मेरा काम पूरा हुआः नरेंद्र मोदी

वर्ष 2002 में हुए गुजरात दंगों के सिलसिले में विशेष जाँच दल के सामने पेश हुए गुजरात के मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से दूसरे दौर की पूछताछ भी पूरी हो गई है.
दूसरे दौर की पूछताछ लगभग चार घंटे चली और भारतीय समयानुसार रात क़रीब एक बजे समाप्त हुई.
बातचीत के बाद पत्रकारों से मुखातिब नरेंद्र मोदी ने कहा कि उनसे कहा गया है कि उनका काम पूरा हो गया है. हालांकि उन्हें इस पूरी पूछताछ के सिलसिले में कुछ भी कहने का अधिकार नहीं है.
दूसरे दौर की बातचीत के लिए रात क़रीब नौ बजे मुख्यमंत्री मोदी एक बार फिर एसआईटी के अहमदाबाद स्थित कार्यालय पहुँचे. पहले दौर में उनसे पाँच घंटे तक पूछताछ हुई थी.
पहले दौर की पूछताछ के बाद नरेंद्र मोदी ने बताया था कि एसआईटी ने उनसे 27 मार्च को मिलने के लिए चिट्ठी भेजी थी और इसलिए वे पेश हुए हैं.
मोदी ने कहा, "देश का संविधान और क़ानून सर्वोच्च है. नागरिक और मुख्यमंत्री के नाते मैं भारत के क़ानून से बंधा हुआ हूँ. आज मेरे व्यवहार ने मेरे आचरण ने भाँति-भाँति की बातें फैलाने वालों को करारा जवाब दे दिया है."
उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति का क़ानून से ऊपर नहीं हो सकता. आशा है कि लोग अब इस तरह की बातें बंद करेंगे.
मुख्यमंत्री मोदी ने कहा कि लोगों को भ्रम रहता है. इसलिए वे स्पष्ट करना चाहते हैं कि एसआईटी सुप्रीम कोर्ट ने बनाई है और एसआईटी में गुजरात का कोई अधिकारी नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को नियुक्त किया है.
दूसरे दौर की बातचीत के बाद उन्होंने बताया कि विशेष दल के अधिकारियों ने उनसे जो सवाल पूछे हैं वो 27 फरवरी, 2002 से लेकर राज्य में विधानसभा चुनावों तक के समय पर केंद्रित हैं.
उन्होंने यह भी बताया कि पूछताछ के सभी सवाल और जवाबों को एक रिपोर्ट की शक्ल में सुप्रीम कोर्ट को सौंपा जाएगा और सुप्रीम कोर्ट ही तय करेगा कि इनमें से किन सवालों और जवाबों को सार्वजनिक करने की ज़रूरत है या करना है.
गुजरात दंगों के दौरान गुलबर्ग सोसाइटी में हुई हिंसा में कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफ़री मारे गए थे. उनकी पत्नी जकिया जाफ़री की शिकायत पर मुख्यमंत्री मोदी को पूछताछ के लिए बुलाया गया था.
पिछले साल 27 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी को निर्देश दिया था कि वह जकिया जाफ़री की शिकायत की जाँच करें.
आरोप
जकिया जाफ़री ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री मोदी और 62 अन्य लोगों ने गुजरात में हुई हिंसा में सहायता की और उसे बढ़ावा दिया. गुजरात दंगों में एक हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए थे.

गुजरात दंगों के दौरान फरवरी 2002 में गुलबर्ग सोसाइटी पर भी हमला हुआ था, जिसमें एहसान जाफ़री समेत 70 लोग मारे गए थे.
गुजरात में वर्ष 2002 में हुए दंगों में एक हज़ार से अधिक लोग मारे गए थे और इनमें अधिकतर मुसलमान थे.
ये दंगे गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस में आग लगने के कारण 59 हिंदुओं के मारे जाने के बाद भड़के थे.
वर्ष 2009 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि एसआईटी का गठन किया था और कहा था कि टीम तीन महीने के अंदर शिकायत की जाँच कर के अपनी रिपोर्ट दे.
गुजरात हाईकोर्ट ने कहा था कि एसआईटी जब चाहे मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल-जवाब कर सकता है.
































