यूएनआई दफ़्तर सील, दिन में कोर्ट का फ़ैसला आया शाम को पुलिस पहुंच गई

यूएनआई का दफ़्तर सील

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इमेज कैप्शन, शुक्रवार शाम को दिल्ली पुलिस ने समाचार एजेंसी यूएनआई के दफ़्तर को सील कर दिया
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दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार शाम समाचार एजेंसी यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ़ इंडिया (यूएनआई) के 9 रफ़ी मार्ग स्थित कार्यालय को कथित तौर पर भूमि आवंटन की शर्तों के उल्लंघन के आरोप में सील कर दिया.

शुक्रवार को ही दिल्ली हाई कोर्ट ने मीडिया संस्थानों के लिए संयुक्त कार्यालय परिसर विकसित करने के लिए यूएनआई को दी गई सरकारी ज़मीन का आवंटन रद्द करने के भूमि और विकास कार्यालय के फ़ैसले को बरकरार रखा था और शाम को ही कुछ वकील और दिल्ली पुलिस भारी दलबल के साथ परिसर पहुंच गई.

सोशल मीडिया पर कई वीडियो आए हैं, जिनमें यूएनआई परिसर में बड़ी तादाद में पुलिसकर्मी दिखाई दे रहे हैं और पत्रकारों-कर्मचारियों से दफ़्तर खाली करने को कह रहे हैं.

यूएनआई ने आरोप लगाया है कि उसके कर्मचारियों से ज़बरन दफ़्तर खाली कराया गया और कई लोगों को अपने निजी सामान तक ले जाने से रोका गया. यह भी आरोप लगाया गया है कि इस दौरान कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार भी किया गया.

नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा कि दफ़्तर खाली कराने में क़ानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया और कुछ भी ग़लत नहीं हुआ, क्योंकि पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की गई थी.

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यूएनआई ने एक्स पर लिखा, "देश की सबसे पुरानी और सबसे सम्मानित समाचार एजेंसियों में से एक, 'यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ़ इंडिया' के दफ़्तर को सील करने से प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर गंभीर चिंताएँ खड़ी हो गई हैं."

यूएनआई ने अपनी पोस्ट में एक वीडियो भी शेयर किया है, जिसमें उसके दफ़्तर में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी नज़र आ रहे हैं और कर्मचारी आरोप लगा रहे हैं कि उनके साथ धक्का-मुक्की हो रही है.

कर्मचारियों ने क्या बताया?

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यूएनआई के एक वरिष्ठ कर्मचारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कहा, "शाम को केंद्र सरकार के संपत्ति विभाग के कुछ कर्मचारी आए और उन्होंने कहा कि आपकी लीज़ ख़त्म हो गई है और आप फ़ौरन जगह खाली कर दें. वो हमारे न्यूज़ रूम में घुस गए… और ज़बरन लोगों को खींचकर बाहर निकाल दिया."

यूएनआई में काम करने वाले वरिष्ठ पत्रकार मनोहर सिंह ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "शाम को कुछ वकील और अधिकारी बड़ी संख्या में दिल्ली पुलिस और अन्य बलों के साथ यूएनआई के दफ़्तर पहुंचे. शाम 6 से 6.30 बजे के बीच प्रशासनिक कार्यालय बंद हो चुका था, ये सभी लोग सीधे न्यूज़ रूम में घुस गए जहां उर्दू और हिंदी सर्विस है. रोज़ा इफ़्तार का समय था तो उर्दू सर्विस के कुछ लोग बाहर गए थे."

"अधिकारियों ने आते ही कहा कि आप अपने कंप्यूटर तुरंत बंद कीजिए क्योंकि आपका लीज़ कैंसिल हो गया है और आपको तुरंत बाहर निकलना चाहिए, पांच मिनट, दस मिनट, सात मिनट...इस तरह वो काउंट डाउन करने लगे. उन्होंने मोबाइल पर पढ़कर आदेश सुनाया कहा कि आपको यह कार्यालय तुरंत खाली करना पड़ेगा क्योंकि इसे सील करवाना है. हमें ज़बरदस्ती धकेला गया, महिलाओं कर्मचारियों को खींचा गया. पत्रकारिता के लिए यह बहुत दुखद दिन है."

मनोहर सिंह कहते हैं, "यह 60 साल पुरानी न्यूज़ एजेंसी है. इस तरह से किसी समाचार संगठन को बंद करने की शायद यह पहली घटना है. उर्दू, हिंदी और अंग्रेज़ी सेवाओं में सैकड़ों कर्मचारी करते हैं और हमारे सैकड़ों सब्सक्राइबर हैं जिनके लिए इस एजेंसी की सेवाएं अचानक बंद हो गईं. उसका असर यूएनआई के अस्तित्व पर पड़ेगा और ऐसा हुआ तो उसके कर्मचारियों के परिवारों पर भी असर पड़ेगा. कर्मचारियों की तनख्वाहें रुक जाएंगी, नौकरी चली जाएगी और वो सड़क पर आ जाएंगे."

यूएनआई में काम करने वाली एक महिला कर्मचारी आरती बाली ने एएनआई को बताया, "भारी पुलिस बल तैनात किया गया था. हमें ज़बरदस्ती यहां निकाला गया और धक्का-मुक्की की गई. जिस तरह से उन्होंने हमारे साथ बर्ताव किया वो वाक़ई दहला देने वाला था. हमें न तो कोर्ट का न तो आदेश दिखाया गया, बस कहा गया कि आपको ऑफ़िस खाली करना होगा."

कर्मचारियों को बाहर निकालने के बाद गेट सील कर उसके बाहर एक नोटिस चिपकाया गया है.

