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राष्ट्रीय जनता दल और परिवार में वर्चस्व की लड़ाई को संभाल पाएंगे लालू प्रसाद यादव?
- Author, नीरज सहाय
- पदनाम, पटना से बीबीसी हिंदी के लिए
राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद के परिवार में उत्तराधिकार और वर्चस्व की लड़ाई अब अहम मोड़ पर पहुंचती नज़र आ रही है.
तेजप्रताप यादव का ताज़ा बयान शनिवार को आया जिसमें उन्होंने अपने छोटे भाई और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव पर उनके पिता और पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद को बंधक बनाकर रखने का आरोप लगाया है.
तेजस्वी प्रसाद यादव का नाम लिये बगैर उन्होंने कहा कि चार-पांच लोग हैं जो लालू प्रसाद को पटना आने नहीं दे रहे. लालू जी को जेल से निकले लगभग एक साल बीत चुके हैं, लेकिन पटना एक बार भी आने नहीं दिया गया है. उनको बंधक बनाकर दिल्ली में रखा गया है.
दरअसल तेजप्रताप यादव ने अपने संगठन छात्र जनशक्ति परिषद के प्रशिक्षण शिविर में शनिवार को बग़ावती तेवर खुलकर दिखाए. इस दौरान उन्होंने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह को भी निशाने पर लिया और कहा कि ''कुछ लोग राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का सपना देख रहे हैं और मैं उनका सपना पूरा नहीं होने दूंगा.''
साथ ही युवा राजद के प्रदेश अध्यक्ष कारी सोहेब पर एक महिला से दो लाख रुपये ठगने का भी आरोप लगाया और सवाल किया कि ''उनपर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है.''
विरोधियों को मौका
उन्होंने राजद को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा संचालित किए जाने का भी आरोप लगाया और कहा कि ''जिन लोगों ने छात्र राजद के अध्यक्ष पद से आकाश यादव को हटाया था, वे अब कारी सोहेब को संरक्षण दे रहे हैं.''
इस प्रकरण पर विरोधी दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव ने रविवार को अपना पक्ष रखा और कहा, ''लालू प्रसाद ने कई ऐसे कार्य किए हैं जिससे देश और बिहार के लोग उन्हें पहचानते हैं. वे लम्बे समय तक मुख्यमंत्री और रेल मंत्री रह चुके हैं. उन्होंने दो-दो प्रधानमंत्री भी बनाए हैं और लालकृष्ण आडवाणी को गिरफ़्तार भी करवाया था. लालू जी को बंधक बनाने की बात उनके व्यक्तित्व से मिलती ही नहीं है.''
वहीं इस मुद्दे को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह चर्चा का कोई विषय ही नहीं मानते. लेकिन राज्य में सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन को बैठे-बिठाए तेजप्रताप यादव के बयान ने एक मुद्दा ज़रूर मिल गया है.
लालू कहां हैं
इस मुद्दे पर राज्य की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के सांसद और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा, "लालू प्रसाद मुख्यमंत्री, किंगमेकर और केंद्रीय मंत्री रहे हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए.
यह पता करना चाहिए कि कौन लोग उन्हें पटना आने से रोक रहे हैं? राजद ख़ुद को मास की पार्टी बताती है, लेकिन लालू-राबड़ी के घर के दरवाज़े अब आम कार्यकर्ताओं के लिए बंद क्यों रहते हैं?"
वहीं जनता दल यूनाइटेड के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने इसपर कटाक्ष करते हुए कहा, " किसने किसे बंधक बनाया है यह राजद का आतंरिक मामला है, लेकिन बिहार में वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण क़ानून है. यदि कोई ऐसा नहीं करता है तो पदाधिकारियों को आवेदन दिया जा सकता है. यहाँ ऐसा प्रावधान है."
पार्टी और परिवार में मचे राजनीतिक घमासान के बीच राजद ने तारापुर और कुशेश्वरस्थान विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव में कांग्रेस को अलग करते हुए अपने प्रत्याशियों के नाम की घोषणा कर दी है. उपचुनाव की कमान संभालने के लिए पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद के पटना पहुँचने की घोषणा भी कर दी गई है.
आगे क्या हो सकता है
पार्टी और परिवार में उपजे विवाद के बीच लालू प्रसाद के पटना आने के संदर्भ में वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय का कहना है, "तेजप्रताप यादव को पार्टी में महत्व नहीं मिल रहा है. अब पार्टी और परिवार के लिए तेजप्रताप एक दुविधा बन गए हैं.
तेजप्रताप यादव पार्टी तोड़ नहीं सकते, हाँ पार्टी के लिए परेशानी ज़रूर पैदा कर सकते हैं. दो विधानसभा सीट के लिए होने वाले उपचुनाव में लालू प्रसाद यादव का आना कहीं न कहीं इस बात का संकेत है कि लालू अपने चुनावी दौरे के बहाने दोनों भाइयों के बीच की खाई को पाटने का प्रयास करेंगे."
वहीं वरिष्ठ पत्रकार नचिकेता नारायण इस समूचे प्रकरण की किसी राजनीतिक प्रासंगिकता से इनकार करते हैं. वे कहते हैं, " तेजप्रताप यादव पिछले छह सालों में ऐसा व्यवहार कई बार कर चुके हैं. हाल में ही इन्होंने छात्र जनशक्ति परिषद बना ली और 2019 के लोकसभा चुनाव में अपने लोगों के टिकट कटने के विरोध में लालू-राबड़ी मोर्चा बना लिया था.
अगर उनका क़द उनके छोटे भाई तेजस्वी प्रसाद यादव से छोटा हो गया है तो इसके लिए सिर्फ़ तेजस्वी ज़िम्मेदार नहीं हैं. इसमें लालू जी की भी सहमति है. इन इशारों को तेजप्रताप यादव शायद समझ नहीं पा रहे हैं और लालू जी का पटना आगमन भी इस द्वंद पर विराम लगाने वाला माना जा रहा है."
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