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कोरोना वैक्सीन: मॉडर्ना ने अमेरिका और ब्रिटेन से बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के लिए मंज़ूरी माँगी
दवा कंपनी मॉडर्ना ने कोरोना वायरस के वैक्सीन के व्यापक पैमाने पर इस्तेमाल के लिए अमेरिका और यूरोप के नियामकों की मंज़ूरी माँगी है.
नियामक एमआरएनए वैक्सीन के ट्रायल से जुड़े डेटा को देखेंगे और यह फ़ैसला लेंगे कि यह सुरक्षित है कि नहीं.
वो यह भी देखेंगे कि इसे सभी पर इस्तेमाल के लिए मंज़ूरी दी जा सकती है कि नहीं.
क्लीनिकल अध्ययन यह दिखाता है कि मॉडर्ना की वैक्सीन कोरोना से बचाव में 94 फ़ीसद तक कामयाब है.
फ़ाइज़र ने भी अमेरिका की मंज़ूरी के लिए आवेदन डाला है.
फ़ाइज़र ने भी ऐसी ही वैक्सीन तैयार की है जो मॉडर्ना की वैक्सीन की तरह ही क्लीनिकल अध्ययन में असरदायी साबित हुई है.
ट्रायल का डेटा
ब्रिटेन के नियामक भी फ़ाइज़र की ओर से विकसित वैक्सीन से जुड़े डेटा की समीक्षा कर रहे हैं.
इसके अलावा ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी की ओर से विकसित वैक्सीन के आपातकाल इस्तेमाल के फ़ैसले की भी समीक्षा की जा रही है.
मॉडर्ना ने कहा है कि उसे ब्रिटेन से जल्दी ही अनुमति मिलने की उम्मीद है.
उसके पास 30,000 वॉलिंटियर्स के ऊपर किए गए ट्रायल का डेटा है. इसमें ज़्यादा जोखिम वाले उम्रदराज़ लोग भी शामिल थे.
ट्रायल में इनके ऊपर भी वैक्सीन को असरदार पाया गया है. इन तीनों वैक्सीन की अपनी-अपनी ख़ासियतें हैं.
वैक्सीन का प्री-ऑर्डर
ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका की ओर से संयुक्त रूप से तैयार वैक्सीन की क़ीमत मॉडर्ना और फ़ाइज़र की वैक्सीन की तुलना में काफ़ी कम है.
मॉडर्ना के वैक्सीन की क़ीमत 15 डॉलर है तो वहीं फ़ाइज़र के वैक्सीन की क़ीमत 25 डॉलर है जबकि एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन की क़ीमत महज़ तीन डॉलर है.
इसकी एक और ख़ासियत यह है कि इसका वितरण भी आसान है क्योंकि इसे बहुत कम तापमान पर रखने की ज़रूरत नहीं होती है.
लेकिन यह फ़ाइज़र और मॉडर्ना की वैक्सीन से ट्रायल के दौरान कम असरदायी साबित हुई है. यह वैक्सीन 62 फ़ीसद से 90 फ़ीसद तक ही असरदार है.
ब्रिटेन ने तीनों वैक्सीन का प्री-ऑर्डर दिया हुआ है-
• मॉडर्ना के 70 लाख वैक्सीन
• फ़ाइज़र के चार करोड़ वैक्सीन
• एस्ट्राजेनेका के दस करोड़ वैक्सीन
यूनिवर्सिटी ऑफ़ रिडिंग के बायोमेडिकल टेक्नॉलॉजी के एसोसिएट प्रोफ़ेसर डॉक्टर एलेक्ज़ेंडर एडवार्ड्स ने कहा, "बेशक यह एक बड़ी ख़बर है. ट्रायल के जितने बड़े आंकड़े हमारे पास होंगे हमें उतना इस बात का विश्वास होगा कि वैक्सीन कोविड-19 से खोने वाले इंसानी जानों को बचा सकता है."
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