देर रात अन्ना की टीम और कमिश्नर की बैठक

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अन्ना हज़ारे की रिहाई को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच देर रात अन्ना की टीम के सदस्यों और दिल्ली के पुलिस आयुक्त के बीच बैठक हुई है.
बैठक में क्या बातचीत हुई इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है लेकिन बैठक के बाद किरन बेदी ने संवाददाताओं से कहा कि वो इस बारे मे सुबह पूरी जानकारी देंगे.
पुलिस आय्कुत के घर के बाहर किरन बेदी ने कहा, '' हम मसले को सुलझाना चाहते थे. बैठक हुई है लेकिन हम सुबह में ही इसके बारे में आपको जानकारी देंगे.''
पुलिस आयुक्त के साथ बैठक में अन्ना की टीम से किरन बेदी, प्रशांत भूषण, मनीष सिसौदिया और अरविंद केज़रीवाल थे.
माना जाता है कि इस बैठक में अन्ना की रिहाई और अनशन की अवधि को लेकर बातचीत हुई है.
बुधवार को सरकार के लोकपाल विधेयक का विरोध कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे के समर्थकों ने इंडिया गेट से जंतर-मंतर तक जुलूस निकाला है.
हज़ारे को रिहा करने के आदेश मंगलवार रात ही जारी कर दिए गए थे मगर उसके बाद भी उन्होंने ये कहते हुए जेल से बाहर आने से मना कर दिया कि जब तक अनशन पर लगी शर्तें नहीं हटतीं वह जेल से बाहर ही नहीं आएँगे.
उसके बाद से शुरू हुई चर्चा देर शाम तक जारी है जहाँ दिल्ली पुलिस ने अपनी ओर से रामलीला मैदान देने की तो पेशकश की है मगर ये विरोध प्रदर्शन कितने समय तक चलेगा इस पर दोनों पक्ष अब भी सहमत नहीं हो पाए हैं.
इस बीच हज़ारों लोग तिरंगा लेकर बुधवार शाम चार बजे इंडिया गेट पहुँचे और वहाँ से उन्होंने जंतर-मंतर की ओर मार्च शुरू किया.
लोगों का हुजूम वहाँ उमड़ा जिसे देखकर प्रशासन को चिंता होना स्वाभाविक था मगर इस विरोध प्रदर्शन की अब तक की परंपरा को बरक़रार रखते हुए जुलूस क़ानून-व्यवस्था के दायरे में ही रहा. लोग नारेबाज़ी करते रहे और उत्साह से आगे बढ़ते रहे.
उधर हज़ारों की संख्या में हज़ारे प्रदर्शक तिहाड़ जेल के बाहर इस इंतज़ार में मौजूद हैं कि उनके निकलने पर वे उनका स्वागत करेंगे.
बातचीत जारी
मगर हज़ारे की सहयोगी किरण बेदी ने शाम को जेल के बाहर मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कहा, "जहाँ अनशन होना है उस पर अंतिम निर्णय होना बाक़ी है दिल्ली पुलिस ने अब रामलीला मैदान देने की पेशकश की है मगर अभी सरकार के साथ बातचीत जारी है."
उन्होंने बताया, "वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की अन्ना से मुलाक़ात हुई है. ये आंदोलन कितने दिनों तक चलेगा उस पर सहमति नहीं बन पाई है क्योंकि हमने 30 दिन माँगे हैं और उन्होंने कम दिन दिए हैं."
बेदी ने बताया कि पुलिस अन्ना हज़ारे के अनशन के साथ ही रामलीला मैदान से विरोध प्रदर्शन भी ख़त्म करवाना चाहती है मगर अन्ना समर्थकों की माँग है कि धरना-प्रदर्शन के लिए ज़्यादा समय दिया जाना चाहिए.
उनके अनुसार दिल्ली पुलिस को अपनी सरकार से आदेश लेना होगा जिसके बाद ही फ़ैसला होगा.
तिहाड़ से अन्ना हज़ारे के साथ अरविंद केजरीवाल भी मौजूद हैं, लेकिन उनके बाक़ी सहयोगियों को रिहा कर दिया गया है.
अन्ना के जेल से बाहर न आने के फ़ैसले के बाद छत्रसाल स्टेडियम में हिरासत में रखे गए अन्ना समर्थक भी रिहाई के बावजूद वहाँ से हटने को तैयार नहीं हैं.
संसद में बहस
दूसरी ओर मंगलवार को संसद में हंगामा करने वाली विपक्षी पार्टियों ने हज़ारे को अनशन न करने देने के सरकार के फ़ैसले पर सवाल उठाए.

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मगर प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने संसद में दिए बयान में हज़ारे की गिरफ़्तारी का बचाव किया.
प्रधानमंत्री ने अपने बयान में कहा है कि अन्ना हज़ारे ने दिल्ली पुलिस की शर्तों को मानने से इनकार कर दिया था, इसलिए उन्हें गिरफ़्तार करना पड़ा.
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार मज़बूत लोकपाल के पक्ष में है, लेकिन इसकी एक प्रक्रिया है और क़ानून बनाने का हक़ संसद को है.
उधर राज्य सभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि वे प्रधानमंत्री के बयान से निराश हैं. उन्होंने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के मामलों को छिपाने में लगी है.
अरुण जेटली ने कहा, "देश के लोगों का सरकार पर से भरोसा उठ गया है. इसलिए देश का युवा सड़कों पर उतर आया है."
दूसरी ओर लोकसभा में भारी शोर-शराबे के बीच विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने सरकार पर आरोप लगाया कि वो असंतुलित व्यवहार कर रही है.
उन्होंने कहा कि सरकार ने संसदीय प्रक्रियाओं को दरकिनार करने का काम किया है. सुषमा ने पूछा कि अन्ना की टीम से बात करने की पहल किसने की.
वहीं गृह मंत्री पी चिदंबरम् ने कहा है कि क़ानून बनाने का हक़ सिर्फ़ और सिर्फ़ संसद का है इसलिए अन्ना हज़ारे की टीम की ये बात नहीं मानी जा सकती कि उनका जनलोकपाल विधेयक जस का तस स्वीकार किया जाना चाहिए.
































