दूसरे चरण में धन है अहम मुद्दा

पश्चिम बंगाल के मतदाता

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    • Author, सुवोजित बागची
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, कोलकता

पिछले कई दशकों के दौरान पश्चिम बंगाल राज्य ने 2011 की तरह का दिलचस्प विधान सभा चुनाव नहीं देखा होगा.

ज़रा सोचिये. 35-40 साल की उम्र वाले, समाज के ग़रीब तबके से आने वाले एक व्यक्ति की अपने इलाके के सांसद रणचंद्र डोम से बातचीत चल रही है.

एक तीसरे पुरुष की ओर इशारा करते हुए ये व्यक्ति अपने सांसद को बता रहा है कि, "हाँ, यही शख्स मतदाताओं को 500 रूपए के नोट बाँट रहा था. इसने मुझे भी पैसे दिए."

बगल में ही प्लास्टिक की कुर्सी पर बैठे सांसद रणचंद्र डोम ने जवाब दिया,"ये आदमी झूठ बोल रहा है. हम राजनीति करने के लिए पैसे नहीं देते."

पश्चिम बंगाल में इस तरह के नज़ारे इन दिनों अक्सर दिख जाते हैं.

समाज के ग़रीब वर्ग से आने वाला एक मतदाता, एक राजनीतिक पार्टी के वरिष्ठ सांसद पर जनता के बीच, मीडिया के बीच, वोट के लिए नोट बांटने का इल्ज़ाम लगा रहा है.

मैंने भी इस तरह के किसी किस्से पर भरोसा नहीं किया होता, अगर उसे प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा होता.

मतदान

आगामी 23 अप्रैल को राज्य में दूसरे चरण का मतदान होना है. पश्चिम बंगाल के मध्य भागों में 50 विधान सभा सीटों के लिए तैयारियाँ पूरी हो चुकी है.

करीब एक करोड़ मतदाता 293 प्रत्याशियों के लिए मतदान करेंगे.

जिन प्रमुख इलाक़ों में मतदान होने जा रहा है उनमे बीरभूम, नादिया और मुर्शीदाबाद ज़िले शामिल हैं.

2006 के विधान सभा चुनावों में इन 50 चुनावी क्षेत्रों में से करीब 60% सीटों पर सत्ताधारी वामदलों की जीत हुई थी.

जबकि इनमें से तृणमूल और कांग्रेस पार्टी की झोली में महज़ नौ सीटें ही आईं थी. गौर करने वाली बात ये भी है कि तृणमूल और कांग्रेस पार्टी के बीच वोट इसलिए भी बँट गए थे क्योंकि इनमे कोई चुनावी गठबंधन नहीं था.

हालांकि जब 2009 के लोक सभा चुनावों के दौरान तृणमूल-कांग्रेस गठबंधन एकसाथ मैदान में उतरा तो उन्हें इन क्षेत्रों में क़रीब 50 % सीटों पर जीत हासिल हुई.

ज़बरदस्त प्रचार

2009 के नतीजों को ध्यान में रखते हुए इन 50 विधान सभा क्षेत्रों के लिए ज़बरदस्त चुनाव प्रचार हुआ है.

प्रचार के दौरान सत्ताधारी लेफ्ट फ्रंट का निशाना तृणमूल उमीदवारों के ज़रिए प्रचार में लगाया जा रहा कथित कला धन रहा है.

पश्चिम बंगाल

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जबकि तृणमूल नेता ममता बनर्जी ने इस पूरे इलाके में हुए कम विकास को अपना चुनावी मुद्दा बनाए रखा.

साथ ही ममता बनर्जी इस इलाक़े के मुस्लिम मतदाताओं को भी अपनी तरफ रिझाने में लगी रहीं है.

पश्चिम बंगाल के दूसरे चरण के मतदान के पहले नेताओं ने भी अपने सुर तेज़ कर दिए हैं. सीपीआई-एम के वरिष्ठ नेता, जैसे सीताराम येचुरी तृणमूल पर काले धन के हेरफेर के इल्ज़ाम लगा रहे हैं.

मुख्यमंत्री बुद्धदेब भट्टाचार्य, गौतम देब और बिमान बोस भी इसी तर्ज़ पर भाषण देते देखे गए हैं. गौरतलब ये भी है कि लेफ्ट फ्रंट के नेता कांग्रेस पार्टी को अपना प्रमुख निशाना नहीं बना रहे हैं.

दूसरी तरफ़ तृणमूल कांग्रेस के नेतागण विपक्षी पार्टी के कई नेताओं पर मतदान से ठीक पहले पैसे बंटवाने के इल्ज़ाम लगा रहे हैं. खुद ममता बनर्जी ने एक चुनावी रैली के दौरान कहा कि जनता अपने घरों में बैठ कर टीवी पर लेफ्ट पार्टी के कारनामे देख रही है. इस बीच ख़बर ये भी है कि चुनाव आयोग उन आरोपों की जांच करेगा जिनमे लेफ्ट पार्टी के एक वरिष्ठ सांसद रणचंद्र डोम पर पैसे बंटवाने का आरोप है.

ज़ाहिर है दूसरे चरण के मतदान के पहले 'धन' ही चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बन कर उभरा है.