लोक लेखा समिति में तीखे मतभेद

2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले की जांच कर रही लोक लेखा समिति के अंदर तीखे मतभेद उभर कर सामने आने लगे हैं.
भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी की अध्यक्षता वाली ये समिति शुक्रवार को 2 जी मामले में सीबीआई के निदेशक और एटॉर्नी जनरल की भी पूछताछ करनेवाली थी.
लेकिन समिति के ही कुछ सदस्यों ने सवाल उठाया कि जब इसी मामले की छानबीन के लिए एक संयुक्त संसदीय समिति की नियुक्ति हो चुकी है तो फिर इस पूछताछ की क्या ज़रूरत है.
इस अंदरूनी वाद विवाद की वजह से सीबीआई के निदेशक ए पी सिंह और एटॉर्नी जनरल जी ई वहनावती को कई घंटों तक इंतज़ार करना पड़ा और उसके बाद भी उनसे पूछताछ नहीं हो सकी.
लोक लेखा समिति में 22 सदस्य हैं जिनमें से सात कांग्रेस से हैं, चार भाजपा, डीएमके और एआईएडीएमके के दो-दो, और शिवसेना, बीजू जनता दल, जनता दल यूनाइटेड, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाजवादी पार्टी और सीपीआईएम के एक-एक सदस्य हैं. एक सीट खाली है.

कांग्रेस और डीएमके दोनों ने ही स्पेक्ट्रम आवंटन में इस समिति की जांच का विरोध किया. इस मामले में डीएमके के सांसद और पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा जेल में हैं.
उन पर आरोप है कि उन्होंने 2008 में 2-जी के लाइसेंस बेहद कम कीमत पर ऐसी कंपनियों को दिए जो सरकारी नीति की शर्तों का पालन नहीं कर रही थीं.
केंद्र सरकार कई महीनों तक संयुक्त संसदीय समिति का विरोध ये कहकर करती रही कि लोक लेखा समिति इसकी जांच कर रही है.
समिति अब तक कई वरिष्ठ अधिकारियों की पूछताछ कर चुकी है और 30 अप्रैल तक अपनी रिपोर्ट पेश करने की उम्मीद रखती है.
लोक लेखा समिति के अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी और संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष पी सी चाको के बीच भी अधिकार क्षेत्र को लेकर ठन गई है.
चाको खुल कर कह चुके हैं कि जोशी इस जांच से खुद ही बाहर हो जाएं क्योंकि संसदीय समिति इसकी जांच कर रही है. वहीं जोशी का कहना है कि वो 2-जी घोटाले के हर पहलू की जांच करेंगे क्योंकि ये उनका संवैधानिक कर्त्तव्य है.
दोनों लोक सभा अध्यक्ष मीरा कुमार से भी मिले थे और उन्होंने उनसे तालमेल बना कर काम करने की सलाह दी थी.
पिछले दिनों इस समिति के सामने रतन टाटा और अनिल अंबानी पूछताछ के लिए हाज़िर हो चुके हैं.
































