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क़तर से माफ़ी मांगने के लिए नेतन्याहू की इसराइल में तीखी आलोचना
- Author, बीबीसी मॉनिटरिंग
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने 29 सितंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और क़तर के प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल-थानी के साथ कॉल के दौरान माफ़ी मांगी है.
यह माफ़ी 9 सितंबर को दोहा में हमास के सीनियर नेताओं पर हमले के बाद आई, जिसमें क़तर के एक सुरक्षा अधिकारी की मौत हो गई थी.
क़तर के विदेश मंत्रालय ने बताया कि 29 सितंबर को व्हाइट हाउस में ट्रंप और नेतन्याहू की मुलाक़ात के दौरान अल थानी को कॉन्फ़्रेंस कॉल की गई.
उसी शाम, इसराइल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने पोस्ट किया कि नेतन्याहू ने अल थानी से कहा: "हमारे (इसराइल) हमले में आपके (क़तर) एक नागरिक की मौत पर हमें अफ़सोस है."
बयान में यह भी कहा गया: "मैं आपको भरोसा दिलाना चाहता हूं कि इसराइल का निशाना हमास था, क़तर नहीं."
नेतन्याहू ने आगे कहा: "इसराइल का क़तर की संप्रभुता का फिर से उल्लंघन करने का कोई इरादा नहीं है."
इसराइली अख़बार मआरिव ने इस कॉल को 'असामान्य कूटनीतिक बातचीत' बताया और लिखा कि नेतन्याहू ने दोहा पर हमले और क़तर की संप्रभुता का उल्लंघन करने के लिए विस्तार से माफ़ी मांगी.
माफ़ी पर क़तर की प्रतिक्रिया
क़तर के बयान के मुताबिक़, अल थानी ने इस बात की सराहना की कि क़तर को अब निशाना न बनाने और उसकी संप्रभुता का उल्लंघन न दोहराने का आश्वासन दिया गया.
अल थानी ने यह भी कहा कि 'क़तर ग़ज़ा युद्ध को ख़त्म करने के प्रयासों में ट्रंप की योजना के तहत अपनी भूमिका निभाता रहेगा. यह क़तर की उस नीति को दिखाता है जिसमें वह संकटों को बातचीत से सुलझाने और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने का पक्षधर है.'
9 सितंबर को इसराइली सेना ने घोषणा की थी कि उसने दोहा में हमास के वरिष्ठ नेतृत्व पर 'टारगेटेड स्ट्राइक' की. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, हमले से पहले हमास नेता ग़ज़ा में युद्धविराम के अमेरिकी प्रस्ताव पर चर्चा कर रहे थे.
नेतन्याहू की माफ़ी से इसराइली मीडिया 'हैरान'
इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू की क़तर से माफ़ी को लेकर देश में राजनीतिक और मीडिया हलकों में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है.
इसराइली अख़बार मआरिव ने लिखा कि इस माफ़ी ने मीडिया को 'हैरान' कर दिया है और पत्रकारों के साथ नेताओं की ओर से 'कड़ी प्रतिक्रियाएं' सामने आई हैं.
वायनेट न्यूज़ वेबसाइट के अनुसार, यह फोन कॉल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिक्वेस्ट पर की गई थी.
मआरिव ने पब्लिक ब्रॉडकास्टर कान 11 के राजनीतिक संवाददाता माइकल शेमेश को कोट करते हुए लिखा कि यह माफ़ी 'दो ही चीज़ों की ओर इशारा करती है: या तो यह इसराइल का शर्मनाक आत्मसमर्पण है, या फिर टेबल पर कोई बहुत गंभीर समझौता रखा गया है.'
मीडिया संस्थान चैनल 12 के रिपोर्टर अमित सेगल, जो नेतन्याहू के समर्थक माने जाते हैं, ने टेलीग्राम पर लिखा: "घिनौने क़तरियों ने आज तक 7 अक्तूबर के नरसंहार की निंदा नहीं की है. भले ही इसके पीछे कोई राजनीतिक मज़बूरी हो, लेकिन यह घृणित और गंदा है."
नेताओं ने की आलोचना
अति-दक्षिणपंथी मंत्री इतामार बेन गवीर ने एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए क़तर को 'एक ऐसा देश बताया जो आतंकवाद का समर्थन करता है, उसे वित्तीय मदद देता है और भड़काता है. उनके हाथों से आतंकवाद का दाग़ कोई पैसा साफ़ नहीं कर सकता.'
सत्ता पक्ष के अलावा विपक्ष ने भी नेतन्याहू की आलोचना की.
इसराइल बेइतेनु पार्टी के अध्यक्ष और सांसद अविगडोर लिबरमैन ने एक्स पर लिखा: "अविश्वसनीय है कि नेतन्याहू ने क़तर से माफ़ी मांगी, जिन्होंने आज तक सात अक्तूबर के नरसंहार की निंदा नहीं की."
"जबकि उन्होंने (नेतन्याहू) कभी इसराइल की जनता से माफ़ी नहीं मांगी, इस तथ्य के लिए कि उनके कार्यकाल में हज़ारों इसराइली मारे गए, महिलाओं के साथ बलात्कार हुआ और लोगों को अगवा किया गया."
क्या है पूरा मामला?
9 सितंबर 2025 को इसराइल ने क़तर की राजधानी दोहा में हमास के सीनियर नेताओं को निशाना बनाकर हमला किया था.
तब हमास के एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया था कि वार्ताकारों की उनकी टीम को हमले में निशाना बनाया गया है.
ये टीम दोहा में थी. हालांकि, इस साल जुलाई महीने के बाद से अब तक इस दल की इसराइल से कोई सीधी वार्ता नहीं हुई है.
क़तर के विदेश मंत्रालय ने इस हमले को अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का 'घोर उल्लंघन' बताया था.
वहीं, इसराइल डिफ़ेंस फ़ोर्सेज़ (आईडीएफ़) ने कहा था कि उसने 'सटीक हमले' किए हैं और इसमें उन लोगों को निशाना बनाया गया है, जो सीधे तौर पर सात अक्तूबर 2023 के जनसंहार के लिए ज़िम्मेदार थे.
एक सीनियर इसराइली अधिकारी ने इसराइली मीडिया को ये बताया था कि हमास के जिन सदस्यों को निशाना बनाया गया उनमें ख़लील अल-हैया शामिल थे. वह हमास की ओर से मुख्य वार्ताकार हैं और ग़ज़ा से निर्वासित हैं.
हमले के बाद आईडीएफ़ ने एक्स पर लिखा, "आईडीएफ़ और आईएसए ने आतंकवादी संगठन हमास की सीनियर लीडरशिप को निशाना बनाते हुए सटीक हमले किए. सालों से हमास के ये सदस्य इस आतंकवादी संगठन के संचालन की अगुवाई कर रहे हैं. ये सात अक्तूबर की नृशंस हत्याओं के लिए सीधे तौर पर ज़िम्मेदार हैं और इसराइल के ख़िलाफ़ युद्ध की योजना बनाकर उसे अंजाम दे रहे हैं."
क़तर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता डॉ. माजिद अंसारी ने कहा, "क़तर इस हमले की कड़ी निंदा करता है और वह ये पुष्टि करता है कि इसराइल के इस लापरवाही भरे बर्ताव और लगातार क्षेत्रीय सुरक्षा से उसकी छेड़छाड़ को बर्दाश्त नहीं करेगा."
इस बीच, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया था कि दोहा में इसराइली हमले से पहले ही ट्रंप प्रशासन को इस बारे में सूचना दे दी गई थी.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.