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मोटे हैं फिर भी फ़िट हैं! क्या सचमुच?
- Author, स्मिता मुंडासद
- पदनाम, हेल्थ रिपोर्टर
मोटे लोग मेडिकली फ़िट हो सकते हैं. लेकिन वैज्ञानिकों की नज़र में ये विचार एक मिथक ही है.
हालांकि अभी ये रिसर्च रिपोर्ट पब्लिश नहीं हुई है. लेकिन शोध में 35 लाख लोगों के मेडिकल रिपोर्ट्स की स्टडी की गई है.
उनका कहना है कि अगर किसी मोटे व्यक्ति में शुरुआत में दिल की बीमारी, डायबिटीज़ या हाई कॉलस्ट्रॉल के लक्षण नहीं देखे जाते हैं तो इसका मतलब ये भी नहीं है कि जीवन के उत्तरार्द्ध में उन्हें इसका सामना नहीं करना पड़ेगा.
ये नई बात पहले के शोध नतीजों से उलट है.
मोटापे पर आयोजित किए गए सम्मेलन 'यूरोपियन कांग्रेस ऑन ओबेसिटी' में इस रिसर्च के कुछ हिस्सों पर चर्चा की गई है.
'मोटे हैं पर फ़िट हैं', एक ऐसा विचार है जिसे मानने वाले लोग कहते हैं कि शुगर और ब्लड प्रेशर अगर हद में हो तो मोटापा उतनी बुरी बात भी नहीं है.
इस स्टडी में बर्मिंघम यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 1995 से 2015 की अवधि के बीच ब्रितानी मरीज़ों के स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों का अध्ययन किया.
उन्होंने पाया कि वैसे मोटे लोग जो स्वास्थ्य के दूसरे पैमानों पर स्वस्थ हैं, उनमें सामान्य वज़न के दूसरे लोगों की तुलना में दिल की बीमारी होने की संभावना ज़्यादा रहती है.
ब्रिटिश हार्ट फ़ाउंडेशन के डॉक्टर माइक क्नैप्टन कहते हैं, "इतने बड़े पैमाने पर रिसर्च हमेशा नहीं होते जो इस पुराने मिथक पर रोशनी डाल सकें. इन नतीजों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए."
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