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रूस-यूक्रेन युद्ध: पुतिन ने गैस देना बंद किया तो यूरोप का क्या होगा? बीबीसी रियलिटी चेक
- Author, जेक हॉर्टन, डानियेल पलुंबो और टिम बोलर
- पदनाम, बीबीसी रियलिटी चेक
अमेरिका ने रूस से आयात किए जाने वाले तेल और गैस पर प्रतिबंध लगाने का फ़ैसला किया है. दूसरी तरफ़ ब्रिटेन ने भी कहा है कि वो रूसी तेल की खरीद आने वाले समय में बंद करेगा जबकि यूरोपीय संघ ने आयात में कटौती का फ़ैसला किया है.
ये कदम रूस की ओर से जारी की गई उस चेतावनी के बाद उठाया गया है जिसमें रूसी सरकार ने कहा था कि अगर तेल के व्यापार पर प्रतिबंध लगाया जाता है तो वह यूरोपीय देशों की गैस आपूर्ति बंद कर देगा.
रूस के तेल और गैस पर क्या प्रतिबंध हैं?
यूक्रेन की ओर से कड़े प्रतिबंध लगाए जाने की मांग उठने के बाद अमेरिका ने रूस से तेल, गैस और कोयला आयात पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने का फ़ैसला किया है.
ब्रिटेन ने भी इस साल के अंत तक रूसी तेल से छुटकारा पाने का फ़ैसला किया है. और यूरोपीय संघ रूसी गैस आयात में दो तिहाई कटौती कर रहा है.
ब्रितानी सरकार ने कहा है कि इस अवधि में उन्हें आपूर्ति के वैकल्पिक स्रोत तलाशने के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा.
वहीं, रूस के उप प्रधानमंत्री एलेक्ज़ेंडर नोवाक कह चुके हैं कि रूसी तेल प्रतिबंधित करने का फ़ैसला वैश्विक बाज़ार पर भयानक असर डालेगा.
दुनिया भर में तेल और गैस के दाम पहले से ही तेज गति से बढ़ रहे हैं. लेकिन अगर रूस निर्यात पर रोक लगाता है तो इन चीजों के दामों में तेज बढ़त देखने को मिल सकती है.
और ये बात सिर्फ ईंधन की नहीं है. ब्रितानी जीवनशैली पर भी इस फैसले का नकारात्मक असर दिखाई देगा.
इस बदलाव की वजह से दुनिया भर में ज़रूरी चीजों के दामों में और बढ़ोतरी होगी.
रूस आख़िर कितना तेल निर्यात करता है?
रूस दुनिया भर में तेल का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है. इससे पहले अमेरिका और सऊदी अरब का नंबर आता है.
रूस हर रोज़ पांच मिलियन बैरल कच्चे तेल का उत्पादन करता है जिसमें से आधी से ज़्यादा मात्रा यूरोप जाती है.
वहीं, ब्रिटेन अपनी तेल की खपत का 8 फीसद हिस्सा रूस से आयात करता है.
हालांकि, अमेरिका रूस पर इतना निर्भर नहीं है और साल 2020 में अमेरिका ने रूस से अपनी कुल खपत का मात्र 3 फीसद तेल आयात किया था.
तेल आपूर्ति के वैकल्पिक स्रोत?
एनर्जी पॉलिसी रिसर्च एनालिस्ट बेन मेकविलियम्स कहते हैं कि गैस की तुलना में तेल के लिए दूसरे निर्यातक तलाशना आसान होगा.
अपनी बात को समझाते हुए वह कहते हैं कि ऐसा इसलिए है क्योंकि गैस के लिए कई सारी पाइप-लाइनें नहीं हैं.
रूस से कुछ पाइप-लाइनें आती हैं. हालांकि, अन्य क्षेत्रों से बहुत से अन्य शिपमेंट आते हैं.
अमेरिका भी पिछले कुछ वक़्त से लगातार सऊदी अरब से तेल उत्पादन बढ़ाने के लिए कह रहा है.
लेकिन सऊदी अरब अब तक तेल की कीमतों में कमी लाने के लिए अपना उत्पादन बढ़ाने से इनकार करता रहा है.
सऊदी अरब ओपेक देशों में सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है.
ओपेक तेल उत्पादक देशों का एक संगठन है जो दुनिया भर में बेचे जाने वाले तेल की 60 फीसदी मात्रा पैदा करते हैं.
रूस ओपेक देशों में शामिल नहीं है लेकिन साल 2017 के बाद से यह ओपेक के साथ तेल उत्पादन की सीमा तय करने की दिशा में काम कर रहा है जिससे उत्पादकों की कमाई में स्थिरता रहे.
