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श्रीलंका का हर कोना अंधेरे में डूबा, सात घंटों तक ग़ायब रही बिजली
श्रीलंका के प्रमुख ऊर्जा संयंत्र के फेल हो जाने से सोमवार को पूरा श्रीलंका अंधेरे में डूब गया.
पूरे देश में क़रीब सात घंटे तक बिजली गुल रही.
ऊर्जा मंत्री डलास अलाहापेरुमा ने बताया कि राजधानी कोलंबो के बाहरी इलाक़े में स्थित केरावलपीटिया स्थित बिजली घर में तकनीकी ख़राबी आ जाने के कारण सोमवार को पूरे देश में बिजली की आपूर्ति ठप हो गई.
क़रीब सात घंटे बाद राजधानी कोलंबो में बिजली आपूर्ति बहाल हो गई लेकिन देश के कुछ हिस्से अब भी अंधेरे में हैं.
मार्च 2016 के बाद से यह दूसरा सबसे बड़ा व्यवधान रहा है जब पूरा देश क़रीब सात घंटे तक अंधेरे में रहा है. इससे पहले मार्च 2016 में पूरे देश में क़रीब आठ घंटे तक के लिए बिजली आपूर्ति ठप हो गई थी.
सार्वजनिक उपयोगिता नियामक का कहना है कि यह परेशानी क्यों हुई इसके कारणों की जांच की जाएगी और सरकार के एकाधिकार वाले सीलोन बिजली बोर्ड को इस संबंध में कारण स्पष्ट करने के लिए तीन दिन का समय दिया जाएगा.
बिजली आपूर्ति ठप हो जाने के कारण देश में अफ़रा-तफरी का माहौल रहा.
कोलंबो की सड़कों पर ना तो ट्रैफ़िक सिग्नल काम कर रहे थे और ना स्ट्रीट लाइट्स.
ऐसे में पुलिस को लोगों को संभालने में काफ़ी मशक्क़त करनी पड़ी. बिजली ना होने से पानी की आपूर्ति पर भी असर पड़ा. हालांकि अस्पताल और दूसरी बेहद-ज़रूरी जगहों पर पावर-बैक-अप की व्यवस्था रही. ज़्यादातर जगहों पर लोग जनरेटर का इस्तेमाल करते दिखे.
वहीं कोरोना वायरस की महामारी के कारण हवाई अड्डा पहले से ही बंद है. श्रीलंका अपनी कुल बिजली की मांग की आधे से अधिक आपूर्ति थर्मल पावर के ज़रिए पूरा करता है.
केरावलपीटिया स्थित बिजली घर की क्षमता 300 मेगावॉट की है जिससे देश की 12 फ़ीसदी ऊर्जी की आपूर्ति होती है.
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