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यूक्रेन-रूस जंग: जानिए वैक्यूम बम क्या है और कितना ख़तरनाक
रूस और यूक्रेन के बीच बीते सात दिनों से जारी युद्ध में आक्रामकता बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं.
बुधवार शाम रूस ने बताया है कि इस युद्ध में अब तक 498 सैनिकों की मौत हुई है और 1597 सैनिक घायल हुए हैं.
वहीं, यूक्रेन के अधिकारियों ने दावा किया है कि रूसी हमले में अब तक उनके 2000 से अधिक नागरिक मारे गए हैं. यूक्रेन के शहर मारियुपोल समेत अन्य शहरों में दोनों पक्षों के बीच भीषण जंग जारी है.
लेकिन इस सबके बीच रूस पर थर्मोबेरिक वेपन का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया जा रहा है, जिसे वैक्यूम बम भी कहा जाता है.
दुनिया भर में वैक्यूम बमों के प्रयोग पर विवाद उठता रहा है क्योंकि ये समान आकार के पारंपरिक बमों की अपेक्षा ज़्यादा ख़तरनाक होते हैं.
कैसे काम करता है वैक्यूम बम?
वैक्यूम बम को एयरोसोल बम भी कहा जाता है. इसके साथ ही इसे फ़्यूल एयर विस्फोटक भी कहा जाता है. क्योंकि इस बम में एक फ़्यूल कंटेनर होता है जिसमें दो अलग विस्फोटक चार्ज लगे होते हैं.
इसे एक रॉकेट या विमान से बम की तरह छोड़ा जा सकता है. जब यह बम अपने निशाने पर लगता है तो पहले विस्फोट में फ़्यूल कंटेनर खुलकर आसपास के क्षेत्र में फ़्यूल को फैलाकर एक बादल की शक्ल दे देता है.
यह बादल किसी भी इमारत में घुस सकता है, जिसे पूरी तरह सील न किया गया हो. इसके बाद दूसरे विस्फोट में इस बादल में आग लगती है, जिससे आग का एक बड़ा गोला पैदा होता है.
इससे एक भारी ब्लास्ट वेव का जन्म होता है, जो आसपास की सारी ऑक्सीजन सोख लेती है. इस बम से सैन्य साजो-सामान से लेकर विशेष रूप से तैयार की गईं मजबूत इमारतें टूट सकती हैं और इंसानों की मौत हो सकती है.
इन हथियारों को अलग-अलग मक़सद के लिए इस्तेमाल किया जाता है. ये अलग-अलग आकार में बनाए जाते हैं, जिनमें सैनिकों द्वारा फेंके जाने वाले ग्रेनेड से लेकर कंधे पर रखकर चलाया जाने वाला रॉकेट लॉन्चर से छोड़े जाने वाले साइज़ शामिल हैं.
सबसे बड़ा ग़ैर-परमाणु बम
इसके साथ ही हवा से मार करने वाले विशाल आकार के वैक्यूम बम भी बनाए गए हैं, जिनसे गुफाओं और सुरंगों में छिपे लोगों को मारा जा सके. बंद इलाक़ों में इस बम का असर सबसे ज़्यादा घातक होता है.
साल 2003 में अमेरिका ने 9800 किलोग्राम के वजन वाले बम का परीक्षण किया था, जिसे मदर ऑफ़ ऑल बम नाम दिया गया था. इसके चार साल बाद रूस ने भी ऐसी ही डिवाइस तैयार की, जिसे फादर ऑफ़ ऑल बम कहा गया.
इस बम से 44 टन के पारंपरिक बम जितना बड़ा धमाका हुआ और इसके साथ ही यह दुनिया में सबसे घातक ग़ैर-परमाणु हथियार बन गया.
इस बम के विनाशकारी प्रभाव और इमारतों या बंकरों में छिपे बचाव पक्ष के ख़िलाफ़ इनकी उपयोगिता को देखते हुए, वैक्यूम बमों का इस्तेमाल मुख्य रूप से शहरी वातावरण में किया गया है.
ये काफ़ी अहम है क्योंकि यूक्रेन में रूसी फौज़ें कीएव समेत तमाम शहरों को जीतने की कोशिश कर रही हैं.
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क्या यूक्रेन में इस्तेमाल किए जा रहे हैं वैक्यूम बम?
अमेरिका में यूक्रेन की राजदूत ओक्साना मारकारोवा ने रूस पर वैक्यूम बमों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है. अब तक इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.
हालांकि, पिछले कुछ दिनों में यूक्रेन में थर्मोबेरिक बमों को लॉन्च करने वाले रॉकेट लॉंचर देखे गए हैं.
वैक्यूम बमों को इस्तेमाल करने के क्या नियम हैं?
अब तक इन बमों को इस्तेमाल न करने के लिए किसी तरह के अंतरराष्ट्रीय क़ानून नहीं बनाए गए हैं. लेकिन अगर कोई देश रिहाइशी इलाकों, स्कूल या अस्पतालों में इनका इस्तेमाल करता है तो इस मामले में 1899 और 1907 के हेग कन्वेन्शन के तहत युद्ध अपराध का मुक़दमा चलाया जा सकता है.
इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट प्रॉसिक्युटर करीम ख़ान ने कहा है कि उनकी अदालत यूक्रेन में संभावित युद्ध अपराधों के मामलों की जांच करेगी.
वैक्यूम बमों को इससे पहले कहाँ इस्तेमाल किया गया है?
वैक्यूम बमों को सबसे पहले द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मन सेना ने इस्तेमाल किया था. लेकिन इन बमों को 1960 तक व्यापक रूप से विकसित नहीं किया गया था, जब अमेरिका ने वियतनाम में इन बमों का इस्तेमाल किया.
इसके बाद अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान में पहले साल 2001 में तोरा बोरा की पहाड़ियों में छिपे अल-क़ायदा लड़ाकों को नष्ट करने और 2017 में इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों के ख़िलाफ़ इस्तेमाल किया था.
रूस ने इस बम का इस्तेमाल साल 1999 में चेचन्या युद्ध के दौरान किया था और ह्युमन राइट्स वॉच ने इस कदम की निंदा की थी.
रूस द्वारा बनाए गए वैक्यूम बमों को बशर अल-असद सरकार ने कथित रूप से सीरियाई गृह युद्ध में भी इस्तेमाल किया था.
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