कमल हासन खिल पाएंगे तमिल सियासत की कंटीली ज़मीन पर

कमल हासन

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    • Author, इमरान कुरैशी
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

तक़रीबन बारह बरस बाद तमिलनाडु के किसी फ़िल्मी सितारे ने सियासत की उबड़-खाबड़ ज़मीन पर कदम रखा है.

कमल हासन ने अपनी राजनीतिक पार्टी बनाकर एक तरह से अपने पुराने सहयोगी रजनीकांत को मात दे दी है.

लेकिन कमल हासन ने कभी भी अपनी राजनीति को लेकर किसी को कयास लगाने का मौका नहीं दिया.

साल 2005 में राजनीतिक पार्टी बनाने वाले तमिल अभिनेता विजयकांत के उलट कमल हासन ने अपना राज्यव्यापी दौरा रामनाथपुरम से शुरू किया.

इसी ज़मीन से डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम पैदा हुए और देश के सबसे लोकप्रिय राष्ट्रपति बने.

कमल हासन ने नारा दिया है, 'नालई नमाधे', हिंदी में इसका मतलब हुआ, 'कल हमारा है.'

और अपनी पार्टी का नाम रखा है - मक्कल नीति मय्यम.

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केजरीवाल का साथ

ये नारा विकास का विज़न देने वाले राष्ट्रपति कलाम के विचारों से प्रेरित लगता है. कमल हासन का अगला पड़ाव उनका होम टाउन पारामाकुडी है.

पारामाकुडी के बाद कमल मदुरै जाएंगे जहां वे अपनी नई राजनीति पार्टी और उसका झंडा औपचारिक तौर पर लॉन्च करेंगे.

मदुरै को तमिलनाडु की सांस्कृतिक राजधानी माना जाता है और यहां इस मौके पर उनके साथ आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल होंगे.

केरल के मुख्यमंत्री और सीपीएम नेता पिनराई विजयन के अलावा केजरीवाल दूसरे ऐसे नेता हैं जिनसे कमल हासन की खूब बनती है.

केजरीवाल के एक क़रीबी नाम न जाहिर करने की शर्त पर कहते हैं, "दोनों के बीच एक तरह का अपनापन है. पिछले साल चेन्नई में जब कमल हासन की अरविंद केजरीवाल से मुलाकात हुई थी तो ये बात साफ तौर पर ज़ाहिर हो रही थी."

कमल हासन, रजनीकांत

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तमिलनाडु की राजनीति

ऑब्ज़र्वर रिसर्च फ़ाउंडेशन के चेन्नई यूनिट के निदेशक एन सत्यमूर्ती कहते हैं, "कमल केजरीवाल को एक रोल मॉडल की तरह देखते हैं. केजरीवाल की छवि मिस्टर क्लीन वाली है और पार्टी और उसके झंडे की लॉन्चिंग में इससे कमल हासन को मदद मिलेगी."

पिछले कुछ हफ्तों के दौरान कमल हासन ने तमिलनाडु की राजनीति के बड़े नेताओं से मुलाकात भी की है.

इनमें द्रमुक के एम करुणानिधि और एमके स्टालिन से मुलाकात हुई है. डीडीएमके के विजयकांत से वे मिले हैं और इतना ही नहीं, फ़िल्म इंडस्ट्री के सुपरस्टार रजनीकांत से भी कमल हासन की मीटिंग हुई है. खुद रजनीकांत ने भी अपनी राजनीतिक पार्टी बनाने की घोषणा कर रखी है.

रजनीकांत से उनकी मीटिंग को राजनीतिक भेंट की बजाय निजी किस्म की मुलाकात बताया गया.

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सियासी महत्व

रजनीकांत ने इस सिलसिले में एक महत्वपूर्ण बयान भी जारी किया कि उनके और कमल हासन के बीच कुछ मुद्दों पर असहमति है.

रजनी ने ये बात तब कही जब उनसे ये पूछा गया कि क्या वे और कमल हासन कोई गठबंधन करेंगे.

लेकिन कमल हासन ने एहतियात बरतते हुए अन्नाद्रमुक नेताओं से मुलाकात से परहेज़ किया.

ये एक ऐसा कदम था जिससे ये संकेत मिले कि कमल हासन साफ़ तौर पर एक पॉलिटिकल स्टैंड ले रहे हैं.

इसका राजनीतिक मतलब स्पष्ट था, कमल हासन अन्नाद्रमुक विरोधी वोटों को अपनी ओर खींचना चाहते हैं.

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द्रमुक और अन्नाद्रमुक

राजनीतिक विश्लेषक मालन कहते हैं, "कमल हासन के इस कदम का मतलब ये है कि वे अन्नाद्रमुक विरोधी वोटों में अपनी हिस्सेदारी के लिए ज़ोर आज़माएंगे. लेकिन ये बार-बार साबित हुआ है कि अन्नाद्रमुक विरोधी वोटों का बड़ा हिस्सा हासिल करने में द्रमुक हमेशा से कामयाब होती रही है."

ऐतिहासिक रूप से पिछले 50 साल के चुनावी आंकड़ें ये बताते हैं कि द्रमुक और अन्नाद्रमुक बारी-बारी करके सत्ता में आती रही हैं.

हालांकि इन दोनों ही द्रमुक पार्टियों से निकले राजनीतिक दलों का भी तमिलनाडु की राजनीति में अपना जनाधार रहा है.

मालन जैसे राजनीतिक विश्लेषक ये मानते हैं, "कमल हासन शहरी मध्य वर्ग को अपनी तरफ़ खींचने में कामयाब हो सकते हैं. लेकिन समाज के इस तबके तक पहुंचने के लिए कमल हासन की पार्टी को 'मज़बूत कैडर' की ज़रूरत पड़ेगी."

"भले ही कमल हासन के लिए बड़ा फ़िल्मी सितारा होने की वजह से ख़बरों में बने रहते हों, लेकिन मज़बूत कैडर खड़ा करना कोई आसान काम नहीं है. क्या वे अपने चाहने वालों को वोटर में तब्दील कर पाएंगे. ये बड़ी चुनौती है."

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एनटीआर का उदाहरण

सत्यमूर्ति कहते हैं, "दरअसल, एमजी रामचंद्रन और जयललिता के उलट रजनीकांत और कमल हासन, दोनों ने राजनीति में आने में थोड़ी देर कर दी. वे दोनों तब सियासत में आए जब उनका फ़िल्मी करियर पीक पर था."

लेकिन राजनीति वो चीज़ होती है जिसके बारे में कभी भी पक्के तौर पर कुछ कहा नहीं जा सकता है.

तेलुगू मेगास्टार एनटी रामाराव भी अचानक अपनी तेलुगूदेशम पार्टी के साथ आंध्र प्रदेश के राजनीतिक फलक पर आए और अस्सी के दशक में राज्य के मुख्यमंत्री बन गए.

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