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'मेरी बेटी मलबे के नीचे दबी है', अमेरिकी-इसराइली हमलों के बीच तेहरान का हाल
- Author, नवल अल-मग़ाफ़ी
- पदनाम, सीनियर इंटरनेशनल इन्वेस्टिगेशन संवाददाता
- Author, रुज़गार अक्गुन, ईशान जावेरी और एमिल कोस्टार्ड
- पदनाम, बीबीसी आई
- पढ़ने का समय: 9 मिनट
मलबे के पास खड़ी मां अपनी बेटी के लिए रो रही है.
कई दिनों से वह बचाव कर्मियों का इंतज़ार कर रही है कि वे उस मलबे को हटाएं. यहां कभी पूर्वी तेहरान के एक रिहायशी इलाके रिसालत में उनकी बेटी का फ्लैट हुआ करता था.
वही महिला कहती है, "उनके (ईरान सरकार) पास उसे बाहर निकालने के लिए ज़रूरी लोग नहीं हैं."
"मेरी बेटी मलबे के नीचे दबी है, उसे अंधेरे से डर लगता है."
बीते एक महीने से ईरान अमेरिका और इसराइल से जंग लड़ रहा है. अमेरिका-इसराइल, ईरान में उन ठिकानों पर हमले कर रहे हैं जो सरकार के साथ जुड़े हुए हैं.
लेकिन इन हमलों का आस-पास रहने वाले आम लोगों पर भी बेहद बुरा असर पड़ रहा है.
अब वे आसमान से हो रही बमबारी और दमनकारी शासन के बीच उलझ गए हैं. इसी शासन ने जनवरी में सत्ता-विरोधी प्रदर्शनों पर लोगों के ख़िलाफ़ जानलेवा कार्रवाई की थी.
युद्ध शुरू होने के बाद से बीबीसी आई ने तेहरान के अंदर मौजूद स्वतंत्र पत्रकारों से खास फुटेज जमा किए हैं.
बीबीसी को ईरान में जाने की इजाजत बहुत कम ही मिलती है. युद्ध शुरू होने के बाद से तो हमें वहां जाने की बिल्कुल भी इजाजत नहीं मिली है.
हमने चश्मदीदों के बयान जमा किए हैं. हमलों के बाद के हालात को रिकॉर्ड किया है. सोशल मीडिया और सैटेलाइट तस्वीरों से मिले फुटेज को एनालिसिस किया है.
हमारे एनालिसिस से पता चलता है कि तेहरान के रिहायशी इलाकों में मौजूद सरकार से जुड़े ठिकानों पर लगातार हमले हुए हैं. जो आस-पास रहने वाले लोगों के लिए जानलेवा साबित हुए हैं.
रिसालत में बनी उस बहुमंजिला अपार्टमेंट इमारत में दर्जनों परिवार रहते थे, जिसे 9 मार्च को एक इसराइली हवाई हमले में तबाह कर दिया गया था.
मलबे में फंसी बेटी अपने पति और अपनी छोटी बेटी के साथ उसी इमारत में रहती थी. हमले के कुछ दिनों बाद वो और उनकी बेटी मलबे के नीचे मृत पाए गए. हालांकि उनके पति बच गए.
सड़क के दूसरी ओर स्थित एक और अपार्टमेंट बिल्डिंग भी उस हवाई हमले में तबाह हो गई.
वहां के एक अपार्टमेंट में रहने वाले 55 साल के एक व्यक्ति ने बताया कि यह हमला 'इतना अचानक' हुआ था कि वह "कमरे में दूसरी ओर जा गिरे."
वह कहते हैं कि उनकी सारी चीजे अब मलबे के नीचे दबी हुई हैं. वो बताते हैं, "मेरे पास अब कुछ भी नहीं बचा है. मेरे सारे डॉक्यूमेंट्स, सब कुछ खत्म हो गया."
स्थानीय अधिकारियों और निवासियों का कहना है कि इस एक ही हमले में 40 से 50 लोगों की मौत हो गई. जो लोग बेघर हो गए हैं वो फिलहाल पास के ही एक होटल में ठहरे हुए हैं.
उन्होंने कहा, "यही तो हमारी ज़िंदगी थी."
सैटेलाइट तस्वीरों से क्या पता चला?
इसराइल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) ने बीबीसी को एक बयान में कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक, "अपने हमले सिर्फ वैध सैन्य ठिकानों पर ही करता है."
आईडीएफ ने कहा कि वह, "इस बात की पुष्टि कर सकता है कि हताहतों की संख्या बताई गई संख्या से काफी कम है."
