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मैं मनोरोगी के साथ रहा हूं, दर्द जानता हूं: शशि थरूर
आत्महत्या को अपराध के दायरे से बाहर करने और इसे लेकर बेहतर मानसिक उपचार मुहैया कराने वाले बिल पर शुक्रवार को संसद में बहस हुई. इस बहस में कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि वह मानसिक रूप से बीमार एक पीड़ित के साथ रहे हैं और उन्हें पता है कि वह शख़्स किस तरह की पीड़ा का सामना करता है.
शशि थरूर ने कहा कि आत्महत्या की प्रवृत्ति एक तरह की मानसिक बीमारी है. उन्होंने कहा, ''माननीय अध्यक्ष महोदय मैं अपने निजी अनुभव से बता सकता हूं कि यह काफी दुखद है. ऐसी मानसिक बीमारी मेरे एक करीबी और प्यार करने वाली को थी. मैं एक मानसिक रूप से बीमार के साथ रह चुका हूं....ऐसे लोग अक्सर इनकार करते हैं. वे इस बात को स्वीकार नहीं करते कि उन्हें मानसिक बीमारी है.''
शशि थरूर ने कहा कि मानसिक बीमारी बहुत जटिल स्थिति होती है. उन्होंने कहा, ''कई लोग मन से टूटे हुए होते हैं. इसका पता लगाना काफ़ी कठिन है. कई बार तो ऐसा लगता है कि इन्हें कोई समस्या ही नहीं है. वे बिल्कुल स्वस्थ दिखते हैं. वे ख़ुश भी दिखते हैं. वे आंतरिक पीड़ाओं से व्यथित रहते हैं फिर भी सभी सामाजिक गतिविधियों में शामिल होते हैं.''
थरूर ने इस मामले में लोगों से मानसिकता बदलने की अपील की. उन्होंने कहा कि जिन लोगों को मानसिक बीमारी की स्थिति में मदद चाहिए होती है तो बताने से डरते हैं क्योंकि इसे कलंक के रूप में देखा जाता है. थरूर ने सरकार से इससे निपटने के लिए आगे आने को कहा.
कांग्रेस सांसद ने सरकार को सलाह दी कि इससे निपटने के लिए किसी बॉलीवुड अभिनेता की बात करनी चाहिए जो मानसिक बीमारी से पीड़ित था और उसे मदद की ज़रूरत थी. उन्होंने कहा कि समाज में इस बात का अहसास होना चाहिए कि यह बीमारी भी अन्य बीमारियों की तरह ही है.
शशि थरूर ने केंद्रीय स्वास्थ मंत्री जेपी नड्डा को बधाई दी कि वह आत्महत्या को अपराध के दायरे से मुक्त करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि देश में हर घंटे 60 आत्महत्याएं होती हैं. थरूर ने इन आत्महत्याओं को सामूहिक विफलता करार दिया.
कांग्रेस सांसद ने इस मामले में पुलिस को संवेदनशील बनाने की बात कही. उन्होंने कहा कि जो आत्महत्या की स्थिति में जिंदा है उसके ख़िलाफ़ पुलिसिया कार्रवाई की ज़रूरत नहीं है. थरूर ने कहा कि ख़ुदकुशी की कोशिश मदद की गुहार है न कि ज़ुर्म.
इससे पहले बिल को पेश करते हुए स्वास्थ मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि इस विधेयक से मरीज़ों का मानसिक इलाज कराने में मदद मिलेगी. नड्डा ने कहा कि इससे उन पुरुषों और महिलाओं को अधिकार मिलेगा जो इलाज से इनकार नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि इसका मुख्य ध्यान मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाना है.
पिछले साल अगस्त में 134 संशोधनों के साथ मेंटल हेल्थकेयर बिल राज्यसभा में पास किया जा चुका है. नड्डा ने कहा कि कई विशेषज्ञों से सलाह के बाद इस बिल को लोकसभा में पेश किया गया है. स्वास्थ मंत्री ने कहा कि जो शख़्स ख़ुदकुशी की कोशिश कर रहा है उसे मानसिक बीमारी के तौर पर देखा जाएगा और उसे आईपीसी की धारा के तहत दंडित नहीं किया जाएगा.
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