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ट्रंप बोले- मैं ईरान का तेल अपने कब्ज़े में लेना चाहता हूं, खार्ग द्वीप पर भी नियंत्रण संभव
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह "ईरान का तेल अपने कब्ज़े में लेना" चाहते हैं और खार्ग द्वीप पर भी नियंत्रण कर सकते हैं.
यह वही द्वीप है, जहाँ से ईरान का ज़्यादातर तेल निर्यात होता है.
ट्रंप ने फ़ाइनेंशियल टाइम्स से ये बात तब कही है जब एक तरफ़ ईरान जंग में संघर्ष विराम को लेकर पाकिस्तान और मध्य पूर्व के देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश हो रही है जबकि दूसरी ओर संभावित ज़मीनी हमलों के लिए हज़ारों की तादाद में अमेरिकी सेना मध्य पूर्व में पहुँच चुकी है.
हालाँकि, बाद में ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि ईरान के साथ समझौता 'बहुत जल्द' हो सकता है.
युद्ध के चलते तेल की क़ीमतों में तेज़ी आई है. एक महीने में क़ीमतें 50 प्रतिशत से ज़्यादा बढ़ गई हैं. सोमवार सुबह ब्रेंट क्रूड की क़ीमत बढ़कर 116 डॉलर प्रति बैरल हो गई.
28 फ़रवरी को ईरान पर हुए इसराइल-अमेरिका के हमले के पहले कच्चे तेल की क़ीमत 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी.
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इस बीच ईरान जंग में यमन के हूती विद्रोहियों की एंट्री ने रेड डी से ईंधन परिवहन पर भी ख़तरा बढ़ा दिया है.
हालाँकि 2023 में हमास-इसराइल संघर्ष के बाद से हूती हमले बढ़ने के कारण इस रूट से ईंधन परिवहन काफ़ी कम हुआ है.
उससे पहले पेट्रोलियम ईंधन का 12 प्रतिशत वैश्विक व्यापार इसी रास्ते होता था.
ट्रंप ने क्या कहा?
फ़ाइनेंशियल टाइम्स ने रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति का एक इंटरव्यू प्रकाशित किया.
इसमें ट्रंप ने कहा, "ईमानदारी से कहूँ, तो मेरी पसंदीदा चीज़ है ईरान का तेल लेना. लेकिन अमेरिका में कुछ लोग कहते हैं कि आप ऐसा क्यों कर रहे हैं. वे लोग बेवकूफ़ हैं."
ट्रंप ने संकेत दिया कि इस क़दम में खार्ग द्वीप पर कब्ज़ा शामिल हो सकता है.
उन्होंने कहा, "हो सकता है हम खार्ग द्वीप लें, हो सकता है नहीं लें. हमारे पास कई विकल्प हैं. इसका मतलब यह भी होगा कि हमें वहाँ कुछ समय तक रहना पड़ेगा."
जब उनसे द्वीप की सुरक्षा व्यवस्था के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि उनके पास कोई ख़ास सुरक्षा है. हम इसे बहुत आसानी से ले सकते हैं."
राष्ट्रपति ट्रंप की ये टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब अतिरिक्त 3500 अमेरिकी सैनिक मध्य पूर्व पहुँच चुके हैं.
ट्रंप ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत जारी है और इसमें प्रगति हो रही है.
लेकिन उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि संघर्षविराम समझौता जल्द होगा या नहीं.
उन्होंने कहा, "समझौता काफ़ी जल्दी हो सकता है."
संभावित अमेरिकी ज़मीनी हमले को लेकर ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाग़र ग़ालिबाफ़ ने कहा कि ईरानी सेनाएँ "अमेरिकी सैनिकों के ज़मीन पर उतरने का इंतज़ार कर रही हैं, ताकि उन पर आग बरसाई जा सके."
ईरान के ख़ातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता इब्राहिम ज़ोलफाग़री ने भी चेतावनी दी है कि ईरानी सशस्त्र बल क्षेत्र में मौजूद अमेरिका और इसराइल के 'कमांडरों और राजनीतिक अधिकारियों के घरों' को निशाना बना सकते हैं.
ख़ातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ईरान की सर्वोच्च ऑपरेशनल कमान इकाई है, जो देश की सेना की गतिविधियों में तालमेल करती है.
'ईरान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है'
ट्रंप ने रविवार को एयर फ़ोर्स वन पर पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि अमेरिका का मानना है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन का लक्ष्य हासिल हो चुका है.
उन्होंने कहा, "अगर आप देखें, तो वहाँ पहले ही शासन परिवर्तन हो चुका है. पहला शासन पूरी तरह ख़त्म हो गया, नष्ट हो गया, वे सभी मारे जा चुके हैं. दूसरा शासन भी लगभग ख़त्म हो चुका है. और अब तीसरे शासन में हम ऐसे लोगों से बात कर रहे हैं, जिनसे पहले कभी किसी ने बात नहीं की. यह बिल्कुल अलग समूह है, इसलिए मैं इसे शासन परिवर्तन मानता हूँ. और सच कहूँ तो वे काफी व्यावहारिक रहे हैं."
उन्होंने आगे कहा, "मुझे लगता है कि वहाँ शासन परिवर्तन हो चुका है. इससे बेहतर शायद ही कुछ हो सकता है."
ट्रंप ने कहा, "जो शासन बहुत ख़राब था, बहुत बुरा था, दूसरा जिसे नियुक्त किया गया था, वे सभी अब ख़त्म हो चुके हैं, मारे जा चुके हैं. केवल एक व्यक्ति बचा है, जिसमें शायद थोड़ी जान बाक़ी है."
यह टिप्पणी उन्होंने एक महीने से जारी युद्ध में ईरानी नेताओं के मारे जाने के ज़िक्र के दौरान की.
उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि हम उनके साथ समझौता कर लेंगे, लगभग तय है, लेकिन यह भी संभव है कि न हो."
ट्रंप ने आगे कहा, "ईरान के साथ कुछ कहा नहीं जा सकता, क्योंकि हम उनसे बातचीत करते हैं और फिर हमें उन्हें बम से उड़ाना पड़ता है."
खार्ग द्वीप पर क्यों है अमेरिका की नज़र?
अमेरिका की नज़र खार्ग द्वीप पर इसलिए है क्योंकि यहाँ एक बड़ा तेल टर्मिनल स्थित है, जिसे ईरान की अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा माना जाता है.
इस पर कब्ज़ा करने से न केवल ईरान के तेल निर्यात पर असर पड़ेगा, बल्कि यह मुख्य भूमि पर हमले करने के लिए एक रणनीतिक ठिकाना भी बन सकता है.
बीबीसी के सिक्युरिटी ब्रीफ़ से जुड़े सुरक्षा विश्लेषक मिकी के बताते हैं, "इस द्वीप पर कब्ज़ा करने से ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की आमदनी का एक बड़ा स्रोत बंद हो जाएगा, जिससे उसकी युद्ध और सुरक्षा गतिविधियों पर असर पड़ेगा."
वहीं, स्कूल ऑफ़ वॉर पॉडकास्ट के होस्ट और सीबीएस के राष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषक आरोन मैकलीन ने बीबीसी से कहा कि इस द्वीप पर कब्ज़ा करने के लिए अमेरिकी अभियान आकार में छोटा हो सकता है, लेकिन यह काफ़ी चुनौतीपूर्ण होगा.
खार्ग द्वीप ईरान के तट से महज़ 15 नॉटिकल मील (24 किलोमीटर) दूर एक छोटा पथरीला द्वीप है.
अपने छोटे आकार के बावजूद, यह ईरान के ऊर्जा इन्फ़्रास्ट्रक्चर का सबसे अहम हिस्सा है.
उत्तरी खाड़ी में स्थित इस छोटे लेकिन अहम द्वीप पर अमेरिका का हमला करना ईरान की अर्थव्यवस्था की मुख्य नस पर चोट करने जैसा है.
क्योंकि ईरान के कच्चे तेल का 90 फ़ीसदी हिस्सा इसी द्वीप पर स्थित टर्मिनल से आता है. इस तेल को मुख्य भूमि से पाइपलाइन के जरिए लाया जाता है.
दोनों तरफ़ से हमले जारी
ईरान और अमेरिका-इसराइल के बीच बीते 24 घंटों में लगातार हमले हुए हैं और खाड़ी के कई देशों में हमलों की ख़बरें हैं.
कुवैत में हुए हमले में 10 सैनिक घायल हुए हैं. सऊदी अरब में एक अमेरिकी एयर बेस पर हमले में एक अमेरिकी सैन्य विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है.
बीबीसी वेरिफ़ाई ने पुष्टि की है कि, तस्वीरों में दो हिस्सों में टूटा दिखाई दे रहा विमान ई-3 सेंट्री प्लेन है.
फ़ेसबुक पर पोस्ट की गई ये तस्वीरें सऊदी अरब की राजधानी रियाद से लगभग 100 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित प्रिंस सुल्तान एयर बेस की हैं.
एक अमेरिकी अधिकारी ने शुक्रवार को रॉयटर्स को बताया कि एयर बेस पर ईरानी सैन्य हमले में 12 अमेरिकी कर्मी घायल हुए, जिनमें से दो की हालत गंभीर है.
इसराइल डिफ़ेंस फ़ोर्सेस यानी आईडीएफ़ ने कहा है कि उसने ईरान की राजधानी तेहरान में कई जगहों को निशाना बनाया है. उससे ठीक पहले शहर में कई जगहों पर ज़बरदस्त धमाके सुनाई दिए थे.
ईरान के ऊर्जा मंत्रालय ने कहा है कि देश के ऊर्जा ढाँचे पर हमलों की वजह से तेहरान और अल्ब्रोज़ प्रांत के कई हिस्सों में बिजली बाधित हुई, हालाँकि अधिकांश इलाक़ों में फिर से बिजली बहाल हो गई है.
बातचीत की कोशिश कहाँ पहुँची
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इसहाक़ डार ने कहा है कि ईरान और अमेरिका दोनों ने पाकिस्तान पर भरोसा जताया है कि वह बातचीत में मदद कर सकता है.
इसहाक़ डार ने कहा, "पाकिस्तान आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच ख़ुशी से अहम बातचीत की मेज़बानी और मदद करेगा."
विदेश मंत्री इसहाक़ डार ने यह बातें इस्लामाबाद में पाकिस्तान, सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र के विदेश मंत्रियों के साथ हुई बैठक के बाद कही हैं.
इसहाक़ डार के मुताबिक़, उन्होंने तीनों देशों के विदेश मंत्रियों से क्षेत्र में जंग को जल्दी और हमेशा के लिए ख़त्म करने के तरीक़ों पर चर्चा की.
बीबीसी उर्दू के मुताबिक़, इससे पहले सऊदी अरब के विदेश मंत्री फ़ैसल बिन फ़रहान ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ से इस्लामाबाद में मुलाक़ात की.
इस बैठक में इसहाक़ डार, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार लेफ़्टिनेंट जनरल मुहम्मद आसिम मलिक और प्रधानमंत्री के विशेष सहायक तारिक़ फ़ातेमी भी मौजूद थे.
बीते दिनों अमेरिकी और इसराइली मीडिया में यह दावा किया गया था कि अमेरिका ने समझौते के लिए पाकिस्तान के ज़रिए ईरान को 15 सूत्रीय प्लान सौंपा है.
जबकि ईरान ने अपनी ओर से पाँच शर्तें रखी हैं, जिसमें होर्मुज़ स्ट्रेट पर ईरान के वैध अधिकार की बात कही है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.