You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
ट्रंप ने ईरान को एक ही रात में ख़त्म करने की धमकी दी, ईरान ने दिया ये जवाब
- Author, बर्न्ड डिबशमैन जूनियर और टॉम बेटमैन
- पदनाम, व्हाइट हाउस से
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी है कि 'ईरान को एक ही रात में ख़त्म किया जा सकता है'.
ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान उनकी दी गई डेडलाइन से पहले अमेरिका से डील करने में नाकाम रहता है तो वो कल (मंगलवार) की रात भी हो सकती है.
ट्रंप की डील के मुताबिक़ ईरान को होर्मुज़ स्ट्रेट खोलना होगा, जहां से दुनिया भर की तेल सप्लाई का 20 फ़ीसदी हिस्सा ट्रांसपोर्ट होता है. ट्रंप की दी गई ये डेडलाइन मंगलवार को वॉशिंगटन डीसी समयानुसार रात 8 बजे (भारतीय समयानुसार बुधवार सुबह 5.30 बजे) ख़त्म हो रही है.
व्हाइट हाउस में बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि उनका मानना है कि ईरान के मौजूदा नेता 'अच्छी नीयत' से बातचीत कर रहे हैं, लेकिन नतीजा अब भी अनिश्चित बना हुआ है.
इस बीच, ईरान ने अस्थायी युद्धविराम के प्रस्तावों को ख़ारिज कर दिया है. इसके बजाय उसने संघर्ष को स्थायी रूप से ख़त्म करने और प्रतिबंध हटाने की मांग की है.
अमेरिकी ज्वाइंट चीफ़्स ऑफ़ चेयरमैन जनरल डान केन और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ भी ट्रंप के साथ इस प्रेस कॉन्फ़्रेंस में मौजूद रहे.
पिछले सप्ताह ही अमेरिकी सुरक्षा बलों ने दक्षिणी ईरान में मार गिराए गए एक एफ़-15 लड़ाकू विमान के दो क्रू सदस्यों को सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया था.
रेस्क्यू मिशन की तारीफ़ और ईरान को धमकी
ट्रंप की प्रेस कॉन्फ़्रेंस का बड़ा हिस्सा उसी रेस्क्यू मिशन पर केंद्रित रहा. उन्होंने इसे 'बहादुरी भरा मिशन' क़रार दिया.
लेकिन साथ ही उन्होंने एक बार फिर अपनी चेतावनी दोहराई कि अगर मंगलवार की तय डेडलाइन तक होर्मुज़ स्ट्रेट नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा और परिवहन ढांचे पर हमला कर सकता है.
उन्होंने सोमवार को कहा, "पूरे देश को एक ही रात में खत्म किया जा सकता है और वह रात शायद कल की रात हो."
ट्रंप ने आगे कहा कि डेडलाइन गुज़रने के बाद ईरान को 'स्टोन एज (पाषाण युग)' में वापस भेज दिया जाएगा.
उन्होंने कहा, "उनके पास कोई पुल नहीं बचेगा. उनके पास कोई पावर प्लांट नहीं बचेगा."
ईरान की ओर से पहले अमेरिकी मांगों को ख़ारिज किए जाने के बावजूद, ट्रंप ने फिर भी उम्मीद जताई कि अमेरिकी और इसराइली हमलों में ईरान के कई नेताओं के मारे जाने के बाद भी ईरान 'अच्छी नीयत से बातचीत' कर रहा है.
एक अधिकारी के मुताबिक, सीज़फ़ायर के बिना किसी भी बातचीत में ठोस प्रगति नहीं हो सकती.
नाम न बताने की शर्त पर उस अधिकारी ने कहा कि ईरान के अधिकारियों तक संदेश पहुंचाने और वहां से जवाब पाने में मुश्किलें हैं, क्योंकि वहां संचार व्यवस्था ठप है.
अधिकारी ने कहा, "ईरान तक संदेश पहुंचाकर उचित समय में जवाब पाना संभव नहीं है. औसतन जवाब आने में करीब एक दिन लग रहा है."
इस बीच पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं.
आगे की रणनीति पर ट्रंप ने ज्यादा जानकारी नहीं दी. उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि उनके पास 'सबसे बेहतरीन प्लान' है, लेकिन वह इसे मीडिया के सामने उजागर नहीं करेंगे.
कानूनी विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ईरान के बुनियादी ढांचे पर जानबूझकर और लगातार हमले युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकते हैं.
बराक ओबामा प्रशासन के दौर के नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के एक पूर्व क़ानूनी सलाहकार ने सीबीएस (बीबीसी के अमेरिकी साझेदार) से कहा, "सभी पावर प्लांट्स तबाह कर देना और नागरिक आबादी पर दबाव बनाकर सरकार को बातचीत की मेज पर लाने की धमकी देना पूरी तरह ग़ैरक़ानूनी है."
लेकिन प्रेस कॉन्फ़्रेंस से पहले युद्ध अपराध के सवाल पर ट्रंप ने कहा था कि वह इसे लेकर 'चिंतित नहीं' हैं. प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि, "ईरान की जनता आज़ादी के लिए कष्ट सहने को तैयार होगी भले ही ईरान की सरकार को गिराना मेरा मक़सद न हो."
राष्ट्रपति ने अमेरिका के प्रमुख सहयोगियों (जिनमें नेटो, ब्रिटेन और दक्षिण कोरिया भी शामिल हैं) पर भी फिर निशाना साधा. उनका कहना था कि संघर्ष के दौरान वे अमेरिका की मदद के लिए आगे नहीं आए.
उन्होंने कहा, "यह नेटो पर ऐसा दाग है जो कभी नहीं मिटेगा."
उन्होंने ये भी कहा कि, "अमेरिका को ब्रिटेन की ज़रूरत नहीं है."
अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड के ताज़ा अपडेट के मुताबिक़ 28 फ़रवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिकी बल ईरान में 13,000 से ज़्यादा हमले कर चुके हैं.
ईरान का जवाब
वहीं ट्रंप की इस धमकी के जवाब में ईरान ने 'अस्थायी युद्धविराम' को ठुकराया है और संघर्ष के 'स्थाई अंत' की मांग की है.
अपनी आधिकारिक न्यूज़ एजेंसी आईआरएनए में प्रकाशित अपने प्रस्ताव में ईरान ने अपनी मांगों में कहा है कि
- उस पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएं
- होर्मुज़ स्ट्रेट से जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने में उसका सहयोग किया जाए
- और हमलों से क्षतिग्रस्त उसके नागरिक ढांचों के पुनर्निर्माण में सहयोग किया जाए
ईरान ने अमेरिकी-इसराइली हमलों के जवाब में इसराइल और अन्य पड़ोसी इलाकों पर मिसाइल हमले जारी रखे हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.