अन्ना का रास्ता ठीक नहीं: मनमोहन

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विपक्ष के दबाव के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अन्ना हज़ारे के मामले में लोकसभा और राज्य सभा में बयान दिया है और कहा है कि अन्ना हज़ारे ने जो रास्ता चुना है, वो लोकतंत्र के लिए नुक़सानदेह है.
राज्य सभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने प्रधानमंत्री के बयान की कड़ी आलोचना की है और कहा है कि सरकार अपने भ्रष्टाचार को छिपाने की कोशिश कर रही है.
प्रधानमंत्री ने अपने बयान में कहा है कि अन्ना हज़ारे ने दिल्ली पुलिस की शर्तों को मानने से इनकार कर दिया था, इसलिए उन्हें गिरफ़्तार करना पड़ा.
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार मज़बूत लोकपाल के पक्ष में है, लेकिन इसकी एक प्रक्रिया है और क़ानून बनाने का हक़ संसद को है.
प्रधानमंत्री के बयान के बीच लोकसभा में शोर-शराबा होता रहा. शोर-शराबे और हंगामे के बीच प्रधानमंत्री ने अन्ना हज़ारे से जुड़े घटनाक्रमों का क्रमवार ब्यौरा दिया.
उन्होंने बताया कि लोकपाल विधेयक के लिए संयुक्त मसौदा समिति का गठन किया गया था और अन्ना हज़ारे के टीम को सदस्यों को अपनी बात रखने का मौक़ा भी दिया गया.
संशोधन
इस समय लोकपाल विधेयक स्थायी समिति के पास है और अन्ना हज़ारे की टीम अपनी बात वहाँ रख सकती है. स्थायी समिति चाहे तो विधेयक में संशोधन कर सकती है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि अन्ना हज़ारे और समर्थक चाहते हैं कि जनलोकपाल विधेयक को संसद में पेश करना चाहिए और ऐसा नहीं हुआ तो वे आमरण अनशन करेंगे.
मनमोहन सिंह ने अपने बयान में ये बताया कि कैसे दिल्ली पुलिस के पास अन्ना की टीम ने अनशन का आवेदन किया था और किन परिस्थितियों में दिल्ली पुलिस ने अनशन की अनुमति नहीं दी.
उन्होंने कहा कि अन्ना अब ये चाहते हैं कि उन्हें अनशन की अनुमति दी जाए, वे तभी तिहाड़ से जाएँगे.
नुक़सानदेह
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में सभी को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन अन्ना ने जो रास्ता चुना है, वो उचित नहीं है और ये संसदीय लोकतंत्र के लिए नुक़सानदेह साबित हो सकता है.

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उन्होंने कहा कि क़ानून बनाने का अधिकार संसद को ही है.
प्रधानमंत्री ने कहा, "भारत विश्व के मंच पर आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है, लेकिन कुछ शक्तियाँ ऐसा नहीं चाहती. हमें ऐसी शक्तियों के हाथ में नहीं खेलना चाहिए."
मनमोहन सिंह ने कहा कि सांसदों को मिलकर एक मज़बूत लोकपाल पर काम करना चाहिए, ताकि इसे जल्द से जल्द पास किया जा सके.
आलोचना
राज्य सभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा है कि वे प्रधानमंत्री के बयान से निराश हैं. उन्होंने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के मामलों को छिपाने में लगी है.
अरुण जेटली ने कहा, "देश के लोगों का सरकार पर से भरोसा उठ गया है. इसलिए देश का युवा सड़कों पर उतर आया है."
उन्होंने प्रधानमंत्री से पूछा कि क्या आपकी सरकार के पास भ्रष्टाचार से लड़ने की इच्छाशक्ति है? उन्होंने कहा कि सत्ता के मद में चूर सरकार भ्रष्टाचार से नहीं लड़ सकती.
अरुण जेटली ने कहा कि देश की जनता को प्रदर्शन करने का अधिकार है और सरकार ने उसे कुचलने का काम किया है.
उन्होंने सरकारी लोकपाल की भी आलोचना की और कहा कि सरकारी लोकपाल विधेयक सरकार नियंत्रित है.
अरुण जेटली ने कहा कि अन्ना हज़ारे के अनशन पर जो शर्तें लगाई गईं थी, वो ग़लत थी.
































