चेन मामले में अमरीका-चीन के बीच सौदेबाजी के मायने

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चीन के असंतुष्ट कार्यकर्ता चेन ग्वांगचेंग के मामले ने चीन और अमरीका दोनों के सामने एक संकट खड़ा कर दिया है.
चीनी सरकार के लिए इस मामले ने अभिजात्य समूह में शक्ति संघर्ष को तेज कर दिया है जिसे पूर्व चोंगिंग नेता बो शिलाई ने हवा दी थी.
इसके अलावा, अमरीकी दूतावास से संरक्षण की चेन की माँग ने इस मामले में अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान चीन में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघन के बारे में एक बार फिर आकर्षित किया है.
इन सबकी वजह से चीन के राजनीतिक तंत्र की वैधानिकता पर भी सवाल खड़े होते हैं.
वैसे चीन के लिए न सिर्फ अपना चेहरा बचाने के लिए मामले के तात्कालिक हल की जरूरत है बल्कि कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार के खिलाफ बन रहे माहौल के लिए भी बहुत जरूरी है.
संकट
वहीं, इस मामले ने अमरीकी सरकार के सामने भी एक बड़ा संकट खड़ा किया है.
अमरीकी सरकार ने चीन से बेहतर रिश्ते बनाने की कोशिश की है.

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दोनों के बीच ऐसे तमाम मुद्दों पर बातचीत होती रहती है जो कि वैश्विक शांति और विकास के लिए जरूरी हैं. इनमें प्योंगयांग के परमाणु हथियार कार्यक्रम से लेकर वैश्विक आर्थिक स्थिरता तक शामिल हैं.
चेन अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन और चीनी उपराष्ट्रपति वांग किशान के बीच सामरिक और आर्थिक मुद्दों पर होने वाली बातचीत से कुछ ही देर पहले बीजिंग स्थित अमरीकी दूतावास में शरण लेने पहुंचे थे.
लेकिन चेन की वजह से न तो अमरीका और न ही चीन इस बातचीत को दरकिनार कर सकते थे. क्योंकि बातचीत ऐसे समय में हो रही थी जबकि अमरीका में आने वाले दिनों में राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं.
इसलिए इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि इस मामले में अमरीका और चीन दोनों की स्थिति समान है. इसलिए दोनों ही इसका कोई तुरंत समाधान चाहते हैं ताकि दोनों के बीच तनाव से चेन बाहर हो सकें.
विभाजित नेतृत्व
दरअसल, अमरीका के सहायक मंत्री कर्ट कैंपबेल के नेतृत्व में एक अमरीकी टीम चीन की टीम से बातचीत के लिए तत्काल बीजिंग गई. चीनी टीम का नेतृत्व विदेश उप मंत्री कुई तियानकाई ने किया.
इससे साबित होता है कि दोनों देश इस मामले को सुलझाने के लिए कितने गंभीर हैं.
यह भी कहा जा रहा है कि दोनों के बीच पर्दे के पीछे कोई समझौता हुआ है.
चेन ने अमरीकी दूतावास को छोडने का फैसल स्वेच्छा से किया था, इस वादे के साथ कि वो अपने परिवार के साथ रहेंगे और उनकी सुरक्षा की गारंटी दी जाए.
जैसे ही चेन अस्पताल से बाहर आए, तुरंत अपनी पत्नी और बच्चे से मिले.
लेकिन इस मामले में चीनी नेता साफतौर पर उनके बचाव में नहीं आए हैं.
चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ और उनके सहयोगियों ने डील को खत्म करने की कोशिश की थी लेकिन दूसरे नेताओं की प्राथमिकता है कि चेन और उनके दोस्त अभी चुपचाप रहें.
समझौता
चेन को अस्पताल में पहुंचाने के बाद ही उन्हें और उनके परिवार को पूरी दुनिया से अलग कर दिया गया था.
तमाम तरह के दबाव के बाद आखिरकार चेन ने अपना मन बदला और पढ़ाई के लिए अमरीका जाने को तैयार हो गए.
अब चीनी अधिकारी भी कह रहे हैं कि चेन इसके लिए अमरीका जा सकते हैं.
यानी सुलह का एक रास्ता तैयार होता दिख रहा है.
इस मामले में कहा जा सकता है कि चीन में लोकतंत्र की ओर कदम बढ़ाने में चेन ग्वानचेंग का मुद्दा दूरगामी प्रभाव डालने वाला हो सकता है.
































