कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेता भारत की विदेश नीति के मामले में अपने रुख़ को लेकर एक-दूसरे से भिड़ गए हैं.
दरअसल, कांग्रेस नेता और पूर्व राजनयिक मणिशंकर अय्यर ने शशि थरूर के नाम एक खुला पत्र लिखकर उन पर कई तरह के आरोप लगाए हैं. गुरुवार को थरूर ने इस पत्र का जवाब दिया है.
कांग्रेस सांसद शशि थरूर, संसद में विदेश मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष भी हैं.
मंगलवार को अय्यर का खुला पत्र अंग्रेज़ी पत्रिका फ़्रंटलाइन में छपा. इसमें उन्होंने मध्य-पूर्व संघर्ष, विदेश मंत्री एस जयशंकर का अमेरिका को लेकर रुख़, नेहरू की विदेश नीति, सबरीमाला मुद्दा, 'ऑपरेशन सिंदूर' और अन्य मुद्दों पर थरूर के रुख़ की आलोचना की.
थरूर ने अब अय्यर के इस पत्र का जवाब दिया है.
उन्होंने कहा, "असहमति होना ग़लत नहीं है. लेकिन सिर्फ़ इसलिए कि कोई विदेश नीति को थोड़ा अलग तरीक़े से देखता है, उसकी नीयत या देशभक्ति पर सवाल उठाना ठीक नहीं है. आपने मेरे विचारों और मेरे चरित्र के बारे में जो सार्वजनिक टिप्पणी की है, उसका जवाब देना ज़रूरी हो गया है."
थरूर ने कहा, "मैंने हमेशा अंतरराष्ट्रीय मामलों को भारत के राष्ट्रीय हित के नज़रिए से देखा है. मेरे लिए भारत की सुरक्षा, भारत की अर्थव्यवस्था और दुनिया में भारत की इज़्ज़त सबसे ऊपर है. दुनिया की राजनीतिक हक़ीकत को समझना और भारत के हितों को ध्यान में रखकर फ़ैसला लेना कोई 'मोरल सरेंडर' नहीं है. यह ज़िम्मेदार स्टेटक्राफ्ट है."
शशि थरूर ने कहा कि इतिहास में पहले भी भारत ने कई बार ऐसा किया है कि किसी देश की ग़लत कार्रवाई को तुरंत सार्वजनिक रूप से नहीं 'ललकारा', क्योंकि भारत के हित उससे जुड़े हुए थे.
उन्होंने कहा, "उदाहरण के लिए, सोवियत यूनियन के साथ हमारे रिश्ते इतने महत्वपूर्ण थे कि हंगरी, चेकोस्लोवाकिया और अफ़ग़ानिस्तान के मामलों में भी भारत ने बहुत संतुलित रुख़ अपनाया."