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केरल स्टोरी-2 देखने के बाद सिनेमा हॉल में शपथ लेने पर विवाद, क्या है मामला?
- Author, अल्पेश करकरे
- पदनाम, बीबीसी मराठी
- पढ़ने का समय: 5 मिनट
महाराष्ट्र के पालघर ज़िले में नालासोपारा स्थित पीवीआर कैपिटल मॉल में 'हिंदू जागरण मंच' नामक संगठन की ओर से बीती पांच मार्च को फ़िल्म 'केरल स्टोरी 2' का आयोजन किया गया था.
फ़िल्म की स्क्रीनिंग के बाद सिनेमा हॉल में शपथ ली गई कि "हिंदुओं के अलावा किसी और से संबंध न रखा जाएगा और ग़ैर-हिंदुओं से दोस्ती नहीं की जाएगी." इस शपथ के वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं जिसमें कहा जा रहा है कि "किसी भी अन्य समुदाय को कपड़े का एक टुकड़ा भी बेचने की अनुमति नहीं होगी."
फ़िल्म के दौरान उपस्थित लोगों को यह शपथ दिलाई गई, "अगर आप सब्ज़ियां ख़रीदना चाहते हैं, तो उन्हें हिंदुओं से ख़रीदें और अगर आप अपने बाल कटवाना चाहते हैं, तो उन्हें हिंदुओं से कटवाएं."
कांग्रेस ने इसे दो समुदायों में दरार पैदा करने और देश के संविधान की अवहेलना करने वाला क़दम बताया है. कांग्रेस नेता हुसैन दलवाई ने कहा कि पुलिस को इस घटना का संज्ञान लेना चाहिए और अपने स्तर पर कार्रवाई करनी चाहिए क्योंकि 'नफ़रत फैलाना एक गंभीर अपराध है.'
एक स्थानीय पुलिस अधिकारी ने कहा है कि किसी ने इस घटना के बारे में कोई शिकायत दर्ज नहीं की है.
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इस अवसर पर 'हिंदू जागरण मंच' के पदाधिकारियों ने भाषण भी दिया. उन्होंने दावा किया कि कई जगहों पर कुछ समुदायों की ओर से हिंदुओं पर हमले किए जा रहे हैं.
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं.
स्क्रीनिंग में आए लोगों ने क्या कहा?
सोशल मीडिया पर आए वीडियो में फ़िल्म देखने आई कुछ महिलाओं की प्रतिक्रियाएं देखी जा सकती हैं.
इन महिलाओं ने कहा, "हमें अपने बेटों और बेटियों को अपने धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार शिक्षित करना चाहिए और उन्हें दूसरे धर्मों के लोगों से दोस्ती करने की इजाज़त नहीं देनी चाहिए. उन्हें अपने धर्म का पालन करना सिखाया जाना चाहिए."
हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने दावा किया, "झूठे नाम अपनाकर, और हिंदू होने का दिखावा करके दोस्ती कायम की जाती है. और लड़कियां इस जाल में फंस रही हैं. इसलिए, सभी को सावधान रहना चाहिए और अजनबियों से दोस्ती नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे प्रेम संबंध और यहां तक कि शादी भी हो सकती है."
कांग्रेस की तीखी प्रतिक्रिया
इस घटना पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कि यह दो समुदायों के बीच दरार पैदा करने और देश के संविधान की अवहेलना करने का कृत्य है.
मौलाना आज़ाद विचार मंच के अध्यक्ष और पूर्व सांसद एवं पूर्व मंत्री हुसैन दलवाई ने कहा, "देश में हिंदू और मुसलमान को बांटना ग़लत है. यह खेदजनक है कि यह सरकार ऐसे कृत्यों को अंजाम देने वालों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है. यह सरकार खुद ही ऐसी घटनाओं को बढ़ावा दे रही है."
दलवाई ने कहा, "यह घटना हमारे संविधान के ख़िलाफ़ है. पुलिस को इस घटना का संज्ञान लेना चाहिए और अपने स्तर पर कार्रवाई करनी चाहिए. नफ़रत फैलाना एक गंभीर अपराध है."
कांग्रेस के महाराष्ट्र उपाध्यक्ष और पूर्व विधायक मुज़फ्फर हुसैन ने बीबीसी मराठी से बात करते हुए कहा, "किसी समुदाय के ख़िलाफ़ ऐसी शपथ लेना ग़लत है. उनका देश के संविधान से कोई लेना-देना नहीं है. अप्रत्यक्ष रूप से इन सभी लोगों ने अपने कामों से यह दिखा दिया है कि हम डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के संविधान को स्वीकार नहीं करते हैं."
उन्होंने कहा, "देश में क़ानून-व्यवस्था नाम की कोई चीज़ नहीं बची है. पांच राज्यों में चुनाव घोषित होने के बाद दक्षिणपंथी लोग ये सब कर रहे हैं. केरल और अन्य राज्यों में चुनाव नज़दीक आने के साथ ही, इस तरह की फ़िल्में बनाकर नफ़रत फैलाने का काम चल रहा है."
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद डॉ. सैयद नासिर हुसैन ने एक्स पर इस घटना का एक वीडियो साझा करते हुए लिखा, "ख़बर है कि 10 मार्च को वसई, पालघर में फ़िल्म 'द केरल स्टोरी' की मुफ्त स्क्रीनिंग के बाद, उपस्थित लोगों ने मुसलमानों के आर्थिक और सामाजिक बहिष्कार की सामूहिक शपथ ली."
उन्होंने आरोप लगाया, "बीजेपी सरकार के शासनकाल में दुष्प्रचार के निरंतर प्रचार से मुसलमानों को निशाना बनाने की घटनाएं बढ़ी हैं और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण तेज़ हुआ है. जब सिनेमा को एक पूरे समुदाय को बदनाम करने के लिए राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, तो यह जोखिम रहता है कि पूर्वाग्रह संगठित भेदभाव में बदल जाएगा और मुस्लिम विरोधी भावना को बल मिलेगा."
"भारत के लोकतांत्रिक मूल्य धर्मनिरपेक्षता, समानता और बंधुत्व पर दृढ़ता से आधारित हैं. किसी भी समुदाय के आर्थिक या सामाजिक बहिष्कार का आह्वान भारतीय संविधान की बुनियाद पर धब्बा है. हमारे गणतंत्र के बहुलवादी और समावेशी स्वरूप को बनाए रखने के लिए इन्हें दृढ़ता से अस्वीकार किया जाना चाहिए."
'हिंदू जागरण मंच' और पुलिस ने क्या कहा
इस फ़िल्म पहल के आयोजक और हिंदू जागरण मंच के संयोजक राकेश जोशी ने बीबीसी मराठी से कहा, "हमने भारत में हिंदुओं के ख़िलाफ़ अत्याचारों, बड़े पैमाने पर धर्मांतरण की वास्तविकता को दिखाने और हिंदू समुदाय में जागरूकता पैदा करने के लिए इस फ़िल्म का आयोजन किया."
"कुछ लोग चुनाव प्रचार और नफ़रत फैलाने के आरोप लगा रहे हैं. हमारा मूल उद्देश्य हिंदुओं के ख़िलाफ़ धर्मांतरण और अत्याचारों को रोकना है. हमारे कार्यक्रम के बारे में किसी ने शिकायत नहीं की है."
इस घटना के बारे में पूछे जाने पर वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सुजीत कुमार पवार ने बीबीसी मराठी को बताया, "इस संबंध में कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है, इसलिए कोई कार्रवाई नहीं की गई है. अगर किसी को कुछ कहना हो तो हमें बताएं."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.