गैस सिलेंडर न होने पर उससे निपटने के 12 तरीक़े जो आपके आ सकते हैं काम

    • Author, पृथ्वीराज
    • पदनाम, बीबीसी तेलुगु के लिए
  • पढ़ने का समय: 9 मिनट

जंग कहीं भी लड़ी जाए उसका किसी न किसी रूप में दुनिया पर असर पड़ता है. युद्ध यही होता है.

मध्य पूर्व में अमेरिका और इसराइल का ईरान के साथ युद्ध चल रहा है लेकिन इसका असर भारत में भी लोगों की रसोई तक पहुंच गया है.

कई शहरों में गैस के लिए लंबी कतारें देखी जा रही हैं. कई होटल और रेस्तरां गैस की कमी से प्रभावित हो गए हैं.

आशंका जताई जा रही है कि डीज़ल, पेट्रोल और खाना पकाने की गैस की क़ीमतें बढ़ सकती हैं. अगर यह जंग ज़्यादा दिनों तक चलती है तो हालात और बिगड़ सकते हैं.

गैस की क़ीमतों में बढ़ोतरी के साथ ही सिलेंडरों की कमी की ख़बरें भी आ रही हैं. मौजूदा दौर में कई घरों और होटलों में खाना पकाना और परोसना तभी संभव है जब गैस उपलब्ध हो.

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इंसान कई ज़रूरतों को कुछ दिनों के लिए छोड़ सकता है लेकिन भोजन रोज़ाना की ज़िंदगी के लिए अहम है. अगर गैस न हो तो लोगों के पास खाना पकाने के लिए अन्य विकल्पों की व्यवस्था करना ज़रूरी है.

आज भारत के शहरी क्षेत्रों में लकड़ी के चूल्हे, मिट्टी के तेल के चूल्हे और कोयले के चूल्हे तकरीबन ग़ायब हो चुके हैं. युवा पीढ़ी के कई लोगों ने तो इन्हें कभी देखा भी नहीं होगा. हालाँकि ग्रामीण इलाक़ों में ये अभी भी दिखाई देते हैं. वहीं शहरों में माइक्रोवेव ओवन और इंडक्शन स्टोव जैसे आधुनिक विकल्प मौजूद हैं.

इस कहानी में हम जानने की कोशिश करेंगे कि मौजूदा हालात में बिना घबराए किन वैकल्पिक चूल्हों का इस्तेमाल किया जा सकता है और इसके लिए किस तरह के ईंधन की ज़रूरत पड़ती है.

1. इंडक्शन कुकटॉप

शहरी क्षेत्रों में गैस स्टोव के प्रमुख विकल्प के रूप में इंडक्शन कुकटॉप लोकप्रिय हो रहे हैं. ये इलेक्ट्रिक स्टोव बर्तनों को लौ के बजाय चुंबकीय ऊर्जा से सीधे गर्म करते हैं.

इससे बर्तन जल्दी गर्म हो जाते हैं और बिजली की बर्बादी भी कम होती है. यह दूध उबालने से लेकर दाल, सब्ज़ी वग़ैराह बनाने के लिए काफ़ी उपयोगी होता है.

फ़ायदा: इस पर खाना जल्दी पक जाता है. यह फ्लेमलेस होता है, जिसकी वजह से यह सुरक्षित भी है. इसे साफ करना भी आसान है.

कमियां: इस स्टोव को इस्तेमाल करने के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए इंडक्शन बेस वाले बर्तनों की ज़रूरत होती है. साथ ही, यह बिजली के बिना काम नहीं करेगा.

कहां से ले सकते हैं: इलेक्ट्रिक सामान की दुकानों, रसोई के सामान की दुकानों और ऑनलाइन बाज़ारों में आम तौर पर यह आसानी से उपलब्ध होता है.

2. इन्फ्रारेड इलेक्ट्रिक स्टोव

बाहर से देखने पर इंफ्रारेड स्टोव इंडक्शन स्टोव जैसा ही लगता है, लेकिन इसके काम करने का तरीक़ा अलग होता है. यह नीचे लगे इंफ्रारेड कॉयल्स के ज़रिए गर्मी पैदा करता है और बर्तनों को गर्म करता है.

इस पर आप हर तरह के बर्तनों में खाना बना सकते हैं.

लाभ: यह बिजली से चलता है. इसे स्टील, एल्युमीनियम और कांच जैसे सभी बर्तनों के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है.

कमियां: स्टोव टॉप बहुत गर्म हो जाता है. इसमें इंडक्शन कुकटॉप की तुलना में बिजली की खपत थोड़ी अधिक होती है.

कहां मिलेगा: ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स, इलेक्ट्रिक सामान की दुकानों, रसोई के सामान की दुकानों पर.