आईडीएफ का कहना है कि उसने एक ऐसी सैन्य इमारत को निशाना बनाया जिसका इस्तेमाल ईरानी बासिज करता था. ईरानी बसिज एक अर्धसैनिक बल है जो ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) से जुड़ा है.
लेकिन हमले के बाद के हालात के एनालिसिस से पता चलता है कि इसका असर उस एक जगह से कहीं ज्यादा दूर तक हुआ.
हमले के कुछ दिनों बाद ली गई सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि कम से कम चार इमारतें तबाह हो गईं.
हालांकि, यह बात तो सबको पता थी कि इनमें से एक इमारत 'बसीज' से जुड़ी हुई थी. लेकिन उसके आस-पास की दूसरी इमारतें रिहायशी थीं.
घटनास्थल से मिली फुटेज, जिसकी पुष्टि बीबीसी आई ने की है, दिखाती है कि पूरे इलाके में भारी तबाही मची हुई है. हमारे एनालिसिस से पता चलता है कि धमाके की वजह से 65 मीटर तक की दूरी पर मौजूद इमारतों को भी भारी नुकसान पहुंचा है.
वहां रहने वाले लोगों ने भी बताया कि कुछ ही सेकंड के अंतराल पर कई धमाके हुए. एक सर्वाइवर ने बताया, "उन्होंने तीन बार हमला किया."
"शायद उनके बीच तीन या पांच सेकंड का फासला था. मैंने उठने की कोशिश की, लेकिन मेरे सिर पर मलबा आ गिरा."
मिलिट्री एक्सपर्ट्स ने क्या बताया
मिलिट्री एक्सपर्ट्स ने बीबीसी आई को बताया कि इस बात की काफी संभावना है कि इसराइली वायु सेना तेहरान में मार्क 80 सिरीज के बहुत बड़े बमों का इस्तेमाल कर रही है. जिनमें अक्सर सटीक गाइडेंस सिस्टम लगे होते हैं.
उन्होंने कहा कि रिसालत में जो नुकसान देखा गया है, उसका इंपैक्ट मार्क 84 के इस्तेमाल से मेल खाता है. यह इस सिरीज का सबसे बड़ा बम है, जिसका वजन 2,000 एलबी (907 किलोग्राम) है.
शहर में इस तरह के कुछ ऐसे बमों की तस्वीरें भी मिलीं जो फटे नहीं थे.
यूएन ने पहले भी देशों और सशस्त्र बलों से अपील की है कि वे ज्यादा आबादी वाले इलाकों में शक्तिशाली बमों का इस्तेमाल करने से बचें. क्योंकि इससे आम लोगों की जान को ख़तरा होता है.
बीबीसी आई ने इंटरनेशन ह्यूमन लॉ के दो एक्सपर्ट्स से बात की है. उनका मानना है कि ज्यादा आबादी वाले इलाके में इतने भारी बम का इस्तेमाल करना, आम नागरिकों को होने वाले संभावित नुकसान को देखते हुए, शायद गैर-कानूनी होगा.
रिसालत कोई अकेला मामला नहीं है. संघर्ष की शुरुआत से अब तक आईडीएफ ने बताया है कि उसने पूरे ईरान में 12 हजार से ज्यादा बम गिराए हैं. अकेले तेहरान पर ही 3,600 बम गिराए हैं.
यूएस सेंट्रल कमांड का कहना है कि उसने पूरे ईरान में नौ हजार से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए हैं.
अमेरिका और इसराइल के इन हमलों में से कई ने पुलिस स्टेशनों, बसीज मिलिशिया की इमारतों, पुलिस मुख्यालयों, सेना और पुलिस विश्वविद्यालयों, सेफ हाउस, आईआरजीसी के घरों, साथ ही संभावित गोला-बारूद के भंडारों और चौकियों को निशाना बनाया है.
अक्सर ये ठिकाने आम लोगों की भीड़भाड़ वाले इलाकों में ही होते हैं.
एक मार्च को इसराइल के एक हमले में नीलोफर चौक के पास स्थित अब्बासबाद पुलिस स्टेशन को निशाना बनाया गया. वहां रमजान का रोजा खोलने के बाद कई परिवार जमा हुए थे.
चश्मदीदों के मुताबिक, इस हमले में कम से कम 20 लोग मारे गए. हालांकि बीबीसी ने अभी तक इस आंकड़े की पुष्टि नहीं की है.
