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माली: पश्चिमी अफ़्रीकी देश में सैनिकों ने क्यों किया तख़्तापलट
पश्चिमी अफ़्रीकी देश माली में तख़्तापलट के बाद सेना ने कहा है कि जल्द ही नए चुनाव कराए जाएँगे और इस बीच अस्थायी रूप से एक सरकार का गठन किया जाएगा.
जिन सैनिकों ने तख़्तापलट किया, उसके प्रवक्ता का कहना है कि देश को अव्यवस्था के दौर में जाने से बचाने के लिए उन्होंने ऐसा किया.
माली के राष्ट्रपति इब्राहिम बुबाकर केटा ने मंगलवार रात को त्यागपत्र दे दिया और कहा कि सत्ता में बने रहने के लिए वो ख़ून नहीं बहाना चाहते.
अफ़्रीकी संघ, क्षेत्रीय नेताओं और संयुक्त राष्ट्र ने इस बग़ावत की निंदा की है. अफ्रीकी संघ ने माली की सदस्यता को भी निलंबित कर दिया है.
सहारा रेगिस्तान तक फैला माली दुनिया के सबसे ग़रीब देशों में से एक है. कई बार वहाँ सैनिक विद्रोह हुआ है. इस समय भी माली जिहादी हमलों और जातीय हिंसा को रोकने के लिए संघर्ष कर रहा है.
ख़ुद को नेशनल कमेटी फ़ॉर द साल्वेशन ऑफ़ द पीपुल कहने वाले सैनिकों ने कहा है कि वे सत्ता में नहीं रहना चाहते.
एयर फ़ोर्स के डिप्टी चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ कर्नल इस्माइल वेग ने कहा कि वे लोग देश में स्थिरता चाहते हैं ताकि देश में आम चुनाव हों और एक उचित समयसीमा के अंदर माली में मज़बूत संस्थाएँ बन सकें.
केटा ने क्या कहा
मंगलवार की रात राष्ट्रपति केटा ने सरकारी टेलीविज़न पर एक छोटे से संबोधन के बाद इस्तीफ़ा दे दिया.
उन्होंने कहा- अगर आज हमारी सेना के कुछ लोग चाहते हैं कि उनके दख़ल से ये अंत हो, तो क्या मेरे पास कोई विकल्प है?
राष्ट्रपति केटा ने कहा कि उनके मन में किसी के प्रति नफ़रत नहीं, ईश्वर हमारी रक्षा करे.
केटा ने वर्ष 2018 में दूसरी बार चुनाव जीता था. लेकिन इस साल जून से उन्हें भ्रष्टाचार के आरोप में बड़े विरोध प्रदर्शनों का सामना करना पड़ रहा था. साथ ही उन पर अर्थव्यवस्था के कुप्रबंधन और चुनाव को लेकर भी आरोप लग रहे थे.
जिहादियों के साथ संघर्ष और वेतन को लेकर सेना में भी नाराज़गी थी.
सैनिकों का क्या कहना है
सैनिकों की ओर से बुधवार सुबह बयान जारी किया गया. इस बयान में कहा गया है कि आम लोगों और राजनीतिक सामाजिक आंदोलन की ओर से उन्हें कहा गया था कि वे मिल-जुलकर देश के लिए बेहतर माहौल तैयार करें ताकि समय पर चुनाव हों और नए माली के गठन का रास्ता बन सके.
सेना ने कहा है कि फ़िलहाल देश की ज़मीनी और वायु सीमा अगले आदेश तक बंद है और सुबह नौ बजे से शाम पाँच बजे तक का कर्फ़्यू लगाया गया है.
कर्नल वेग ने कहा कि देश अव्यवस्था की ओर जा रहा था.
