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ट्रंप का दावा- खार्ग द्वीप पर सैन्य ठिकाने तबाह, क्यों कहा जाता है इसे ईरान की लाइफ़लाइन?
- Author, फरज़ाद सैफ़ीकरन
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- पढ़ने का समय: 8 मिनट
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है, "कुछ ही देर पहले मेरे आदेश पर अमेरिकी सेंट्रल कमान ने मध्य पूर्व के इतिहास के सबसे शक्तिशाली हवाई हमलों में से एक को अंज़ाम दिया और खार्ग द्वीप पर मौजूद सभी सैन्य ठिकानों को पूरी तरह नष्ट कर दिया है. खार्ग द्वीप को ईरान की सबसे महत्वपूर्ण संपत्तियों में से एक माना जाता है."
अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर यह मैसेज पोस्ट करते हुए ट्रंप ने लिखा कि फिलहाल "मानवीय और नैतिक कारणों से मैंने इस द्वीप के तेल ढांचे को निशाना नहीं बनाने का फ़ैसला किया है."
अमेरिका-इसराइल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद पूरे मध्य पूर्व में तेल रिफ़ाइनरियां और तेल भंडार टैंक हमलों का निशाना बन गए हैं.
इसराइली सेना अब तक तेहरान में रेय, शहरान और अकदसियेह के तेल डिपो और करज शहर के फरदिस क्षेत्र पर हमला कर चुकी है. इसराइली सेना का कहना है कि इन हमलों का लक्ष्य वे ईंधन टैंक थे जिन्हें ईरानी सरकार "सैन्य डिपो बनाने के लिए इस्तेमाल कर रही थी."
इस बीच, ईरान भी जवाबी कार्रवाई में पीछे नहीं रहा है और उसने फारस की खाड़ी के कई देशों में रिफ़ाइनरियों और तेल डिपो पर हमले किए हैं.
अब खार्ग द्वीप पर हमले के बाद यह अटकलें तेज हो गई हैं कि अमेरिका इस द्वीप पर कब्जा कर सकता है.
खार्ग द्वीप ईरान के सबसे बड़े तेल भंडार का केंद्र है और ईरान के लगभग 90 प्रतिशत कच्चे तेल का निर्यात इसी छोटे द्वीप से होता है.
खार्ग द्वीप क्यों चर्चा में
बीते साल जून में हुए 12 दिन के युद्ध से पहले भी खार्ग द्वीप का नाम इसराइल के संभावित लक्ष्यों में लिया गया था.
इस बार खार्ग द्वीप पर ध्यान तब और बढ़ गया जब इसराइल के पूर्व प्रधानमंत्री और देश के प्रमुख विपक्षी नेता यायर लैपिड ने तेहरान और करज के तेल डिपो पर हमले के एक दिन बाद सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "इसराइल को खार्ग द्वीप पर मौजूद ईरान के सभी तेल क्षेत्रों और एनर्जी इंडस्ट्री को नष्ट कर देना चाहिए. यह ऐसा कदम होगा जो ईरान की अर्थव्यवस्था को तबाह कर देगा और सरकार को गिरा देगा."
इसराइल द्वारा ईरानी तेल डिपो पर हमलों के जवाब में रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने इसराइल से "अपने लक्ष्यों का सावधानी से चुनाव करने" का आग्रह किया.
उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "हमारा लक्ष्य ईरानी जनता को आज़ाद कराना है, इस तरह कि इस शासन के पतन के बाद उन्हें एक नया और बेहतर जीवन शुरू करने का अवसर मिले. इस लक्ष्य को हासिल करने में ईरान की तेल अर्थव्यवस्था अहम होगी."
समाचार वेबसाइट एक्सियोस ने 7 मार्च को अमेरिकी सरकारी अधिकारियों के हवाले से बताया था कि खार्ग द्वीप पर कब्ज़ा करने की संभावना पर भी चर्चा हुई है.
पेंटागन के पूर्व वरिष्ठ सलाहकार माइकल रुबिन ने पिछले सप्ताह पॉलिटिको से कहा कि उन्होंने ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों से खार्ग द्वीप के महत्व और उस पर कब्ज़ा करने के मुद्दे पर बात की है.
उनका मानना है कि "अगर ट्रंप मिसाइल हमलों और बमबारी से आगे बढ़कर ईरान पर दबाव बढ़ाना चाहते हैं, तो खार्ग द्वीप पर कब्ज़ा करना ईरानी शासन को उसके एक महत्वपूर्ण वित्तीय स्रोत से वंचित कर सकता है."
खार्ग द्वीप और तेल ठिकाने
खार्ग एक कोरल द्वीप है जिसका क्षेत्रफल केवल लगभग 20 वर्ग किलोमीटर है. यह ईरान के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है और देश के प्रशासनिक विभाजन में बुशेहर प्रांत का हिस्सा है.
यहाँ स्थित ऑयल फैसिलिटीज़ के पास हिरण घूमते हुए देखे जा सकते हैं. यह द्वीप हिरणों के रहने और प्रजनन के लिए अनुकूल माना जाता है. कई वर्ष पहले हिरणों को यहाँ लाया गया था और हाल की रिपोर्टों के अनुसार अब उनकी संख्या द्वीप की क्षमता से भी अधिक हो गई है.
छोटा होने के बावजूद खार्ग द्वीप ईरान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, खासकर तेल निर्यात के संदर्भ में. खार्ग ईरान के तेल निर्यात का मुख्य टर्मिनल है.
