाहे इस्लामिक रिपब्लिक क़ायम रहे या यह समझ लें कि उसके आख़िरी दिन चल रहे हैं."

उत्तरी ईरान के एक शहर में रहने वाली करीब 20 साल की एक महिला कहती हैं, "ट्रंप हमें पागल बना रहे हैं."

तेहरान के ही क़रीब 20 साल के एक अन्य युवक ने कहा, "मैंने अभी अपने दोस्त को फ़ोन किया और हम हंसने लगे. हम कैसी ज़िंदगी जी रहे हैं?"

वहीं, तेहरान की एक और युवती कहती हैं, "ट्रंप बहुत अनिश्चित हैं. मुझे नहीं पता आगे क्या होने वाला है."

ट्रंप ने दी थी 48 घंटे की डेडलाइन

एक दिन पहले ही ट्रंप ने होर्मुज़ स्ट्रेट खोलने के लिए ईरान को डेडलाइन देते हुए कहा था कि होर्मुज़ को पूरी तरह से खोलने के लिए 'ईरान के पास 48 घंटे हैं.'

ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया, "अगर ईरान ने बिना किसी धमकी के अगले 48 घंटों में होर्मुज़ स्ट्रेट को नहीं खोला तो अमेरिका उसके कई पावर प्लांट्स पर हमला करके उन्हें तबाह कर देगा और इसकी शुरुआत होगी उनके सबसे बड़े प्लांट से."

शनिवार को डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी ऐसे समय आई, जब ईरान की दो मिसाइलों ने दक्षिणी इसराइल को निशाना बनाया, जिसमें इसराइल का अघोषित परामाणु ठिकाना भी शामिल है. इस हमले में 100 से ज़्यादा लोग घायल हुए, जो जंग शुरू होने के बाद का सबसे बड़ा हमला माना जा रहा है.

लेकिन ईरान ने ट्रंप की धमकी का जवाब देते हुए कहा था कि वो क्षेत्र में अमेरिका और उससे जुड़े देशों के ऊर्जा केंद्रों, डीसैलिएशन ढांचे (पानी शुद्ध करने वाले प्लांटों) पर हमले करेगा.

जबकि रविवार को ट्रंप ने एक पोस्ट में दावा किया था कि "अमेरिका ने ईरान को नक्शे से मिटा दिया है."

असल में न्यूयॉर्क टाइम्स ने ट्रंप के युद्ध रिकॉर्ड के विश्लेषण वाली एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसका शीर्षक था- ट्रंप इस हाइडिंग द ट्रुथ अबाउट वॉर इन ईरान.

ट्रंप ने इस आरोप को ख़ारिज किया कि वह ईरान में अपने लक्ष्यों को हासिल करने में 'असफल रहे हैं.' उन्होंने कहा, "हाँ, मैंने हासिल किया है और तय समय से कई हफ़्ते पहले."

होर्मुज़ स्ट्रेट पर ईरान का बयान

ट्रंप की ताज़ा टिप्पणी से कुछ घंटे पहले ईरान ने स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में समुद्री सुरक्षा को लेकर एक लंबा बयान जारी किया था.

ईरानी विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया, "ईरान ने संयुक्त राष्ट्र के चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों को लेकर प्रतिबद्ध एक ज़िम्मेदार देश के तौर पर समुद्री मार्ग की स्वतंत्रता और सुरक्षा के सिद्धांतों को लगातार बनाए रखा है."

"कई सालों से ईरान ने इस क्षेत्र में मौजूद फ़ारस खाड़ी, होर्मुज़ स्ट्रेट और ओमान सागर में इन सिद्धांतों की रक्षा करने का प्रयास किया है. यह स्पष्ट है कि व्यवहार में इन सिद्धांतों का सम्मान समुद्र तट पर स्थित देशों की संप्रभुता और अधिकारों के सम्मान के बिना संभव नहीं है."

ईरानी विदेश मंत्रालय ने आगे कहा, "28 फरवरी 2026 से, संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) और बल प्रयोग को प्रतिबंधित करने वाले नियमों का स्पष्ट उल्लंघन करते हुए अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हमला किया. इसके परिणामस्वरूप फ़ारसी खाड़ी क्षेत्र और होर्मुज़ स्ट्रेट में एक ख़तरनाक स्थिति पैदा हो गई है. इसने नेविगेशन और शिपिंग की सुरक्षा को सीधे तौर पर प्रभावित किया है."

"ईरान ने इन हमलों की वजह से आत्मरक्षा में इस इलाक़े में अमेरिका के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है. ईरान ने कई ऐसे उपाय अपनाए हैं, जिनसे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि हमलावर और उनके समर्थक ईरान के ख़िलाफ़ अपनी दुश्मनी के मक़सद को आगे बढ़ाने के लिए होर्मुज़ स्ट्रेट का दुरुपयोग न कर सकें."

ईरानी विदेश मंत्रालय का कहना है, "होर्मुज़ स्ट्रेट के तटीय देश के रूप में और अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक़ ईरान ने उन जहाज़ों के गुजरने पर रोक लगा दी है जो हमला करने वाले पक्षों के मालिकाने वाले हैं या उनसे जुड़े हैं, या फिर जो उनकी आक्रामक गतिविधियों में भाग ले रहे हैं."

"बार-बार ज़ोर देकर कहा गया है कि होर्मुज़ स्ट्रेट बंद नहीं है, इसके माध्यम से होने वाला समुद्री यातायात निलंबित नहीं किया गया है. इस रास्ते से जहाज़ों का आवागमन जारी है, बशर्ते कि इसके लिए ज़रूरी उपायों और युद्ध की वजह से पैदा पहलुओं का पालन किया जाए."

इससे पहले आईआरजीसी ने कहा था कि अगर अमेरिका ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमला करता है तो स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ को 'पूरी तरह' बंद कर दिया जाएगा.

ईरानी मीडिया में दिए गए बयान में आईआरजीसी ने कहा, "ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले हुए तो होर्मुज़ स्ट्रेट को तब तक नहीं खोलेंगे, जब तक हमारे तबाह हुए पावर प्लांट्स दोबारा नहीं बन जाते."

आईआरजीसी ने कहा है, "वे इसराइल में पावर प्लांट्स, ऊर्जा ठिकानों और आईटी को व्यापक रूप से निशाना बनाएंगे. ऐसी सभी कंपनियों को निशाना बनाएंगे जिनमें अमेरिकी शेयरधारक हैं."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित