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सिर्फ़ फल खाने से वज़न कम करने में मदद मिल सकती है लेकिन इसके कुछ नुक़सान भी हैं
- Author, शनमुग प्रिय सेल्वराज
- पदनाम, बीबीसी तमिल
- पढ़ने का समय: 5 मिनट
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में औसतन हर आठ में से एक व्यक्ति मोटापे से ग्रस्त है.
रिपोर्ट वर्ष 2025 में प्रकाशित हुई थी. इसके अनुसार, 1990 से 35 वर्षों की अवधि में दुनिया में मोटापे से ग्रस्त वयस्कों की संख्या दोगुनी हो गई है, जबकि किशोरों में यह वृद्धि चौगुनी हो गई.
2022 में 18 साल या उससे अधिक उम्र के 6.89 अरब लोग मोटापे से ग्रस्त थे. डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के अनुसार, इनमें से 43 प्रतिशत अधिक वज़न वाले और 16 प्रतिशत मोटापे से ग्रस्त थे.
विशेषज्ञों के अनुसार, जब किसी व्यक्ति के आहार और शारीरिक गतिविधि में असंतुलन होता है, तो उसका वज़न बढ़ जाता है या वह मोटापे का शिकार हो जाता है.
डब्ल्यूएचओ का कहना है कि अधिकतर मामलों में पर्यावरण, मनोदशा और आनुवंशिक जैसे कई कारक मोटापे को प्रभावित करते हैं.
लोग अपने आहार में बदलाव करके मोटापे से बचने के लिए अलग-अलग तरीक़े अपनाते हैं.
एक तरीक़ा फ्रूटेरियनिज़्म है, जिसमें व्यक्ति केवल फल, सूखे मेवे और विभिन्न प्रकार के सूखे बीज खाता है.
क्या शरीर के लिए केवल फल ही अच्छे होते हैं?
हालांकि कई लोग मानते हैं कि केवल फल खाने से वज़न कम करने में मदद मिलती है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह वास्तव में हेल्दी विकल्प है?
तमिलनाडु के इरोड के डॉक्टर अरुण कुमार का कहना है कि यह सच है कि केवल फल खाने से वज़न कम करने में मदद मिल सकती है, लेकिन यह स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है.
इसका कारण बताते हुए डॉ. अरुण कुमार कहते हैं, "जो लोग केवल फल खाते हैं, उन्हें अपनी दैनिक कैलोरी का 80 से 90 प्रतिशत हिस्सा फलों से मिलता है. आमतौर पर फलों में कैलोरी कम होती है और उनसे अधिकतम लगभग 1500 कैलोरी ही प्राप्त की जा सकती है."
"इससे कैलोरी की कमी होती है और वज़न कम होता है. हालांकि, केवल फल खाने से शरीर की प्रोटीन की आवश्यकता पूरी नहीं होती है, जिससे मांसपेशियां कमज़ोर हो सकती हैं."
इसके अलावा, केवल फल खाने से शरीर को आयरन, जिंक और ओमेगा-3 जैसे आवश्यक पोषक तत्व नहीं मिलते हैं.
इससे शरीर में फ्रक्टोज़ (एक प्रकार का प्राकृतिक शुगर) का स्तर बढ़ सकता है. साथ ही, ट्राइग्लिसराइड्स (एक प्रकार का फ़ैट) और लिवर में फ़ैट की मात्रा भी बढ़ सकती है.
डॉ. अरुण कुमार का कहना है कि सिर्फ़ फल खाना वज़न घटाने का सही तरीका नहीं है. वे वज़न घटाने के लिए खुराक में पर्याप्त मात्रा में फल शामिल करने की सलाह देते हैं, लेकिन केवल फल पर निर्भर रहने को ख़तरनाक मानते हैं.
अगर हम सिर्फ फल खाएं तो क्या होगा?
कई अध्ययनों से पता चला है कि केवल फल, मेवे या बीज खाने से अलग-अलग पोषक तत्वों की कमी हो सकती है.
अमेरिकी गैर-लाभकारी चिकित्सा संगठन मेयो क्लिनिक के अनुसार, केवल फल खाने से प्रोटीन, आवश्यक वसा, कैल्शियम, आयरन, विटामिन बी12 जैसे पोषक तत्व नहीं मिलते हैं.
इससे मांसपेशियां और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर होती है. साथ ही एनीमिया का ख़तरा बढ़ जाता है.
जर्नल ऑफ द इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ़ स्पोर्ट्स न्यूट्रिशन के अनुसार, अगर शरीर में प्रोटीन की कमी होती है, तो इसका सीधा प्रभाव पाचन तंत्र पर पड़ता है.
यह शरीर के दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए संतुलित खुराक की अहमियत को दिखाता है.
क्या चिकन और मटन खाने से मोटापा बढ़ता है?
ऐसी मान्यता है कि ज़्यादा चिकन और मटन खाने से मोटापा बढ़ता है. क्या इसमें कोई सच्चाई है?
डॉ. अरुण कुमार कहते हैं, "अगर चिकन और मटन का सेवन सही मात्रा में किया जाए, तो इससे वज़न कम करने में मदद मिल सकती है."
"अतिरिक्त कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट इंसुलिन स्राव को बढ़ाते हैं, जिससे शरीर में फ़ैट जमा होने लगती है. कार्बोहाइड्रेट की अधिक मात्रा वाले खाद्य पदार्थों का ज़्यादा सेवन पेट के आसपास फ़ैट जमा होने का कारण बनता है."
"कार्बोहाइड्रेट और कैलोरी से भरपूर और इंसुलिन स्राव बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करने से पेट के आसपास फ़ैट जमा हो जाती है."
उन्होंने कहा कि अगर चिकन और मटन जैसे खाद्य पदार्थों का सही मात्रा में सेवन किया जाए, तो यह वज़न घटाने के लिए एक उपयुक्त आहार हो सकता है.
वो वज़न घटाने के लिए मांस सहित कम कैलोरी वाले हेल्दी खाद्य पदार्थों का सेवन करने की सलाह देते हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.