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चीन की पुलिस बनकर विदेश में रहने वाले चीनी नागरिकों को लूटने वाला गिरोह
- Author, इलेन चोंग और एड मेन
- पदनाम, बीबीसी ट्रेंडिंग
पूरी दुनिया में चीन के नागरिकों के साथ एक व्यापक फ़र्ज़ीवाड़ा किया जा रहा जिसमें अपराधी ख़ुद को चीनी पुलिस बताकर अवैध वसूली को अंजाम देते हैं.
चीनी मूल की एक ब्रिटिश महिला ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने अपनी पूरी कमाई को उन जालसाज़ों को सौंप दिया जो वीडियो कॉल्स में वर्दी पहने थे और एक फ़र्ज़ी पुलिस स्टेशन में ख़ुद को दिखा रहे थे.
हेलेन यंग एक पखवाड़े पहले के सदमे से अभी भी नहीं उबर पाई हैं. फ़र्ज़ी पुलिस ने उन्हें ये भरोसा करने पर मजबूर किया था कि उनका नाम चीन की मोस्ट वांटेड लिस्ट में है.
इन जालसाज़ों ने चीन की पुलिस बनकर लंदन की इस अकाउंटेंट को ये विश्वास दिलाया कि चीन में हुए एक बड़े फ़्रॉड में उनकी भूमिका की जांच हो रही है.
हेलेन को ऐसे ढेरों मनगढ़ंत सबूत दिखाए गए जो उन्हें एक ऐसे अपराध में फंसाने वाले प्रतीत हुए जिसके बारे में उन्हें पता तक नहीं था.
जब फ़ेक पुलिस ने उन्हें प्रत्यर्पण और चीन की जेल में डालने की धमकी दी तो हेलेन ने उन्हें ज़मानत राशि के नाम पर ज़िंदगी भर की कमाई 29,000 पाउंड भेज दिए.
वो कहती हैं, "अब मैं ख़ुद को ठगा महसूस कर रही हूं. लेकिन ये सब इतना सच लगा कि इसकी जांच का कोई मौक़ा ही नहीं मिला."
हेलेन की कहानी अजूबा लग सकती है लेकिन विदेशों में रहने वाले चीनी नागरिकों के साथ ऐसी बहुत सी घटनाएं घट चुकी हैं.
पूरी दुनिया में चीनी दूतावासों और अमेरिका में कई मामले सामने आने के बाद एफ़बीआई ने भी चेतावनी जारी की है.
लॉस एंजेलिस में रहने वाली एक बुज़ुर्ग महिला ने तो प्रत्यर्पण के डर से 30 लाख डॉलर दे दिए.
कैसे बनाते हैं निशाना
आमतौर पर निशाना बनाए जाने वाले को आम फ़ोन कॉल्स आने लगते हैं. हेलेन के मामले में ख़ुद को चीनी कस्टम अफ़सर बताने वाले ने कॉल किया, जिसने बताया कि उनके नाम से आए एक ग़ैर-क़ानूनी पार्सल को रोक दिया गया है. जबकि हेलेन ने कुछ नहीं भेजा था.
फिर उनसे कहा गया कि अगर उन्हें फ़्रॉड की आशंका है तो पुलिस शिकायत करनी चाहिए. आशंकित हेलेन ने फ़ोन नहीं काटा.
वो कहती हैं, "चीन में पले-बढ़े हमारे जैसे चीनी नागरिकों को आज्ञाकारिता सिखाई गई थी. इसलिए अगर कोई कुछ कहता है तो मैं उसे ना नहीं कहूंगी."
हेलेन ने, शेनझेन में ख़ुद को 'ऑफ़िसर फ़ैंग' बताने वाले एक पुलिसकर्मी को पैसे ट्रांसफ़र कर दिए.
जब हेलेन ने प्रूफ़ मांगा तो फ़ेक पुलिसकर्मी ने वीडियो कॉल किया जिसमें वो वर्दी पहने था और उसकी आईडी भी उसके चेहरे से मैच कर रही थी.
यही नहीं ऑफ़िसर फ़ैंग ने अपने फ़ोन से पुलिस स्टेशन जैसी लगने वाली जगह को दिखाया, जहां कई और वर्दी वाले लोग थे और एक मेज़ थी जिस पर पुलिस का बड़ा सा लोगो लगा था.