उधर, अमेरिका वेनेज़ुएला पर लगाए तेल प्रतिबंधों में भी ढील देने की सोच रहा है.
एक समय में वेनेज़ुएला अमेरिका को तेल देने वाले देशों में प्रमुख हुआ करता था. लेकिन वेनेज़ुएला ने हाल ही में अपना ज़्यादातर तेल निर्यात चीन को करना शुरू कर दिया है.
पश्चिमी यूरोप में रूसी गैस पहुंचना बंद हुई तो?
यूरोप में घरों की हीटिंग पर होने वाला ख़र्च पहले से ही काफ़ी ज़्यादा है. लेकिन रूसी गैस पश्चिमी यूरोप के देशों में पहुंचना बंद हुई तो इस मद में होने वाले ख़र्च में और बढ़त हो सकती है.
यूरोपीय संघ के कुल प्राकृतिक गैस आयात में रूसी गैस की हिस्सेदारी लगभग 40 फीसद है. अगर ये आपूर्ति रुकती है तो इटली और जर्मनी पर इसका सबसे ज़्यादा असर पड़ेगा.
ऐसे में यूरोप क़तर, अल्जीरिया, और नाइजीरिया जैसे गैस निर्यातकों पर विचार कर सकता है. लेकिन गैस के उत्पादन में तत्काल बढ़ोतरी करने में कई तरह की अड़चनें सामने आएंगी.
ब्रिटेन गैस की अपनी कुल खपत का सिर्फ 5 फीसद रूस से आयात करता है. हालांकि, अमेरिका रूस से गैस आयात नहीं करता है.
इसके बावजूद आपूर्ति में आई कमी की वजह से अमेरिका और ब्रिटेन में दामों में बढ़त देखी जा रही है.
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क्या रूसी गैस का विकल्प मिल सकता है?
ये इतना आसान नहीं है.
मेकविलियम्स कहते हैं, "गैस की आपूर्ति कहीं और से लेना ज़रा मुश्किल है क्योंकि रूस से यूरोप में गैस बड़े पाइपों के ज़रिए आती है."
थिंक टैंक ब्रूएगल का अनुमान है कि अगर रूस यूरोप को गैस निर्यात करना बंद करता है तो यूरोप संभवत: अमेरिका से लिक्विफाइड नेचुरल गैस यानी एलएनजी आयात कर सकता है.
यह अन्य ऊर्जा स्रोतों के इस्तेमाल को भी बढ़ा सकता है. लेकिन इसमें वक़्त लगेगा और ये आसान नहीं है.
रिसर्च एनालिस्ट सिमोन टेलियापिएट्रा कहती हैं, "नवीनकरणीय ऊर्जा स्रोतों को शुरू होने में समय लगता है. ऐसे में फौरी तौर पर यह एक समाधान नहीं है. ऐसे में अगली सर्दियों में ईंधन को बदलने से कुछ लाभ मिल सकता है. जैसे कोयले से चलने वाले ऊर्जा संयंत्रों को शुरू किया जा सकता है. इटली और जर्मनी ने आपातकालीन स्थिति में ये व्यवस्था करने का फैसला लिया है."
इसी बीच यूरोपीय संघ ने साल 2030 से पहले यूरोप को रूसी जीवाश्म ईंधन से मुक्त करने की दिशा में एक योजना लाने का प्रस्ताव रखा है.
इसमें गैस आपूर्ति में विविधता लाने के साथ-साथ हीटिंग और ऊर्जा उत्पादन में गैस को बदलना शामिल है.
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ईंधन पर होने वाला खर्च पर असर
यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध की वजह से ब्रिटेन में आम लोग ऊर्जा और ईंधन पर जितना ख़र्च करते हैं उसमें बढ़ोतरी होना तय है.
वहीं, अमेरिका में पेट्रोल के दाम साल 2008 के बाद अपने सबसे उच्चतम स्तर पर हैं.
अमेरिकी ऑटोमोबाइल एसोसिएशन ने बताया है कि पिछले हफ़्ते में पेट्रोल पंप पर मिलने वाले ईंधन की कीमतों में 11 फीसद का इजाफ़ा आया है.
मेकमिलियम्स कहते हैं, "मुझे लगता है कि हम एक ऐसे दौर में है जब अगर रूसी तेल और गैस यूरोप आना बंद हुई तो हमें इन चीजों की राशनिंग करनी पड़ेगी. और इस समय जिन समाधानों पर बात हो रही है, उनमें ये शामिल है कि क्या आम लोगों से अपने थर्मोस्टेट को एक डिग्री कम करने के लिए कहा जा सकता है क्योंकि इससे काफ़ी ज़्यादा ऊर्जा बच सकती है."
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