3. कॉयल स्टोव

इलेक्ट्रिक हॉट प्लेट. इसे कॉयल स्टोव भी कहते हैं. यह खाना पकाने का एक बहुत ही किफ़ायती उपकरण है. यह बिजली से चलता है. इसके अंदर लगी कॉयल बिजली से बर्तन को गर्म करती है.

लाभ: लगभग सभी प्रकार के बर्तनों के साथ इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. इसकी क़ीमत काफ़ी कम होती है.

कमियां: इसे गर्म होने में थोड़ा समय लगता है और बिजली की खपत अधिक होती है.

कहां से ख़रीद सकते हैं: हार्डवेयर स्टोर, इलेक्ट्रिक उपकरणों के स्टोर, ऑनलाइन शॉपिंग के ज़रिए.

4. इलेक्ट्रिक राइस कुकर

इलेक्ट्रिक राइस कुकर का इस्तेमाल काफ़ी समय से हो रहा है. ये कई घरों में पाए जाते हैं. इनकी मदद से चावल, दाल, करी और सूप जैसे व्यंजन बहुत आसानी से तैयार किए जा सकते हैं.

इसके लिए बस खाना पकाने के लिए ज़रूरी सामग्री को बर्तन में डालें, पानी डालें और कुकर चालू कर दें, और यह कुकर अपना काम पूरा कर देगा.

लाभ: यह काफ़ी सुविधाजनक है. इसमें कम बिजली की खपत होती है और इसमें कम मेंटेनेंस की ज़रूरत होती है.

कमियां: इस पर तली हुई सब्ज़ियाँ या अन्य भोजन नहीं पकाए जा सकते हैं. इस पर रोटी, पूरी या चपाती भी नहीं बनाई जा सकती.

कहां मिलेगा: इलेक्ट्रिक सामान की दुकान, सुपरमार्केट, ऑनलाइन स्टोर.

5. माइक्रोवेव ओवन

माइक्रोवेव ओवन का उपयोग मुख्य रूप से भोजन को गर्म करने और स्टीम (भाप) से खाना पकाने के लिए किया जाता है. यह पानी के मॉलिक्यूल्स को गर्म करके भोजन को जल्दी पका देता है. लेकिन यह स्टोव की तरह खाना पकाने के लिए उपयुक्त नहीं है.

फ़ायदे: खाना बहुत जल्दी गर्म हो जाता है. यह सब्ज़ियों को भाप में पकाने के लिए बढ़िया है.

कमियां: इससे तले हुए व्यंजन, डोसा, चपाती आदि बनाना संभव नहीं है.

कहां मिलेगा: इलेक्ट्रिक उपकरण की दुकानों में, ऑनलाइन बाजारों में.

6. सोलर कुकर

सोलर कुकर खाना पकाने के लिए सूरज की रोशनी का इस्तेमाल करते हैं. इसके सोलर रिफ़्लेक्टर सूर्य की रोशनी को एक बर्तन पर केंद्रित करके गर्मी पैदा करते हैं. बस बर्तन में खाना रखें, उसे सोलर कुकर में डालें और सीधे धूप में रख दें.

लाभ: सोलर कुकर में अन्य ईंधन की ज़रूरत नहीं होती है. यह पर्यावरण के अनुकूल होता है.

कमियां: इसे पकने में काफ़ी समय लगता है. बादल वाले दिनों में या रात में इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.

यह कहां मिलेगा: ऑनलाइन स्टोर और बाज़ार में.

7. केरोसिन स्टोव

हालांकि गैस सिलेंडर और गैस स्टोव अब आम बात हो गई है, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब लगभग हर घर में केरोसिन के स्टोव आम थे. केरोसिन राशन की दुकानों के माध्यम से भी उपलब्ध कराया जाता था.

इस चूल्हे में केरोसिन भरकर उसे जलाया जाता है, जिससे गैस स्टोव की तरह ही खाना पकाया जा सकता है.

लाभ: केरोसिन आम तौर पर आसानी से उपलब्ध होता है. इसकी लौ काफ़ी तेज़ होती है.

कमियां: इसका धुआं तकलीफ़ पहुंचाने वाला होता है. कई लोगों के लिए जलते हुए केरोसिन की गंध असहज होती है. इस पर खाना पकाने के बाद बर्तनों पर कालिख जम जाती है. ऐसे बर्तनों को साफ करना मुश्किल होता है.

यह कहाँ मिलेगा: हार्डवेयर स्टोर, गांव और क़स्बों के बाज़ारों में.

