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नरोदा पाटिया: 'ऐसे लोग निर्दोष छूटें तो दिल दुखेगा ही'
नरोदा पाटिया दंगा मामले में शुक्रवार को गुजरात हाईकोर्ट ने बीजेपी सरकार में राज्य की मंत्री रही माया कोडनानी को बरी कर दिया. उनके पीए किरपाल सिंह छाबड़ा को भी बरी कर दिया गया है.
वहीं, बजरंग दल के नेता रहे बाबू बजरंगी की आजीवन उम्रक़ैद की सज़ा को घटाकर 21 साल कर दिया है.
फ़ैसला आने के बाद नरोदा पाटिया जाकर बीबीसी गुजराती सेवा के संवाददाता सागर पटेल ने पीड़ितों से बात की.
एक पीड़िता रुकसाना ने विस्तार से अपनी बात बताई. उनका कहना था कि उनके परिवार में दो लोगों की हत्या की गई थी.
उन्होंने कहा, "मेरा पूरा परिवार यहीं रहता था और हमारे परिवार में आठ लोग थे. 2002 में हम नाश्ता कर रहे थे और मेरी जो बहन मारी गई वह उस वक़्त कपड़े धो रही थी. मेरी मां भी इस दंगे में मारी गई. हम घर में थे तो हंगामा हुआ तो हम गोपीनाथ गंगोत्री सोसाइटी की ओर भागे तो वहां हम लोगों को घेर लिया गया."
रुकसाना बताती हैं कि उनकी मां और बहन समेत आस पड़ोस के कई लोगों को मार दिया गया.
उनको क्या मदद मिली? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि जब वह गंगोत्री सोसाइटी की ओर भागीं तो उन्हें मदद नहीं मिली.
वह कहती हैं कि वह इस फ़ैसले से ख़ुश नहीं हैं.
उनका कहना है, "हम ख़ुश नहीं हैं क्योंकि एक औरत होकर औरतों के साथ हैवानियत का नंगा नाच नचवाया है, लोगों को मरवाया है. औरत ने ही औरत की इज़्ज़त नहीं की. अगर यह उसके साथ या उसकी बेटी के साथ हुआ होता तो क्या होता. ऐसे लोगों को निर्दोष छोड़ दिया जाएगा तो दिल ही दुखेगा.
एक दूसरी पीड़िता ने बताया कि उन्होंने दंगों को ख़ुद देखा.
उन्होंने कहा, "बच्चों को मारने वाले लोगों को निर्दोष छोड़ देंगे तो यक़ीन नहीं होगा. हमने अपनी आंखों से देखा है."
एक पीड़िता शरीफ़ा बीबी शेख़ ने कहा, "मैं घर में थी और मेरे चार लड़के और एक लड़की थी. शोर मचा और फिर हम भागकर ढाबे में रुक गए. मेरे 16 साल के बेटे को मेरे सामने मार दिया गया. मेरे बेटे को तलवार से मारने के बाद पेट्रोल डालकर जलाया गया था. कोर्ट के फ़ैसले से दिल दुख रहा है."
इस मामले में सज़ा पाए बाबू बजरंगी पर पीड़िता कहती हैं कि कोडनानी की तरह बाबू बजरंगी भी को छोड़ दिया जाएगा.
वह कहती हैं, "धीरे-धीरे सब छोड़ दिए जाएंगे. मुझे न्याय नहीं मिला. हमें डर है कि यह लोग छूटने के बाद फिर वही करेंगे. कोई नेता आकर हमारी दिक्कतों की बात नहीं करता है. हमारी मांग है कि उन्हें सज़ा मिले ताकि दोबारा किसी के साथ ऐसा नहीं हो. मेरे घर में अब तीन बेटे और एक बेटी है. मारे गए बेटे की मुझे याद आती है क्योंकि वह घर का इकलौता कमाने वाला था. दोषियों को फांसी होनी चाहिए."
एक अन्य पीड़िता रोते हुए कहती हैं कि काफ़ी लोग इलाक़ा छोड़कर जा चुके हैं लेकिन वह भी इलाक़े से जाना चाहती हैं लेकिन पैसे की तंगी के कारण नहीं जा पाती हैं. वह कहती हैं कि उन्हें अभी भी डर लगता है और हिंदू-मुसलमानों के बीच फिर से अमन-चैन क़ायम होगा ऐसा नहीं लगता है.
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