चश्मदीद ने बताया कि पहले एक 'खौफनाक रोशनी' दिखाई दी, जिसके बाद एक के बाद एक कई धमाके हुए.
एक व्यक्ति ने बताया, "हम भागकर सड़क पर आ गए."
"एक आदमी और एक औरत अभी-अभी एक दुकान से बाहर निकले ही थे, तभी वे इस हमले की चपेट में आ गए."
लोगों ने बताया कि एक ही टारगेट पर बहुत कम समय के अंतराल में कई बार हमले किए गए.
एक ओर चश्मदीद ने कहा, "दो मिनट भी नहीं बीते थे."
"जब हम वापस आए, तो उन्होंने फिर से हमला कर दिया."
आईडीएफ ने पुष्टि की कि इस हमले के लिए वही जिम्मेदार है. आईडीएफ ने कहा कि उसने "एक सैन्य लक्ष्य पर हमला किया था."
धमाके वाली जगह के बीबीसी आई के एनालिसिस से पता चलता है कि जैसा कि रिसालत में हुआ था, नुकसान उस तय लक्ष्य से कहीं ज्यादा दूर तक फैला था.
अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत, किसी भी संघर्ष में शामिल सभी पक्षों को आम नागरिकों की चीजों और सैन्य लक्ष्यों के बीच फर्क करना जरूरी है.
आम नागरिकों या आम इमारतों को होने वाला संभावित नुकसान, उस कार्रवाई से मिलने वाले संभावित सैन्य फायदे के अनुपात में ही होना चाहिए.
इसमें दोनों पक्षों से यह भी उम्मीद की जाती है कि वे जहां तक संभव हो, घनी आबादी वाले इलाकों के अंदर या उनके आस-पास सैन्य ठिकाने बनाने से बचें.
आईडीएफ ने की हमलों की पुष्टि
यूएस बेस्ड ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी (एचआरएएनए) का कहना है कि संघर्ष के पहले महीने में ईरान में कम से कम 217 बच्चों सहित 1,464 आम नागरिक मारे गए हैं.
वहां के निवासियों ने बीबीसी आई को बताया कि रिहायशी इलाकों पर होने वाले हमलों से लोगों में नाराजगी और बढ़ सकती है. यहां तक कि उन लोगों में भी जो पहले ईरानी शासन की आलोचना करते रहे थे.
बीबीसी ने इस रिपोर्ट में बताई गई घटनाओं के बारे में आईडीएफ से पूछा. आईडीएफ ने हमलों की पुष्टि तो की, लेकिन इस पर आगे कोई टिप्पणी नहीं की. अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया.
इस जंग के दौरान ईरान ने आस-पास के देशों में सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर और रिहायशी इमारतों पर भी हमले किए हैं. जैसे कि हवाई अड्डे और होटल. खासकर उन खाड़ी देशों में जो अमेरिका के सहयोगी हैं.
तेहरान में, लोगों ने युद्ध को लेकर ईरानी अधिकारियों की प्रतिक्रिया की आलोचना की.
उन्होंने बीबीसी को बताया कि सुरक्षा के बुनियादी उपायों के मामले में उन्हें बहुत कम इंतजाम दिखे. जिनमें लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने में मदद या विस्थापित लोगों के लिए अस्थायी रहने की व्यवस्था शामिल है.
जिन कई लोगों से हमने बात की, उन्होंने बताया कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी या निर्देश नहीं मिले कि हमलों के दौरान उन्हें कहां जाना चाहिए या खुद को कैसे सुरक्षित रखना चाहिए.
एक निवासी ने कहा, "न तो कोई सायरन बजता है, न ही कोई चेतावनी दी जाती है. आपको बस धमाके की आवाज सुनाई देती है."
कम्यूनिकेशन की कमी और इंटरनेट बंद होने के वजह से कई लोगों ने खुद को असुरक्षित महसूस किया. उन्हें पता नहीं था कि अगला हमला कब और कहां हो सकता है.
ईरानी सरकार ने इन हमलों के जवाब में देश भर के लिए किसी भी सिविलियन डिफेंस प्रोटोकॉल के बारे में सार्वजनिक रूप से कोई जानकारी नहीं दी है.
अमेरिका और इसराइल का कहना है कि वे ईरानी सरकार के बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहे हैं.
लेकिन एक ऐसे शहर में, जहां यह बुनियादी ढांचा घरों, दुकानों और स्कूलों के बिल्कुल बगल में मौजूद है. इन हमलों के नतीजे उन तय निशानों से कहीं ज्यादा दूर तक नुकसान पहुंचा रहे हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.