'कंटेनर' में 18 महीने के लिए बंद

क्या आप बिना खिड़की वाले एक कंटेनर में 18 महीने बिताने के लिए तैयार होंगे? तीन रुसी, दो यूरोपीय और एक चीनी व्यक्ति ऐसा करने के लिए तैयार हो गए हैं.
ये लोग उस प्रयोग का हिस्सा हैं जो मंगल ग्रह पर स्पेस मिशन ले जाने का अनुरूपण करने की कोशिश कर रहा है.
‘मार्स 500’ नाम की ये परियोजना मॉस्को की एक मेडिकल संस्था में गुरुवार से शुरु हो रही है.
वैज्ञानिक ये जानने की कोशिश कर रहे हैं कि यदि मंगल ग्रह की यात्रा पर कभी कोई मिशन गया तो उसे किन दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा.
इस परियोजना को अधिक से अधिक वास्तविक रखने की कोशिश की गई है.
इस प्रयोग में हिस्सा ले रहे यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के डॉक्टर मार्टिन ज़ेल ने कहा है, "इन छह लोगों के इस्तेमाल और खान-पान की वस्तुएँ सीमित ही रखी जाएंगीं. मिशन के शुरु में जो कुछ उस कंनटेनर में रखा जाएगा, इन लोगों को उसी से काम चलाना होगा. प्रयोग के दौरान उन्हें और कुछ नहीं दिया जाएगा."
मनुष्य पर प्रभाव
कंटनेटर में लोग 18 महीने तक प्रयोग का हिस्सा बन रहेंगे
ये स्पेसशिप’ मॉस्को के ‘इंस्टीट्यूट ऑफ़ बॉयोमेडिकल प्रॉब्लम्स’ में स्थापित की गई है और इसका कुल घनफल यानि फैलाव मात्र 550 क्यूबिक मीटर है.
अंतरिक्ष यात्रियों को प्रशिक्षण देने वाले ऐलेक्सी सितेव इस ‘मिशन’ की अगुवाई कर रहे हैं. उनके दो अन्य रुसी साथी सुखरोब कामोलोव और ए. स्मोलीव्सकी डॉक्टर हैं.
इस टीम के दो यूरोपीय सदस्य डियगो उर्बिना और रोमें चार्ल्स पेशे से इंजीनियर हैं. चीन के यूए वांग चीन में अंतरिक्ष यात्रियों को प्रशिक्षण देते हैं.
डियगो उर्बिना ने बीबीसी को बताया कि वे हमेशा से ही मंगल ग्रह की यात्रा के मानव के सपने का हिस्सा बनना चाहते थे. उन्होंने कहा, "जब भी मानव मंगल ग्रह पर अपना पहला क़दम रखेगा तब मैं कह सकूंगा कि मैंने भी इसमें अपना योगदान दिया है."
इस प्रयोग के दौरान वैज्ञानिक ये पता लगाने की कोशिश करेंगे कि मनुष्य पर मनोवैज्ञानिक और शारीरिक पहलुओं पर एकाकीपन का क्या असर पड़ता है.












