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कश्मीर पर एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट पर पाकिस्तान में क्यों है चर्चा - उर्दू प्रेस रिव्यू
- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारतीय संविधान में जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के तीन साल पूरे होने पर मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने एक रिपोर्ट जारी की है.
पाकिस्तान के सभी अख़बारों ने इसे प्रमुखता से छापा है.
डॉन अख़बार के अनुसार, एमनेस्टी ने जो रिपोर्ट जारी की है उसका शीर्षक रखा है, "हमें क़ानून के ज़रिए सज़ा दी जा रही है."
इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हाल के वर्षों में नागरिक समाज के लोगों, पत्रकारों, वकीलों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को निरंतर पूछताछ, यात्रा पर पाबंदी और मीडिया को कठोर नीतियों का सामना करना पड़ा है.
रिपोर्ट के अनुसार सिविल सोसाइटी के लोगों और मीडिया पर सख़्त कार्रवाई की जा रही है.
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सरकार की नीतियों का ज़रा सा भी विरोध करने वाली आवाज़ों को प्रशासनिक अधिकारी दबा रहे हैं और इस तरह वो सही ख़बर देने वाले किसी भी स्वतंत्र स्रोत को निशाना बना रहे हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि पांच अगस्त, 2019 से अब तक 27 पत्रकारों को गिरफ़्तार किया गया है.
रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की वेबसाइट पर मौजूद 1346 मुक़दमों का जायज़ा लेने पर पता चला कि एक अगस्त 2022 तक हैबियस-कॉर्पस याचिका में 32 फ़ीसद का इज़ाफ़ा हुआ है जो इस बात का संकेत है कि पिछले तीन सालों में ग़ैर-क़ानूनी गिरफ़्तारियों में काफ़ी बढ़ोतरी हुई है.
एमनेस्टी ने अपनी रिपोर्ट में नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा है कि जम्मू-कश्मीर में पिछले तीन सालों में यूएपीए के तहत गिरफ़्तार लोगों में 12 प्रतिशत का इज़ाफ़ा हुआ है.
टीटीपी ने पाकिस्तान के साथ युद्ध विराम समाप्त करने की घोषणा कर दी
प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने पाकिस्तान सरकार के साथ किए गए युद्ध विराम को ख़त्म करने की घोषणा की है.
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार, पाकिस्तान सरकार से टीटीपी की बातचीत में कोई ख़ास प्रगति नहीं होने के कारण टीटीपी ने यह फ़ैसला किया है.
टीटीपी के प्रवक्ता मोहम्मद ख़ोरासानी ने एक बयान जारी कर कहा कि पाकिस्तान सरकार के साथ अर्थपूर्ण बातचीत नहीं होने के कारण सीज़फ़ायर को समाप्त करने का फ़ैसला किया गया है.
बयान के अनुसार क़ैदियों की रिहाई और सैन्य ऑपरेशन को लेकर दोनों पक्षों के बीच कोई गंभीर बातचीत नहीं हो सकी है.
टीटीपी ने अपने बयान में कहा है कि उनके कुछ क़ैदियों को पाकिस्तान की सरकार ने रिहा तो कर दिया लेकिन फिर कुछ दिनों बाद उन्हें गिरफ़्तार कर लिया जो कि सीज़फ़ायर की शर्तों का सीधा-सीधा उल्लंघन है.
बयान में टीटीपी प्रमुख मुफ़्ती नूर वली के हवाले से कहा गया है कि उन्होंने कभी भी गंभीर बातचीत का विरोध नहीं किया है और बातचीत ख़त्म होने के बाद टीटीपी अपना संघर्ष जारी रखेगा. अफ़ग़ानिस्तान की मौजूदा तालिबान सरकार के अनुरोध पर पिछले साल अक्टूबर में पाकिस्तान सरकार और टीटीपी के बीच बातचीत की शुरुआत हुई थी लेकिन अभी तक दोनों पक्षों के बीच कोई सियासी हल नहीं निकल सका है.
पाकिस्तान में अगले साल भी महंगाई और विरोध प्रदर्शन होते रहेंगे: आईएमएफ़
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) का कहना है कि पाकिस्तान में अगले साल भी महंगाई की मार जारी रहेगी और इस कारण लोगों का विरोध प्रदर्शन भी जारी रहेगा.
दुनिया अख़बार के अनुसार इमरान ख़ान की सरकार ने तयशुदा वादों को पूरा नहीं किया जिससे पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति और ख़राब होती चली गई. आईएमएफ़ ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और क़र्ज़ के लिए सातवें और आठवें निरीक्षण से संबंधित रिपोर्ट जारी कर दी.
रिपोर्ट में कहा गया है कि खाने-पीने की चीज़ों और ईंधन की क़ीमतों में इज़ाफ़े के कारण आम जनता का विरोध प्रदर्शन अगले साल भी जारी रहेगा और इस कारण पाकिस्तान अस्थिरता की तरफ़ जा सकता है.
हालांकि आईएमएफ़ ने पाकिस्तान की मौजूदा शहबाज़ शरीफ़ की सरकार की तारीफ़ करते हुए कहा है कि सरकार की आर्थिक नीतियां विश्वास करने योग्य हैं और सरकार ने आर्थिक स्थिरता के लिए हर ज़रूरी क़दम उठाने का विश्वास दिलाया है.
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