कैसे सुधरा आईएस समर्थक बच्चा

    • Author, मैथ्यू प्राइस
    • पदनाम, मुख्य संवाददाता, बीबीसी रेडियो 4 टुडे

कोई बच्चा किस बात से प्रेरित होकर अपनी कक्षा में खड़ा होकर अपने दोस्तों से यह कह सकता है कि वह तथाकथित इस्लामिक स्टेट की विचारधारा से सहमत है?

हारून.

मैं एक ऐसे ही बच्चे से मिला जिसकी पहचान कट्टरपंथी बनने की आशंका वाले व्यक्तियों की पहचान कर रोकथाम करने के लिए शुरू की गई परियोजना यानी के प्रिवेंट के अधिकारियों ने की है.

दस साल के इस बच्चे का चेहरा गोल है. लगता है कि उसकी आंखें हमेशा कुछ खोजती रहती हैं. इस बच्चे को बुद्धिमान कहा जा सकता है, क्योंकि वह सवाल बहुत करता है.

इस बच्चे ने पश्चिम लंदन के अपने स्कूल के अपनी क्लास में खड़े होकर यह घोषणा की कि वह इस्लामिक स्टेट की विचारधारा से सहमत है.

सुरक्षा कारणों से हम इस बच्चे का नाम सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं. इसलिए हम उसे हारून कहकर बुलाते हैं. हारून लंदन में अपनी माँ और भाई-बहनों के साथ रहता है.

हारून कहता है, ''मैंने पेरिस हमले की ख़बरें देखीं. जैसे ही यह हुआ मैं कंप्यूटर के सामने बैठ गया. मैंने गूगल पर आईएसआईएस सर्च किया, तो यह बीबीसी न्यूज़ पर आया. थोड़ा और नीचे जाने पर चैनल 4 पर खिलाफत करते बच्चे नज़र आए. यह देखकर मुझे ताज्जुब हुआ. इसके बाद मैंने दूसरी वेबसाइटें देखीं.''

ये वही अन्य वेबसाइटें थीं, जिन्होंने हारून का परिचय आईएस की बर्बरता से कराया. हारून के मामले को देख रहे कार्यकर्ताओं का मानना है कि ये वेबसाइटें उसे कट्टरपंथी बनाने के लिए काफी थीं.

पेरिस पर हुआ हमला

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हारून जब आईएस की बर्बरता वाले वीडियो का वर्णन करता है, तो उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं आता. वह वीडियो का वर्णन करते हुए रुकता भी नहीं है. लगातार बताता रहता है.

प्रिवेंट टीम को पूरे देश में इस तरह का कोई और मामला नहीं मिला. यह टीम हारून की उम्र वाले बच्चों, किशोरों और व्यस्कों के साथ काम करती है.

2012 से अबतक इस टीम ने एक हज़ार से अधिक मामलों की पड़ताल की है. इनमें से बहुत से मामले इस्लामी कट्टरपंथी विचारधारा से जुड़े थे. वहीं पिछले साल के मामलों में करीब एक चौथाई मामले दक्षिणपंथी चरमपंथ के थे.

हारून ने बताया कि सप्ताहांत में वो इस तरह के वीडियो देखता था, क्योंकि उस समय घर पर कोई नहीं होता था. हारून इस तरह के वीडियो में रुचि लेने वालों में अपने स्कूल में अकेला नहीं था.

माना जाता है कि हारून जिन वीडियो को देखता था, उनके पीछे अबू रामयश के नाम से जाने जाने वाले सिद्धार्थ धर का हाथ था.
इमेज कैप्शन, माना जाता है कि हारून जिन वीडियो को देखता था, उनके पीछे अबू रामयश के नाम से जाने जाने वाले सिद्धार्थ धर का हाथ था.

उसके मुताबिक़ उसके स्कूल के बहुत से बच्चे आईएस के बारे में जानते हैं, क्योंकि उनमें से अधिकतर के परिवार का नाता मध्य-पूर्व से है.

उसने बताया कि स्कूल में आठ बच्चों का एक समूह था, जो अक्सर इस बारे में बात किया करता था. वो क्लासरूम में भी बैठकर आईएस के वीडियो खोजा करते थे.

हारून अपने स्कूल में अब अजनबी की तरह है. अब वह इस बारे में बहुत बात नहीं करता. वो कहता है कि अभी भी स्कूल में कुछ बच्चे उसे आतंकवादी कहते हैं. ऐसा कहने वालों में मुस्लिम और ग़ैर मुस्लिम दोनों शामिल हैं.

हारून ने जब अपने क्लासरूम में यह घोषणा की कि वह आईएस का समर्थक है. इसके बाद मरियम नाम की एक महिला उसके घर गई.

हारून ने बताया, '' एक दिन मेरी माँ ने मुझसे केवल इतना ही बताया कि कोई व्यक्ति हमारे घर आ रहा है. मैंने सुना कि मरियम आ रही हैं. जब मरियम ने आने की वजह बताई तो मैं बहुत डर गया. मुझे लगा कि मैं जेल जाने वाला हूं.''

माउस.

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मरियम बताती है कि उन्हें हारून का विश्वास जीतने में समय लगा. कुछ बैठकों के बाद ही हारून खुला और इन सब बातों पर बात की.

उन्होंने इस केस पर क़रीब एक साल काम किया. हारून ने उन्हें वो वेबसाइटें भी दिखाईं, जिनको वो देखता था. दोनों ने वीडियो पर चर्चा भी की.

मरियन ने हारून से उन चीजों की लिस्ट बनाने को कहा, जिनसे वो खुश होता है, जिनमें उसकी रुचि है और जिनसे वो डरता है.

खुश रखने वाली चीजों में उसने परिवार और इस्लाम को रखा और रुचि वाले में युद्ध को. आईएसआईएस और स्कूल को उसने डरने वाला बताया.

प्रिवेंट ने हारून के साथ काम करना अब बंद कर दिया है. लेकिन हारून ने अब एक चीज सीखी है कि बुरी चीजों और बुरी साइटों पर नहीं जाना है.

मोसुल में आईएस का एक लड़ाका.

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हारून ने बताया, '' मरियम ने मुझे इसके प्रभाव के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि इसका प्रभाव कैसे ठीक नहीं होगा. जैसे यह कि अगर तुम लगातार यह सब देखते रहोगे तो तुम्हारा ब्रेनवाश होगा. ऐसे में तुम या कोई और आईएसआईएस में शामिल भी हो सकता है. इससे तुम परेशानी में पड़ जाओगे और तुमको जेल जाना पड़ेगा.''

हारून क्या बन सकता था.

इस सवाल पर मरियम कहती हैं, '' हम यह नहीं कह रहे हैं कि वह आतंकी बन जाता. हम यह कह रहे हैं कि वह अति संवेदनशील था.''

मरियम और उनकी टीम ने अब उसे उस जगह की पहुंच दे दी है, जिसे वो सीखने के लिए सुरक्षित जगहें कहते हैं. इसमें उसके समुदाय के लोग, स्कूल और अन्य गतिविधियां शामिल हैं, जो कि उसे दुनिया के बारे में पता लगाने में मदद करती हैं.

हारून कहता है कि वह वकील या अकाउंटेंट बनना चाहता है. वह मुस्कराते हुए कहता है वह पत्रकार भी बनना चाहता है.

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