आज से हरिद्वार में अनशन, लोकपाल बैठक का बहिष्कार

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दिल्ली में प्रवेश की अनुमति नहीं मिलने के बाद योग गुरू बाबा रामदेव ने सोमवार से हरिद्वार में ही अपना अनशन जारी रखने का एलान किया है.
वहीं सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे के नेतृत्व वाले गुट ने रामलीला मैदान में हुए कथित पुलिस दमन के विरोध में लोकपाल विधेयक पर बनी साझा समिति की बैठक के बहिष्कार की घोषणा की है.
साथ ही अन्ना हज़ारे ने बाबा रामदेव के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए आठ जून को दिल्ली में एक दिन के अनशन का एलान किया है.
समाचार माध्यमों के अनुसार एक वकील अजय अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है जिसमें बाबा रामदेव के साथ सरकार की बातचीत और फिर उनके ख़िलाफ़ हुई पुलिस कार्रवाई पर सरकार से श्वेत पत्र की मांग की गई है.
ज़्यादातर विपक्षी दलों ने रामलीला मैदान में शनिवार देर रात को बाबा रामदेव और उनके समर्थकों के ख़िलाफ़ हुई कार्रवाई को अनुचित ठहराया है.
आज से अनशन
रविवार को एक बार फिर दिल्ली का रुख़ कर रहे बाबा रामदेव को उत्तर प्रदेश के मुज़्ज़फ़रनगर से ही वापस भेज दिया गया.
उन्होंने कहा कि उत्तरप्रदेश में उनके प्रवेश पर लगी रोक संभवत: एक प्रशासनिक फ़ैसला है.
उनका कहना था, “मुख्यमंत्री मायावती बैंग्लोर में हैं और वो सोमवार को लौटेंगी. उन्होंने रामलीला मैदान में हुई घटना की निंदा की है.”
हरिद्वार में पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “मैं दिल्ली नहीं जा सकता लेकिन देश को लूटने वाले वहां बैठते हैं.”
<link type="page"><caption> 'एनकाउंटर की साज़िश थी'</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2011/06/110605_latest_ramdev_as.shtml" platform="highweb"/></link>
सरकार पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि यदि शासक ईमानदार होते तो उन्हें या अन्ना हज़ारे को भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ सड़कों पर नहीं उतरना पड़ता.
रामदेव का कहना था यदि दिल्ली जाने की अनुमति मिली तो वो भी भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अन्ना हज़ारे के साथ अनशन पर बैठेंगे.

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अन्ना हज़ारे की ओर से इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई है कि वो रामदेव के साथ एक ही मंच पर बैठेंगे या नहीं.
अन्ना भी उतरे
इसके पहले अन्ना हज़ारे ने रामलीला मैदान पर हुई पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि आठ जून को वे और उनके समर्थक एक दिन के अनशन पर बैठेंगे.
साथ ही लोकपाल विधेयक पर बनि समिति के सदस्य शांति भूषण ने कहा है कि विरोध स्वरूप लोकपाल की संयुक्त ड्राफ़्टिंग समिति की छह जून की बैठक में नागरिक समाज के सदस्य हिस्सा नहीं लेंगे. उन्होंने कहा कि दोबारा बैठक होगी तो इसका सीधा प्रसारण करना होगा.
दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में अन्ना ने कहा, "ये लोकशाही पर हमला है. लगता है कि भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ फिर से देश में बड़ा आंदोलन शुरु करना होगा. भ्रष्टाचार ख़त्म करने को लेकर सरकार उदासीन है."
जब अन्ना से पूछा गया कि क्या बाबा रामदेव भी उनके साथ अनशन पर बैठेगें तो उन्होंने कि अभी कुछ मुद्दें हैं जिन पर चर्चा के बाद ही फ़ैसला किया जाएगा.
<link type="page"><caption> कैसे हुई कार्रवाई</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2011/06/110605_ramdev_gallery_as.shtml" platform="highweb"/></link>
<link type="page"><caption> अनशन पर बेताल का सवाल</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2011/06/110522_yogendrayadav_ramdevdrama_akd.shtml" platform="highweb"/></link>
<link type="page"><caption> क्या संभव है रामदेव की मांगों पर अमल?</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2011/06/110605_ramdev_demands_us.shtml" platform="highweb"/></link>
सुप्रीम कोर्ट में याचिका
इस बीच सुप्रीम कोर्ट में एक वकील अजय अग्रवाल ने चौबीस घंटों के अंदर सरकार से श्वेत पत्र की मांग करते हुए एक याचिका दायर की है.

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इसमें सरकार और बाबा रामदेव के बीच हुई बातचीत से लेकर उनके ख़िलाफ़ हुई कार्रवाई का संपूर्ण ब्यौरा मांगा गया है.
याचिका में सरकार के मंत्रियों—कपिल सिब्बल, सुबोधकांत सहाय और पवन कुमार बंसल—पर रामदेव के ख़िलाफ़ हुई कार्रवाई को उचित ठहराने पर बयान देने से भी रोक लगाने की मांग की गई है क्योंकि याचिकाकर्ता के अनुसार इससे लोगों का ग़ुस्सा और भड़क सकता है.
अग्रवाल ने अपनी याचिका में रामलीला मैदान में हुई कार्रवाई को संविधान की धारा 14, 19 और 21 के तहत मूलभूत अधिकारों का उल्लंघन कहा है.
बाबा रामदेव के मामले पर विपक्षी दलों ने भी सरकार को आड़े हाथों लिया है.
भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि ये दिन इतिहास में “काले अध्याय” की तरह याद किया जाएगा.
लालकृष्ण आडवाणी ने संसद का आपातकालीन सत्र बुलाने की मांग की है.
वामपंथी दलों ने भी मध्य रात्रि में रामदेव के शिविर पर हुई पुलिस कार्रवाई को “ग़ैरलोकतांत्रिक” कहा है.












