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टीएमसी नेता की मौत के बाद आगज़नी में आठ मरे, कैसे भड़की हिंसा?
- Author, प्रभाकर मणि तिवारी
- पदनाम, कोलकाता से, बीबीसी हिंदी के लिए
- पढ़ने का समय: 5 मिनट
पश्चिम बंगाल के बीरभूम ज़िले के बगटूई गांव में शोक और सन्नाटे का आलम चारों ओर पसरा है.
रामपुरहाट 1 नंबर पंचायत समिति के इस गांव में छोटी-मोटी घटनाएं और हिंसा तो पहले भी होती रहती थी. लेकिन सोमवार रात को घटी घटनाओं ने उन सबको पीछे छोड़ दिया है.
इस गांव के लोगों को दोहरा झटका लगा है. आलम यह है कि कोई इस घटना के बारे में मुंह खोलने को तैयार नहीं है.
मालूम हो कि बड़साल ग्राम पंचायत के उप-प्रधान और टीएमसी नेता भादू शेख की सोमवार शाम कुछ अज्ञात लोगों ने गोली मार कर हत्या कर दी. उनका शव मंगलवार सुबह गांव पहुंचा. तब उनके घर के बाहर भारी भीड़ मौजूद थी.
और उनके घर से महज 200 मीटर दूर आगजनी के भयावह निशान और जले हुए मकानों के अवशेष बिखरे पड़े थे. मंगलवार दोपहर तक वहां से धुंआ निकल रहा था. कहीं जली हुई रस्सी पड़ी थी, तो कहीं अधजली चप्पल.
गांव के लोगों के चेहरों पर आतंक की छाया साफ़ नज़र आती है. गांव में भारी तादाद में पुलिस के जवान तैनात हैं. और पुलिस ने हालात क़ाबू में होने का दावा किया है.
सोमवार शाम को भादू की हत्या के बाद से ही पूरे गांव में भारी तनाव फैला हुआ है. हत्या के कुछ देर बाद ही कुछ लोगों ने कई घरों में आग लगा दी.
शुरु में आग में जलने से दस लोगों की मौत खबरें आ रही थीं लेकिन बाद में पुलिस ने आठ लोगों के मरने की ही पुष्टि की है.
दूसरी ओर, इस घटना के बाद राजनीति भी गरमा गई है. राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने इस मामले पर सरकार की खिंचाई करते हुए मुख्य सचिव से इस घटना पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.
उधर, मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी ने राज्य में क़ानून और व्यवस्था ध्वस्त होने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफ़े की मांग की है.
प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने कहा है कि बंगाल धीरे-धीरे राष्ट्रपति शासन की ओर बढ़ रहा है.
एसआईटी करेगी जांच
राज्य सरकार ने इस घटना की जांच के लिए विशेष कार्यबल (एसआईटी) का गठन कर दिया है. इसमें सीआईडी के एडीजी ज्ञानवंत सिंह के अलावा, पश्चिमी रेंज के एडीजी संजय सिंह और सीआईडी के डीआईजी मिराज ख़ालिद शामिल हैं.
इस घटना के बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए रामपुर हाट के ओसी त्रिदीप प्रामाणिक और एसडीपीओ सायन अहमद को उनके पद से हटा दिया गया है.
पुलिस महानिदेशक मनोज मालवीय ने बीरभूम के पुलिस अधीक्षक नागेन्द्र नाथ त्रिपाठी से घटना की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.
फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों ने आगजनी में एक ही घर से 7 शवों की बरामदगी समेत कुल 10 लोगों के झुलस कर मरने की बात कही थी. लेकिन बाद में पुलिस ने इस घटना में 8 लोगों की मौत का दावा किया.
पुलिस महानिदेशक मनोज मालवीय ने कोलकाता में पत्रकारों से कहा, "कल रात तृणमूल के उप-प्रधान बहादुर शेख़ की हत्या की ख़बर आई थी. उसके एक घंटे बाद देखा गया कि पास के ही 7-8 घरों में आग लग गई है. इस मामले में 11 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. वहां के एसडीपीओ और रामपुरहाट के ओसी को हटा दिया गया है."
उनका कहना था कि पहले 10 लोगों की मौत की बात कही गई थी, जो सही नहीं थी. कुल 8 लोगों की मौत हुई है. एक ही मकान से 7 लोगों के शव बरामद हुए हैं. एक घायल ने अस्पताल में दम तोड़ा है. जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है.
पुलिस महानिदेशक के मुताबिक़, फ़िलहाल गांव में स्थिति क़ाबू में है.
'इस हत्या से गांव का चेहरा बदल गया'
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि भादू सोमवार शाम को एक दुकान पर चाय पी रहे थे. उसी समय कुछ युवकों ने उन पर बम से हमला कर दिया. उसके बाद गंभीर हालत में उन्हें रामपुर हाट अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
उनकी मौत की ख़बर फैलते ही पूरे गांव में तनाव फैल गया और कई घरों में आग लगा दी गई.
मौक़े पर पहुंचे फायर ब्रिगेड के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सोमवार रात एक ही घर से 3 लोगों के जले शव बरामद किए गए. उसके बाद मंगलवार सुबह एक दूसरे मकान से 7 लोगों के शव बरामद किए गए.
गांव के एक व्यक्ति नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं, "कल शाम को भादू की हत्या के बाद से ही गांव का चेहरा बदल गया. लेकिन रात को जो कुछ हुआ, उसकी किसी ने कल्पना तक नहीं की थी."
दूसरी ओर, भादू के क़रीबियों का आरोप है कि बीते साल जनवरी में भादू के बाई बाबर शेख़ की हत्या की गई थी. भादू की हत्या में भी उन लोगों का ही हाथ होने का संदेह है, जिन लोगों ने उनके भाई की हत्या की थी.
इस बीच, बीजेपी ने इस घटना की निंदा करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जिनके ज़िम्मे गृह विभाग भी है, के इस्तीफ़े की मांग उठाई है.
प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष सुकांत मजूमदार कहते हैं, "ममता बनर्जी को फौरन इस्तीफ़ा दे देना चाहिए. टीएमसी उत्तर प्रदेश और गुजरात का तो हवाला देती है. लेकिन बंगाल में सरेआम आग लगा कर 10 लोगों को ज़िंदा जला दिया गया. यह राज्य राष्ट्रपति शासन की ओर बढ़ रहा है."
विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने तो राज्य में क़ानून और व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए केंद्र के तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है.
बांग्ला में अपने एक ट्वीट में उन्होंने आरोप लगाया कि घटना में मरने वालों की तादाद घटाने का प्रयास हो रहा है और इस मामले की लीपापोती की क़वायद शुरू हो गई है.
दूसरी ओर, टीएमसी के प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा है कि रामपुर हाट में आग से मौत का राजनीति से कोई लेना देना नहीं है. यह स्थानीय ग्रामीणों का संघर्ष है. एक दिन पहले टीएमसी नेता की हत्या की गई थी. वे बेहद लोकप्रिय थे. उनकी मौत के कारण लोगों में भारी नाराज़गी थी.
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