हिरासत में लिए जाने के कुछ घंटे बाद राहुल रिहा

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पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ग्रेटर नोएडा में भू-अधिग्रहण के ख़िलाफ़ किसानों के साथ धरने पर बैठे कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी को बुधवार देर रात पुलिस ने हिरासत में लिया और फिर कुछ घंटे बाद रिहा कर दिया.
बुधवार और बृहस्पतिवार की दरम्यानी रात में लगभग दो बजे पुलिस ने उन्हें डीएनडी फ़्लाईवोभर के रास्ते दिल्ली के सराए काले ख़ां अंतरराज्यीय बस टर्मिनल पर छोड़ दिया. इस तरह से लगभग 24 घंटों तक चले घटनाक्रम का अंत हुआ.
इससे पहले बुधवार की रात 11 बजे उत्तरप्रदेश पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार कर लिया था.
वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने बीबीसी को बताया कि राहुल गांधी के वहाँ मौजूद होने से शांति भंग होने का ख़तरा था इसलिए उन्हें सीआरपीसी की धारा 151 के तहत हिरासत में ले लिया गया था.
गिरफ़्तार करने के बाद उन्हें कासना पुलिस स्टेशन ले जाया गया. उनके साथ कांग्रेस महासचिव और उत्तरप्रदेश के प्रभारी दिग्विजय सिंह, सांसद राज बब्बर, केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद और राज्य सभा सांसद परवेज़ हाशमी भी थे.
रिहाई के बाद दिग्विजय सिंह ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा,''हमलोगों ने कोई मुचलका नहीं दिया.हमलोग गांव वापस जाना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने हमें दिल्ली में लाकर छोड़ दिया.''
कांग्रेस नेता रीता बहुगुणा जोशी और कई अन्य कांग्रेस नेताओं ने इस कार्रवाई की निंदा की है. रीता बहुगुणा जोशी ने पत्रकारों को बताया कि राहलु गांधी को हिरासत में लेने के बावजूद कांग्रेस का धरना रुकेगा नहीं और गुरुवार को कांग्रेस भट्टा परसौल गांव में विशाल रैली करेगी.
राहुल गांधी ने कहा था कि अगर उत्तरप्रदेश सरकार ने उनकी मांगे नहीं पूरी की तो बृहस्पतिवार को धरना स्थल पर कांग्रेस एक सभा करेगी,लेकिन उससे पहले ही उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया.
<link type="page"><caption> राहुल ने कहा - 'लोगों की दशा देख हिंदुस्तानी होने पर शर्मिंदगी हो रही है'</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2011/05/110511_rahul_update_skj.shtml" platform="highweb"/></link>
उनका कहना था कि 500 पुलिसकर्मियों ने छावनी की तरह पूरे गांव को घेर रखा है लेकिन उनके साथ अनेक कांग्रेस कार्यकर्ता अपना धरना प्रदर्शन जारी रखेंगे.
उधर बुधवार भारतीय समयानुसार मध्यरात्रि में उत्तर प्रदेश के कैबिनट सचिव शशांक शेखर सिंह ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया और मुख्यमंत्री मायावती का बयान पढ़ कर सुनाया.
सिंह ने मायावती के हवाले से कहा, "केंद्र सरकार ने घोषणा की थी कि भू-अधिग्रहण का नया क़ानून लाया जाएगा पर इस संबंध में उन्होंने कोई भी कार्रवाई नहीं की है. यदि कांग्रेस किसानों के हित की बात करती है तो उसे विधेयक लाने से किसने रोका है. यदि आगामी सत्र में कांग्रेस ये का़नून नहीं बनाती तो बहुजन समाज पार्टी संसद का घेराओ करके उसे ऐसा करने पर मजबूर करेगी."
कैबिनेट सचिव का दावा था, "ग्रेटर नोएडा में भू-अधिग्रहण को लेकर कोई विवाद ही नहीं है. वहाँ पूरी प्रक्रिया नियमानुसार हुई थी. किसानों में कोई अंसतोष नहीं है और कांग्रेस की पूरी कार्रवाई किसानों को उकसाने की कोशिश थी. हम अपील करते हैं कि जनहित में सभी पार्टिया संयम बरतें. यदि शांति भंग करने का प्रयास होगा तुरंत कार्रवाई की जाएगी."
चकमा दे भट्टा परसौल पहुँचे राहुल
राहुल गांधी बुधवार को अचानक तनावग्रस्त भट्टा परसौल गांव में पुलिस को चकमा देकर पहुँच गए थे और मायावती सरकार कि भूमि अधिग्रहण नीति के खिलाफ धरने पर बैठ गए थे.
राहुल गांधी ने किसानों के ख़िलाफ़ वहाँ हाल में गोलीबारी के मामले की न्यायिक जांच की मांग की और कहा है कि किसानों की मांग जायज़ है. उन्होंने कहा कि जब तक किसानों की मांगे नहीं मानी जाती वो धरने पर ही बैठे रहेंगे.
उनके धरने पर बैठने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर कृषि भूमि अधिग्रहण का मसला फिर सुर्खियों में आ गया.

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कुछ देर बाद कांग्रेस महासचिव और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी वहाँ पहुंचे और दोनों नेता किसानों के साथ धरने पर बैठ गए.
राहुल गांधी ने किसानों से बात करते हुए कहा, "यहाँ जो हुआ है उसे देखकर मुझे अपने हिंदुस्तानी होने पर शर्मिंदगी होती है. यहाँ राज्य सरकरा ने अपने ही लोगों पर अत्याचार किया है. मैं आपको बताना चाहता हूँ कि जब तक आपकी माँगें मानी नहीं जाती तब मैं आपके साथ हूँ. जब तक आपका काम पूरा नहीं होता तब तक कांग्रेस पार्टी आपके साथ खड़ी रहेगी."
कई महिलाएं तो अपना दर्द सुनाते सुनाते दहाड़ मार कर रो रही थीं. इनके घर वाले गोलीकांड में मारे गए अथवा गायब हैं.
धारा 144 हटाई, अब फिर लागू
पिछले शनिवार को किसानों और पुलिस के बीच संघर्ष में ज़िलाधीश घायल हो गए थे और तीन लोगों की मौत हो गई थी.
इसके बाद प्रशासन ने धारा 144 के तहत चार या ज़्यादा लोगों के एकत्र होने पर पाबंदी लगा रखी थी. लेकिन राहुल गाँधी के इस तरह अचानक पहुँच जाने से हैरान प्रशासन ने धारा 144 हटाने की घोषणा कर दी.
उत्तर प्रदेश सरकार ने बिना अनुमति धरना प्रदर्शन पर रोक लगा रखी है. उत्तर प्रदेश सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि राहुल गांधी ने धरने की अनुमति नही ली थी.
लेकिन देर रात को घटे घटनाक्रम के बाद वहाँ दोबारा धारा 144 लागू कर दी गई है. लेकिन कांग्रेस का कहना है कि वह ग्रेटर नोएडा के उस इलाक़े में गुरुवार को दोबार रैली करेगी.
उधर गाज़ियाबाद और आसपास के क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी का भी विरोध प्रदर्शन का कार्यक्रम है. स्पष्ट है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राजनीति गर्मा गई है और अगले कुछ दिनों तक आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलेगा.
































