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नेपाल ने कहा, कुछ भारतीय मीडिया के ख़िलाफ़ कर सकता है 'कार्रवाई'
- Author, सुरेंद्र फ़ुयाल
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, काठमांडू, नेपाल
- पढ़ने का समय: 4 मिनट
नेपाल सरकार ने कहा है कि वो 'फर्जी और मनगढ़ंत' ख़बरें प्रसारित करने के लिए कुछ भारतीय मीडिया चैनलों के ख़िलाफ 'राजनीतिक और क़ानूनी' कार्रवाई करेगी.
हाल में नेपाल के लिए चीनी राजदूत के कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाक़ात की थी जिससे जुड़ी ख़बरें इन चैनलों पर प्रसारित की गई थीं.
नेपाल का कहना है कि नेपाल के लिए चीनी राजदूत हाओ यांग छी ने हाल में काठमांडू में नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं से मुलाक़ात कर बातचीत की थी. भारतीय मीडिया का एक वर्ग राजनयिक स्तर पर उनकी बातचीत का मज़ाक़ उड़ाता रहा है.
गुरुवार शाम को नेपाली केबल ऑपरेटरों ने ये कहते हुए भारतीय टेलीविज़न चैनलों का नेपाल में प्रसारण रोक दिया कि "इनमें नेपाली प्रधानमंत्री के बारे में आपत्तिजनक ख़बरें प्रसारित की जा रही हैं."
मैक्स टीवी नाम के एक ऑपरेटर के ध्रुव शर्मा ने मीडिया को बताया कि "कुछ भारतीय चैनलों पर प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और चीनी राजदूत के बारे में अपमानजनक कन्टेन्ट प्रसारित किया जा रहा है."
नेपाल सरकार की चेतावनी
नेपाल सरकार के प्रवक्ता डॉक्टर युवराज खतिवडा ने गुरुवार को चेतावनी दी है कि भारतीय मीडिया में असंवेदनशीत तरीक़े से इस तरह की ख़बरें प्रसारित किए जाने पर उनके ख़िलाफ़ कड़ी 'राजनीतिक और क़ानूनी कार्रवाई' की जा सकती है.
एक संवाददाता सम्मेलन में खतिवडा ने कहा कि उनकी सरकार फ्री मीडिया मे यकीन करती है. उन्होंने कहा, "सरकार मीडिया पर किसी तरह की कोई पाबंदी लगाना नहीं चाहती. लेकिन हम चाहते हैं कि मीडिया अनुशासित हो."
भारतीय मीडिया के एक हिस्से में नेपाल को लेकर नकारात्मक कवरेज की तरफ इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि नेपाल नहीं चाहता कि विदेशी मीडिया "देश की संप्रभुता, राष्ट्रीय एकता और नेपाली लोगों के सम्मान को ठेस पहुंचाए."
खतिवाडा ने किसी ख़ास मीडिया संस्थान का नाम नहीं लिया लेकिन कहा कि इस तरह की कवरेज जारी रही तो नेपाल सरकार को उन्हें ऐसा करने से रोकना होगा और उनके ख़िलाफ़ कड़े 'राजनीतिक और कूटनीतिक कदम' उठाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा.
उन्होंने कहा कि "ऐसी सूरत में सरकार को राजनीतिक और क़ानूनी रास्ते तलाशने होंगे."
नेपाल का मौजूदा संकट
गुरुवार शाम राजधानी काठमांडू में नेपाल के लिए चीनी राजदूत हाओ यांग छी ने कम्युनिस्ट पार्टी के चेयरमैन पुष्प कमल दहल प्रचंड के साथ बेहद अहम बैठक की थी.
इससे पहले सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी के भीतर गहराते मतभेद के बीच चीनी राजदूत ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, पूर्व प्रधानमंत्री झालानाथ खनाल और माधव कुमार नेपाल समेत पार्टी के दूसरे वरिष्ठ नेताओं से मुलाक़ात की थी.
सत्ताधारी पार्टी की स्थायी समितियों के अधिकांश सदस्यों ने कोविड-19 महामारी से जूझने के प्रधानमंत्री के तरीके और लिपुलेख को लेकर हुए विवाद के बाद भारत के साथ तनावपूर्ण संबंधों को लेकर असंतोष जताया था. इन मुद्दों को लेकर सदस्यों ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफ़े की मांग की जिसके बाद पार्टी के भीतर संकट गहरा गया था.
ओली ने इस्तीफ़ा देने से इनकार कर दिया लेकिन इसके बाद ओली और प्रचण्ड के बीच अनौपचारिक बातचीत का दौर शुरू हुआ. हालांकि इस राजनीतिक संकट का कोई हल नहीं निकल पाया.
हिमालय की पहाड़ियों में बसा नेपाल, भारत और चीन के साथ अपनी सीमा साझा करता है. ऐसे में चीन ने वहां कूटनीतिक तौर पर अहम भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है.
चीन की कोशिश रही है कि नेपाल की अलग-अलग कम्युनिस्ट पार्टियां आपस में हाथ मिला लें और उसकी ये कोशिश तब सफल हुई जब आज से करीब दो साल पहले नेपाल की दो अहम कम्युनिस्ट पार्टियां, मार्क्सवादी-लेनिनवादी और माओवादी ने चुनावों से ठीक पहले हाथ मिला लिया और संसद में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी.
लेकिन हाल में दिनों में चीनी राजदूत हाओ यांग छी को भारत में शंका की नज़र से देख जाने लगा और मीडिया के एक हिस्से में वरिष्ठ नेपाली नेताओं से उनकी मुलाक़ात का मज़ाक बनाया गया. सोशल मीडिया में भी ऐसी पोस्ट देखने को मिलीं.
भारतीय मीडिया को लेकर चिंता
नेपाल के कूटनीतिज्ञ और वरिष्ठ पत्रकार इस पूरे मसले को लेकर चिंता जताते हैं. उनका मानना है कि इस तरह के कवरेज का असर नेपाल और भारत के आपसी संबंधों और नेपालियों और भारतीयों के रिश्तों पर पड़ेगा.
नेपाली पत्रकारों के संगठन नेपाल पत्रकार महासंघ ने भारत में नेपाल से जुड़ी ख़बरों के नकारात्मक कवरेज को लेकर गुरुवार को एक बयान जारी किया और कड़े शब्दों में इस तरह की कुछ रिपोर्टों को "सनसनीखेज पत्रकारिता का उदाहरण" बताया.
पत्रकार संघ ने भारतीय मीडिया से ज़िम्मेदार और निष्पक्ष रहने की अपील की और कहा कि वो सार्वभौमिक प्रेस स्वतंत्रता के "सिद्धांतों का मखौल न उड़ाएं."
नेपाली प्रधानमंत्री के सलाहकार बिष्णु रिमाल का कहना है कि "नेपाली सरकार और नेपाली प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ भारतीय मीडिया में आ रही ख़बरें और टिप्पणियां आपत्तिजनक हैं. हम इसकी निंदा करते हैं. इस तरह की ख़बरें पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों के अनुरूप नहीं हैं."
वहीं प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के प्रेस एडवाइज़र सूर्या थापा ने कहा है कि "प्रधानमंत्री ओली को इस बात की जानकारी है कि उनके ख़िलाफ़ कुछ भारतीय चैनलों में ग़लत ख़बरें दिखाई जा रही हैं."
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