देश के दक्षिणी तेल-समृद्ध क्षेत्रों के करीब होने, समुद्री स्थिति अच्छी होने और बड़े तेल टैंकरों के लिए पर्याप्त गहराई होने के कारण खार्ग को कच्चे तेल के निर्यात और लोडिंग के लिए सबसे उपयुक्त स्थान माना जाता है.
खार्ग द्वीप को ईरान के तेल क्षेत्रों का केंद्र माना जा सकता है. इसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह कच्चे तेल के भंडारण और निर्यात का प्रमुख स्थान है.
खार्ग से लगभग 75 किलोमीटर पश्चिम में ईरान का सबसे बड़ा ऑफ़शोर तेल परिसर अबूज़र स्थित है. फारस की खाड़ी में ईरान के अधिकांश तेल उत्पादन का स्रोत यही क्षेत्र है.
अबूज़र तेल क्षेत्र में तीन मुख्य उत्पादन प्लेटफॉर्म हैं और प्रत्येक की उत्पादन क्षमता प्रतिदिन 80,000 बैरल है. अबूज़र ऑयल रिफाइनरी भी खार्ग द्वीप पर ही स्थित है.
इसी वजह से ईरान के सबसे बड़े तेल भंडारण केंद्रों में से एक खार्ग द्वीप पर मौजूद है.
ईरानी ऑयल टर्मिनल्स कंपनी के अनुसार खार्ग में 40 से अधिक कच्चे तेल के भंडारण टैंक हैं जिनकी कुल क्षमता दो करोड़ बैरल से अधिक है.
देश के दक्षिणी तेल क्षेत्रों से निकाला गया कच्चा तेल समुद्र के नीचे बिछी पाइपलाइनों के जरिए इन टैंकों तक पहुंचाया जाता है.
दिसंबर 2023 में ईरान ऑयल टर्मिनल्स कंपनी के सीईओ अब्बास ग़रिबी ने खार्ग द्वीप पर कच्चे तेल के भंडारण की क्षमता में 20 लाख बैरल की बढ़ोतरी की घोषणा की थी.
खार्ग द्वीप पर कच्चे तेल का भंडारण ही नहीं होता, बल्कि निर्यात से पहले यहाँ तेल की माप, गुणवत्ता जांच और विभिन्न प्रकार के कच्चे तेल का अलग-अलग वर्गीकरण भी किया जाता है.
ईरान के परमाणु समझौते के बाद, जब कुछ समय के लिए ईरान को तेल उत्पादन बढ़ाने और उसे बेचने की अनुमति मिली थी, तब ईरान ने अपने तेल भंडारण टैंकों का विस्तार करने का निर्णय लिया था.
लेकिन खार्ग द्वीप पर ज़मीन सीमित है और मौसम अक्सर तूफानी रहता है, इसलिए 2016 में बुशेहर प्रांत के गनावेह शहर से 28 किलोमीटर दूर ओमिद तेल भंडारण परियोजना शुरू की गई, जिसकी क्षमता तकरीबन एक करोड़ बैरल है.
कहा जाता है कि गनावेह में बना यह ओमिद तेल टैंक परिसर निजी क्षेत्र का सबसे बड़ा तेल भंडारण केंद्र है.
खार्ग के बंदरगाह और सुविधाएँ
खार्ग द्वीप पर दो प्रमुख तट हैं, पूर्वी और पश्चिमी. 1955 में तेल कंपनियों के एक कंसोर्शियम के साथ समझौते के बाद खार्ग में तेल लोडिंग डॉक और कच्चे तेल के भंडारण टैंक बनाने का काम शुरू हुआ.
पूर्वी तट टी आकार का है और इसमें एक साथ 2,75,000 टन क्षमता वाले छह तेल टैंकर खड़े हो सकते हैं. पश्चिमी हिस्से में इसमें चार बर्थ हैं, यहाँ 5,00,000 टन क्षमता वाले टैंकर तेल लोड करते हैं.
खार्ग द्वीप पर कच्चे तेल की गुणवत्ता की लगातार जांच के लिए एक रासायनिक प्रयोगशाला भी है. यह प्रयोगशाला ISO/IEC 17025 मानक से प्रमाणित है और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में गिना जाता है.
पेट्रोकेमिकल उद्योग
खार्ग पेट्रोकेमिकल कंपनी भी इसी द्वीप पर काम करती है. इसका उद्देश्य तेल उत्पादन के दौरान निकलने वाली गैसों को जलाने के बजाय उन्हें उपयोगी उत्पादों में बदलना है.
इस कंपनी के प्रमुख उत्पाद हैं. मेथेनॉल, सल्फर, प्रोपेन, ब्यूटेन, नेफ्था.
करीब आठ हजार से अधिक आबादी वाले इस द्वीप पर इस्लामिक आज़ाद यूनिवर्सिटी की समुद्री विज्ञान और आर्ट ब्रांच भी मौजूद है. यहाँ पढ़ाए जाने वाले महत्वपूर्ण विषयों में पेट्रोलियम और समुद्री अध्ययन शामिल हैं.
ईरान-इराक युद्ध के दौरान ईरान के 90 प्रतिशत से अधिक तेल निर्यात खार्ग द्वीप के ज़रिये होता था. इसी कारण इराक ने इस छोटे द्वीप पर लगभग 2,800 बार हमला किया था. उस समय के प्रसिद्ध "टैंकर युद्ध" का बड़ा हिस्सा भी खार्ग द्वीप के आसपास हुआ था.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.