हेलेन बताती हैं, "उसी पल मेरी शंका दूर हो गई और मैंने उनसे माफ़ी मांगी."
अभी बात चल ही रही थी कि हेलेन को एक अफ़सर का संदेश सुनाई दिया जो हेलेन के बारे में कुछ बात करना चाह रहा था.
ऑफ़िसर फ़ैंग ने कॉल होल्ड कर दिया और जब लौटा तो अब उसे ग़ैर-क़ानूनी पार्सल में दिलचस्पी नहीं थी. उसने बताया कि उसे सूचना मिली है कि हेलेन एक संदिग्ध बड़े वित्तीय फ़र्ज़ीवाड़े में शामिल हैं.
"मैंने कहा ये बकवास है. उसने कहा- कोई नहीं कह रहा है कि वो दोषी हैं. लेकिन सबूत मायने रखता है."
हेलेन को एक बैंक स्टेटमेंट जैसा दस्तावेज़ दिखाया गया जिसमें उनके नाम पर बहुत बड़ी राशि थी.
फ़ेक पुलिस अफ़सर ने यहां तक कहा कि अगर वो ख़ुद को निर्दोष मानती हैं तो उन्हें असली अपराधियों को पकड़ने में मदद करनी चाहिए.
अपराध में फंसने का डर
उनसे एक ऐसा गोपनीय समझौता करने पर मजबूर किया गया कि जिसमें कहा गया था कि जांच चलने तक वो इस बारे में किसी को नहीं बताएंगी वरना जेल में छह महीने की अतिरिक्त सज़ा भुगतनी पड़ेगी.
"उसने कहा अगर आपने किसी और को बताया कि चीनी पुलिस पूछताछ कर रही है, तो आपकी ज़िंदगी और ख़तरे में पड़ जाएगी."
धोखाधड़ी करने वालों ने हेलेन को एक ऐसा ऐप डाउनलोड कराया जिससे वो दिन-रात उनकी गतिविधियों पर निगरानी रख सकें.
अगले कुछ दिनों तक हेलेन ने अपना बयान तैयार करने में लगाया, जैसा कहा गया था. उन्हें अपनी ज़िंदगी के हर पहलू के बारे में लिखना था.
इसके बाद ऑफ़िसर फ़ैंग का फ़ोन आया और उसने बताया कि कई संदिग्ध पकड़े गए हैं. उसने कई लोगों के लिखित बयान भी दिखाए जिसमें हेलेन को दोषी ठहराया गया था.
हेलेन को एक वीडियो भी भेजा गया जिसमें एक पुरुष कैदी पुलिस के सामने ये स्वीकार करते दिखा कि फ़्रॉड में वही उसकी बॉस हैं.
चूंकि वीडियो में संदिग्ध के चेहरे पर कोविड मास्क था इसलिए ये पता करना मुश्किल है कि जो कहा गया, उसी ने कहा है. ये एडिटेड वीडियो भी हो सकता है.
लेकिन जब हेलेन को भरोसा हो गया कि उनका साबका असली पुलिस से हुआ है तो उनके होश उड़ गए.
वो कहती हैं, "जब मैंने एक फ़्रॉड में अपना नाम सुना तो घबरा गई. लगा कि मैं किसी भारी परेशानी में फंस गई हूं."
जब ऑफ़िसर फ़ैंग ने उनसे कहा कि उन्हें ब्रिटिश नागरिक होने के बावजूद प्रत्यर्पित किया जाएगा, हेलेन को भरोसा हो गया.
"उसने कहा- तो सामान बांधने के लिए आपके पास 24 घंटे हैं. पुलिस आपको एयरपोर्ट ले जाने के लिए चल चुकी है."
प्रत्यर्पण से बचने के लिए पैसे की डिमांड
हेलेन को बताया गया कि अगर वो ज़मानत ले सकें तो प्रत्यर्पण रोका जा सकता है. उनके बैंक अकाउंट की जांच के बाद उनसे 29,000 पाउंड भेजने को कहा गया.
हेलेन ने यह राशि अपनी बेटी के फ़्लैट के लिए जोड़े थे.
लेकिन यह दुःस्वप्न यहीं नहीं ख़त्म हुआ. फ़ेक पुलिस का दोबारा कॉल आया और इस बार उनसे प्रत्यर्पण के बदले 2.5 लाख पाउंड भेजने को कहा गया
"मैं ज़िंदगी की लड़ाई लड़ रही थी. अगर मैं चीन जाती हूं तो मैं फिर वापस नहीं लौट सकती हूं."