इसमें लिखा है, "आवास एवं शहरी मामलों का मंत्रालय, लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफ़िस- 20 मार्च 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश का पालन करते हुए भारत सरकार 9 रफ़ी मार्ग, नई दिल्ली के परिसर को 20 मार्च 2026 से अपने कब्ज़े में ले रहा है. लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफ़िस की बिना इजाज़त के इस परिसर में किसी भी व्यक्ति का किसी तरह का प्रवेश, कब्ज़ा या इसका इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित है और इसके उल्लंघन पर क़ानून के तहत कार्रवाई होगी."

क्या है मामला

यूएनआई के गेट पर लगा नोटिस

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दिल्ली हाई कोर्ट ने 20 मार्च को लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस के उस फ़ैसले को सही ठहराया है, जिसके तहत यूएनआई को 9, रफ़ी मार्ग पर स्थित सरकारी ज़मीन का आवंटन रद्द कर दिया गया था.

दिल्ली हाई कोर्ट ने 20 मार्च के अपने फ़ैसले में स्पष्ट रूप से निर्देश दिया कि संबंधित अधिकारी तत्काल प्रभाव से विवादित संपत्ति का कब्ज़ा ले लें और यह सुनिश्चित करें कि उसका उपयोग कानून के अनुसार ही किया जाए.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, यूएनआई पिछले 40 सालों में कई बार याद दिलाने के बावजूद कार्यालय का निर्माण नहीं कर सका, जो आवंटन पत्र में तय शर्तों का उल्लंघन है. आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के तहत आने वाले लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफ़िस ने 12 जनवरी 2023 को कारण बताओ नोटिस जारी करने के बाद 29 मार्च 2023 को आवंटन रद्द कर दिया था.

न्यूज़ एजेंसी ने इस रद्दीकरण को अदालत में चुनौती दी थी, लेकिन हाई कोर्ट ने वित्तीय कमी और लंबित मंजूरियों को देरी का कारण बताने वाले उसके तर्कों को ख़ारिज कर दिया. इसके बाद अधिकारियों के लिए परिसर का कब्जा लेने का रास्ता साफ़ हो गया.

अदालत ने कहा कि कई बार समय बढ़ाने के बावजूद यूएनआई ने न तो योजनाओं को अंतिम रूप दिया, ना ही सह-आवंटियों के साथ समझौते किए और न ही विकास कार्य शुरू किया. अदालत ने यह भी कहा कि यूएनआई ने वित्तीय अक्षमता और इरादे की कमी स्वीकार की है. अदालत ने माना कि चार दशकों से अधिक समय तक भवन का निर्माण न करना आवंटन की शर्तों का गंभीर उल्लंघन है.

पीटीआई ने अधिकारियों के हवाले से कहा कि 9 रफ़ी मार्ग पर लगभग 5,289.52 वर्ग मीटर ज़मीन की अनुमानित क़ीमत मौजूदा दर 7.74 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से करीब 409 करोड़ रुपये आंकी गई है.

यूएनआई ने क्या कहा?

यूएनआई के मौजूदा मालिक स्टेट्समैन ने पुलिसिया कार्रवाई की निंदा की है

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यूएनआई ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि पुलिस की इस कार्रवाई से प्रेस की आज़ादी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं. एक्स पर साझा किए गए एक वीडियो में एक महिला पत्रकार के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की होती दिख रही है, जिससे वह संतुलन खोकर गिर जाती है.

यूएनआई के मौजूदा मालिक स्टेट्समैन ने एक्स पर पोस्ट कर इस कार्रवाई की निंदा की.

द स्टेट्समैन ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "भारत में मीडिया की आज़ादी पर एक अभूतपूर्व अत्याचार और हमले के तौर पर देश की सबसे पुरानी समाचार एजेंसी यूएनआई के रफ़ी मार्ग स्थित दफ़्तर पर पुलिस बल ने सचमुच हमला बोल दिया."

स्टेट्समैन ने कहा कि 'कर्मचारियों को अपना सामान लेने या प्रबंधन से बात करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया. स्टेट्समैन ने इस घटना को "अभूतपूर्व अत्याचार और भारत में मीडिया स्वतंत्रता पर हमला" बताया और कहा कि रफ़ी मार्ग कार्यालय पर पुलिस की कार्रवाई किसी जबरन आतंकवाद-रोधी ऑपरेशन जैसी लग रही थी.'

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के सांसद पी. संदोश कुमार ने यूएनआई कार्यालय सील किए जाने की निंदा की और इसे 'प्रेस की आज़ादी पर हमला' बताया.

संदोश कुमार ने एक चिट्ठी लिखी है जिसे यूएनआई ने अपने एक्स हैंडल पर साझा किया है.

इसमें उन्होंने लिखा, "देश की सबसे पुरानी समाचार एजेंसी यूएनआई के रफ़ी मार्ग कार्यालय पर दिल्ली पुलिस का जबरन कब्ज़ा प्रेस की आज़ादी पर गंभीर और अभूतपूर्व हमला है."

उन्होंने आरोप लगाया, "पत्रकारों को घसीटा गया और उनके साथ धक्का-मुक्की की गई. महिला पत्रकारों को भी नहीं बख़्शा गया. कर्मचारियों को अपना सामान लेने या प्रबंधन से बात करने का बुनियादी मौका भी नहीं दिया गया. पूरी कार्रवाई क़ानून, गरिमा और लोकतांत्रिक मानकों की अनदेखी करते हुए की गई."

उधर, नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा कि दफ़्तर खाली कराने में कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया और कुछ भी ग़लत नहीं हुआ, क्योंकि पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की गई थी.

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