अंडाणु रिज़र्व कराने की होड़ में हैं महिलाएँ

- Author, एमा विलकिंसन
- पदनाम, बीबीसी की विज्ञान संवाददाता
तीस को पार कर रही महिलाओं में अब इस बात की होड़ है कि वे अपने अंडाणु सुरक्षित करालें और बाद में उनका इस्तेमाल करें.
नए युग की महिलाओं को शादी की कोई जल्दी नहीं है. लेकिन शरीर की प्रजनन क्षमता भी समय के साथ-साथ कम होती जाती है.
यही कारण है कि तीस के दशक के उत्तरार्ध तक पहुँच चुकी महिलाओं में अपने अंडाणुओं को 'रिज़र्व' कराने की पद्धति तेज़ी से बढ़ रही है.
बेल्जियम के एक क्लिनिक में कुछ महिलाओं पर किए गए अध्ययन से पता चलता है कि उनमें से आधी महिलाएँ अपने अंडाणु इस लिए सुरक्षित कराना चाहती थीं ताकि उन पर सही साथी का जल्दी चयन करने का दबाव न रहे.
एक-तिहाई को यह डर था कि आगे चल कर कहीं वे गर्भधारण में असमर्थ न हो जाएँ.
वैसे यूके में किए गए एक अन्य अध्ययन से पता चला है कि कई महिलाएँ माँ बनने से पहले करियर मज़बूत करना चाहती थीं.
लगभग 200 छात्राओं पर किए गए इस शोध में मेडिकल की पढ़ाई कर रही दस में से आठ छात्राएँ परिवार देर से शुरू करने के लिए अंडाणु सरक्षित कराने के पक्ष में थीं.
जबकि खेल और शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करने वाली केवल आधी छात्राएँ इसकी हिमायत करती देखी गईं.
एक नई और आधुनिक तकनीक
एग-फ़्रीज़िंग या अंडाणु सुरक्षित कराने की तकनीक अभी अपेक्षाकृत एक नई तकनीक है. इसके तहत अंडाणु रिज़र्व कर लिए जाते हैं ताकि आगे चल कर आईवीएफ़ चिकित्सा के ज़रिए उनका इस्तेमाल हो सके.
वैसे तो कम आयु में स्वस्थ अंडाणु का इस्तेमाल ज़्यादा प्रभावी रहता है लेकिन इस समय इस तकनीक का प्रयोग कर रही अधिकतर महिलाएँ पैंतीस की उम्र पार कर चुकी हैं.
अंडाणु को फ़्रीज़ कराने की औसत लागत एक बार में तीन हज़ार पाउंड है. अधिकतर महिलाओं को अच्छे परिणाम सुनिश्चित करने के लिए तीन चक्र तक ऐसा करना पड़ता है.
यूरोपियन सोसायटी ऑफ़ ह्यूमैन रीप्रोडक्शन ऐँड एम्ब्रॉयॉलॉजी के सम्मेलन में इसकी जानकारी देते हुए इस शोध को पूरा करने वाली डॉक्टर जूली नेकेब्रोएक ने कह कि यह भी पता चला कि 27 प्रतिशत महिलाएँ बच्चे को जन्म देने का इरादा करने से पहले अपने रिश्ते को और मज़बूत होता देखना चाहती थीं.
अध्ययन में शामिल महिलाओं की औसत आयु 38 वर्ष थी और उन्हें अंदाज़ा था कि चालीस साल की उम्र के बाद उनकी प्रजनन क्षमता कम होती जाएगी.
इसी सम्मेलन में यूके में किए गए अध्ययन की जानकारी देते हुए लीड्स सेंटर फ़ॉर रीप्रोडक्टिव मेडिसिन की डॉक्टर श्रीलता गोर्थी ने कहा, "यदि महिलाएँ अपने करियर को दाँव पर लगाए बिना आगे चल कर परिवार बढ़ाना चाहती हैं तो समाज को उनका साथ देना चाहिए".
उन्होंने हालाँकि यह भी कहा, "इस तरीक़े को अपनाने की इच्छुक महिलाओं को इसके लाभ और कमियों की पूरी जानकारी मुहैया कराई जानी चाहिए".
उनका कहना था, "आयु का असर महिलाओं और पुरुषों, दोनों पर ही पड़ता है. जब उन्हें मिस्टर राइट मिलें तो हो सकता है उस समय भी प्रजनन की समस्या हो. उन्हें यह भी पता होना चाहिए कि उपचार सफलता की गारंटी नहीं है".












