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क्या ममता बनर्जी के पुलिसवालों ने CRPF जवानों को पीटा? फ़ैक्ट चेक
- Author, फ़ैक्ट चेक टीम
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
- पढ़ने का समय: 2 मिनट
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें दावा किया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल की पुलिस ने वोटिंग के दौरान ड्यूटी पर तैनात केंद्रीय सुरक्षाकर्मियों की पिटाई की.
इस वीडियो पर ये कैपश्न लिखा आता हैः "ममता बेगम की पुलिस ने केंद्रीय जवानों को भी नहीं छोड़ा. इस वीडियो को शेयर करें और चुनाव आयोग के पास भेजें. "
डेढ़ मिनट के इस वीडियो को हज़ारों बार देखा और शेयर किया जा चुका है.
इसी वीडियो को एक और दावे के साथ शेयर किया जा रहा है जिसमें कहा जा रहा है पश्चिम बंगाल में रोहिंग्या शरणार्थियों ने केंद्रीय सुरक्षाकर्मियों पर हमला किया.
मगर बीबीसी ने अपनी पड़ताल में इन दावो को भ्रामक पाया. इस वीडियो में, एक ग़ुस्साई भीड़ को एक सरकारी वाहन पर हमला करते देखा जा सकता है.
नीली कमीज़ पहने घायल लोगों को एक क्षतिग्रस्त वाहन में बैठे देखा जा सकता है.
वीडियो में दिख रही पुलिस उग्र होती भीड़ को नियंत्रित करती दिख रही है ना कि वाहनों पर हमला करती, जैसा कि सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है.
वीडियो की सच्चाई
इस वीडियो की रिवर्स इमेज सर्च करने पर एक स्थानीय न्यूज़ चैनल न्यूज़ बृतांत की एक रिपोर्ट का पता चलता है. 12 अप्रैल 2019 को प्रकाशित हुई इस रिपोर्ट के अनुसार, ये वीडियो नेशनल हाईवे नंबर 31 पर हुई एक दुर्घटना के बाद का है, जब जलपाईगुड़ी के राजगंज चौकी क्षेत्र में दो स्थानीय लोगों की मौत हो गई.
मीडिया रिपोर्टों में कहा गया कि राजगंज पुलिस थाने के वहाँ थोड़ी देर बाद पहुँची जिससे लोग हिंसक हो उठे और पुलिस वाहन पर हमला कर दिया जिसमें पुलिसकर्मी और स्वयंसेवक घायल हो गए.
बताया गया कि पुलिस को घरों में छिपना पड़ा क्योंकि उनकी संख्या काफ़ी कम थी. भीड़ को क़ाबू में करने के लिए पुलिस की अतिरिक्त टुकड़ी को भेजना पड़ा.
बीबीसी फ़ैक्ट चेक टीम ने जलपाईगुड़ी के पुलिस अधीक्षक अमिताभ मैती से बात की जिन्होंने बताया, "एक ट्रक और एक बाइक की दुर्घटना में दो लोगों की मौत हो गई. जब हम वहाँ तफ़्तीश के लिए पहुँचे, तो ग़ुस्साई भीड़ ने पुलिस वाहन को क्षतिग्रस्त कर दिया था और पुलिसवालोँ और स्वयंसेवकों पर पत्थर बरसाने लगे. पुलिस ने भीड़ को काबू में करने की कोशिश की."
उन्होंने आगे कहा,"ये दावा बिल्कुल ग़लत है कि ममता बनर्जी के पुलिसकर्मियों या रोहिंग्या शरणार्थियों ने केंद्रीय सुरक्षाकर्मियों पर हमला किया."
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