घटनाएँ, जिनके कारण हुई बग़ावत
2018: राष्ट्रपति केटा दूसरे कार्यकाल के लिए चुने गए
2019: प्रधानमंत्री मैगा और उनकी सरकार ने जातीय हिंसा बढ़ने के कारण इस्तीफ़ा दिया
मार्च, 2020: संसदीय चुनावों से पहले प्रचार के दौरान विपक्षी नेता सौमैला सिसे का अपहरण
30 अप्रैल, 2020: धोखाधड़ी के आरोपों के बाद संवैधानिक अदालत ने संसदीय चुनाव के कुछ नतीजों को रद्द किया
मई, 2020: लोकप्रिय इमाम महमूद डिको की अगुआई में विपक्षी गठबंधन ने राष्ट्रपति केटा के इस्तीफ़े की मांग की
जून, 2020: Economic Community of West African States (ECOWAS) ने राष्ट्रीय एकता वाली सहमति की सरकार के गठन की मांग की
10 जुलाई, 2020: विपक्षी समर्थकों और सुरक्षाबलों के बीच संघर्ष में कम के कम 10 लोगों की मौत
18 अगस्त, 2020: सैनिकों की अगुआई में राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ बग़ावत
विद्रोह के बारे में हमें क्या पता है
ये अभी स्पष्ट नहीं है कि माली में विद्रोह कैसे शुरू हुआ और कितने सैनिकों ने इसमें हिस्सा लिया और अब नेतृत्व कौन करेगा.
बैमको में मौजूद बीबीसी संवाददाता अब्दुल बा के मुताबिक़ ऐसा लगता है कि इसका नेतृत्व कर्नल मलिक डियाव ने किया है और उन्हें जनरल सैडियो कमारा का भी साथ मिला है.
माना जा रहा है कि बैमको से 15 किलोमीटर दूर काटी कैंप पर क़ब्ज़ा करने के बाद विद्रोहियों ने राजधानी का रुख़ किया, जहाँ प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने उनका स्वागत किया.
ये प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति केटा के इस्तीफ़े की मांग कर रहे थे.
मंगलवार दोपहर विद्रोहियों ने राष्ट्रपति के आवास पर धावा बोला और उन्हें और उनके प्रधानमंत्री दोनों को गिरफ़्तार कर लिया.
ऐसी रिपोर्टें हैं कि राष्ट्रपति केटा के बेटे और नेशनल असेंबली के स्पीकर के साथ-साथ विदेश मंत्री और वित्त मंत्री को भी हिरासत में ले लिया गया. कई अधिकारियों को भी गिरफ़्तार कर लिया गया.
जैसे ही विद्रोह की ख़बर आई, संयुक्त राष्ट्र और अफ़्रीकन यूनियन ने हिरासत में लिए गए नेताओं को रिहा करने की मांग की.
क्षेत्रीय संगठन Ecowas ने कहा कि उनके 15 सदस्य देशों ने माली के साथ लगी अपनी सीमाएँ बंद करने पर सहमति जताई. हाल के दिनों में संगठन ने केटा की सरकार और विपक्ष में समझौता भी कराने की कोशिश की थी.
माली की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद भी बुधवार को बैठक कर रहा है.
माली पहले फ़्रांस का उपनिवेश था. फ़्रांस ने भी इस बग़ावत की आलोचना की है और कहा है कि सैनिकों को अपने बैरक में लौट जाना चाहिए.
हालाँकि माली के विपक्षी आंदोलन एम5 के एक सदस्य ने राष्ट्रपति के इस्तीफ़े का स्वागत किया है.
प्रोफ़ेसर रमाटा सिसोको सिसे ने बीबीसी वर्ल्ड सर्विस से कहा, "मुझे लगता है कि ये माली के लोगों के लिए राहत की बात है. राष्ट्रपति ने आख़िर इस्तीफ़ा दे दिया है और जनता को सत्ता सौंप दी है."
एम5 का नेतृत्व इमाम महमूद डिको कर रहे हैं.
माली की अहमियत क्या है
उत्तरी माली कई चरमपंथी गुटों का अड्डा है. इनमें से कुछ का संबंध अलक़ायदा और इस्लामिक स्टेट ग्रुप से माना जाता है. ये चरमपंथी संगठन पड़ोसी देश नीज़ेर, बुरकिना फ़ासो, चाड और मौरिटानिया तक फैले हुए है.
फ़्रांसीसी सेना के साथ संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना भी माली में है और वो इन चरमपंथियों से निपटने की कोशिश कर रहे हैं. माली में मौजूद संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना में 10,000 सैनिक हैं.
पहली बार 2013 में फ़्रांसीसी सेना ने दख़ल दिया था, जब इस्लामिस्ट और अलगाववादी टॉरेग लड़ाकों ने उत्तरी माली पर नियंत्रण स्थापित कर लिया था.
जानकारों को लगता है कि देश में अस्थिरता का नया दौर आएगा और पूरे पश्चिमी अफ़्रीका में इसका असर होगा.
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