जब हेलेन ने अपने एक दोस्त से उधार मांगा तो उसने उनकी बेटी को चेताया. हेलेन दबाव नहीं झेल सकीं और सबकुछ बता दिया.
ये बताने से पहले उन्होंने अपना फ़ोन किचन के ड्रॉअर में रखा और बेटी के बेडरूम में फुसफुसाते हुए बातें बताईं, ताकि घोटालेबाज़ सुन न सकें.
बेटी ने उन्हें बताया कि यह एक फ़्रॉड था. हेलेन के बैंक ने आख़िरकार उनका पैसा लौटा दिया लेकिन उनकी परेशानी का अंत और भयंकर हो सकता था.
वो कहती हैं, "दो हफ़्ते से मैं मुश्किल से सो पाई हूं. कोई आपके फ़ोन की निगरानी कर रहा हो तो आपको नींद कैसे आ सकती है."
ऐसे हालात में उनकी कार से दो बार दुर्घटना हुई. दूसरी बार काफ़ी नुकसान हुआ.
"कोई मरा नहीं, लेकिन मर भी सकता था. इस तरह के आपराधिक फ़र्ज़ीवाड़े लोगों को मार सकते हैं."
फ़ेक पुलिसवालों के ऐसे फ़र्ज़ीवाड़ों के अन्य पीड़ितों को तो और भी बुरे दिन देखने पड़े.
साइबर किडनैपिंग का जाल
कुछ मामलों में तो उन चीनी छात्रों को निशाना बनाया गया जिनकी वित्तीय हालत ख़राब थी. उनसे अपने ही फ़र्ज़ी अपहरण की कहानी बनाने को मजबूर किया गया ताकि उनके परिजनों से पैसे ऐंठे जा सकें.
ऑस्ट्रेलिया में ऐसे कई मामले सामने आने के बाद न्यू साउथ वेल्स पुलिस के डिटेक्टिव सुप्रीटेंडेंट जो डूही ने झूठे अपरहण को लेकर जागरूकता अभियान चलाया.
वो कहते हैं, "पीड़ितों को अपने अपहरण का खुद वीडियो बनाने के लिए मज़बूर किया जाता है. जिसमें वे बंधे हुए और शरीर पर टोमैटो सॉस लगे दिखते हैं जिससे लगे कि खून बह रहा है."
इसके बाद छात्रों को एकांत में रहने का आदेश दिया जाता है और ठग ये तस्वीरें उनके परिवार को भेज कर फिरौती की मांग करते हैं.
इन छात्रों को दूसरे फ़र्ज़ीवाड़े में मदद को भी मजबूर किया जाता है.
जो डूही कहते हैं, "ठग पीड़ितों को विश्वास दिलाते हैं कि वो चीनी सरकार के लिए काम कर रहे हैं. उन्हें दस्तावेज़ भेजे जाते हैं और चीनी पुलिस अफ़सर के रूप में उनकी भर्ती का नाटक रचा जाता है."
वो कहते हैं कि जिन पीड़ितों ने पैसा दे दिया, उनको ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले दूसरे चीनी छात्रों की निगरानी या धमकाने के लिए भेजा जाता है.
माना जाता है कि अधिकांश फ़्रॉड म्यांमार, कंबोडिया या लाओस जैसे देशों में संगठित चीनी आपराधिक गैंग की ओर से अंजाम दिया जाता है.
चीन की सरकारी मीडिया ने ख़बर छापी है कि पिछले साल दसियों हज़ार संदिग्ध चीन लौटे हैं.
लेकिन लोगों में जागरूकता भी आ रही है.
जापान में रहने वाले एक छात्र से हमने बात की. उसे जब लगा कि यह फ़्रॉड है, उसने पूरी बातचीत रिकॉर्ड कर ली.
नाम न ज़ाहिर करते हुए उसने बीबीसी से वो रिकॉर्डिंग साझा की.
ठगों ने कहा कि अगर किसी को इस बारे में बताया तो जांच में बाधा पहुंचेगी. उसने पैसे देने से इनकार कर दिया और उसके पास कॉल्स आने बंद हो गए.
उसने कहा, "मैंने कभी नहीं सोचा था कि ये मेरे साथ होगा. अनजान नंबर से आने वाले कॉल्स के प्रति बहुत सतर्क रहें."
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