8. बायोगैस स्टोव

बायोगैस एक मीथेन गैस है जो पशुओं के गोबर और रसोई के कचरे जैसे जैविक पदार्थों से उत्पन्न होती है. इसमें ऑर्गेनिक कचरे को बायोगैस संयंत्र में डाला जाता है और एक निश्चित प्रक्रिया के बाद निकलने वाली गैस का इस्तेमाल चूल्हे में किया जाता है.

लाभ: सस्ता ईंधन, पर्यावरण के लिए अच्छा, इसके अंत में बचे पदार्थों का इस्तेमाल खाद के रूप में भी किया जा सकता है.

कमियां: इसके लिए जगह की आवश्यकता होती है और जैविक कचरे की आवश्यकता होती है.

यह कहां मिलेगा: इस क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियां, और कई ग्रामीण संगठनों के पास.

9. ब्यूटेन कार्ट्रिज स्टोव

यह एक पोर्टेबल स्टोव है जो छोटे गैस कार्ट्रिज से चलता है. आप कार्ट्रिज को स्टोव में रखकर और उसे जलाकर गैस की आंच पर खाना बना सकते हैं.

लाभ: इसे आमतौर पर यात्राओं पर साथ ले जाया जाता है. यह गैस स्टोव की तरह खाना पका सकता है.

कमियां: ब्यूटेन कार्ट्रिज थोड़े महंगे होते हैं.

कहां मिलेगा: कैंपिंग उपकरण की दुकानों में, ऑनलाइन बाजारों में.

10. बायोमास पेलेट स्टोव

यह एक ऐसा चूल्हा है जो ईंधन के रूप में कृषि अपशिष्ट से बने छोटे-छोटे दानों का उपयोग करता है. इन दानों को चूल्हे में रखकर जलाने पर, इनसे निकलने वाली आग से खाना पकाया जा सकता है.

लाभ: पारंपरिक लकड़ी जलाने वाले चूल्हों की तुलना में कम धुआं उत्पन्न करता है.

नुकसान: सभी क्षेत्रों में पेलेट्स आसानी से उपलब्ध नहीं होते हैं.

कहां मिलेंगे: कृषि उपकरण आपूर्तिकर्ता, नवीकरणीय ऊर्जा कंपनियां.

11. रॉकेट स्टोव

यह एक विशेष प्रकार का चूल्हा है जिसे लकड़ी के छोटे टुकड़ों से अधिक गर्मी उत्पन्न करने के लिए डिज़ाइन किया गया है. लकड़ी को चूल्हे में रखा जाता है, जलाया जाता है और उस आग पर खाना पकाया जाता है.

लाभ: इसमें कम ईंधन से अधिक गर्मी मिलती है. जलाऊ लकड़ी आसानी से उपलब्ध है.

कमियां: आमतौर पर घर के बाहर खाना पकाने के लिए उपयोग किया जाता है.

यह कहां मिलेगा: ग्रामीण प्रौद्योगिकी कंपनियों या खुद से करने वाले तरीकों से.

12. कोयले का चूल्हा

कोयले या चारकोल का उपयोग करके खाना पकाने की एक पारंपरिक विधि. चूल्हे में कोयले को जलाया जाता है और उसके ऊपर बर्तन रखकर खाना पकाया जाता है.

लाभ: कोयला आसानी से उपलब्ध है. ऊष्मा एक समान रहती है.

नुकसान: इसका धुआं लोगों को परेशान कर सकता है. इससे कार्बन मोनोऑक्साइड गैस उत्पन्न होती है, जिससे बीमारी हो सकती है.

कहां मिलेगा: ग्रामीण बाज़ार, हार्डवेयर स्टोर.

एक हाइब्रिड किचन- सबसे अच्छा समाधान

शहरी क्षेत्रों में, बिजली के उपकरण आमतौर पर अधिक उपयोगी होते हैं. खाना पकाने के ज़्यादातर काम इंडक्शन स्टोव, इलेक्ट्रिक कुकर और माइक्रोवेव जैसे उपकरणों से किए जा सकते हैं.

गांवों में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध ईंधन सबसे उपयोगी होते हैं. बायोगैस, पेलेट स्टोव और रॉकेट स्टोव जैसे उपकरण इस्तेमाल करने में आसान होते हैं.

मौजूदा हालात में हाइब्रिड किचन बनाना सबसे अच्छा उपाय है. यानी, अलग-अलग तरह के खाना पकाने के उपकरणों का एक साथ इस्तेमाल करने से गैस न होने पर भी खाना बिना किसी परेशानी के पकाया जा सकता है.

मसलन अगर आप गैस स्टोव के साथ इंडक्शन स्टोव या इलेक्ट्रिक कुकर का उपयोग करते हैं, तो एक ईंधन उपलब्ध न होने पर भी खाना पकाना बंद नहीं होगा.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.