सोचें पर ज़्यादा नहीं

वैज्ञानिकों का कहना है कि जो लोग अपने निर्णयों के सही होने के बारे में ज्यादा सोचते हैं उनकी स्मरण शक्ति कम होती है और वे अवसाद के शिकार हो सकते हैं.
ब्रिटेन में किए गए एक शोध के मुताबिक अपने निर्णय के बारे में ज़्यादा सोचने वालों के दिमाग़ में ज़्यादा कोशिकाएँ होती हैं.
ब्रितानी वैज्ञानिकों ने इस शोध में यह देखने की कोशिश की है कि निर्णयों के बारे में सोचने के तरीकों से किस तरह दिमाग़ के आकार में अंतर होता है.
हाल ही में पूरे ब्रिटेन में किए गए इस सर्वेक्षण के दौरान यह पाया गया कि कुछ लोग ज़िंदगी के बारे कुछ ज़्यादा सोचते हैं.
शोध के दौरान 32 लोगों से मुश्किल निर्णय लेने को कहा गया. उनसे दो एक जैसे काले और भूरे रंग के चित्र देखने को कहा गया और पूछा गया कि इनमें से कौन हल्के रंग का है.
मानसिक बीमारियों में सहायता
इसके बाद उनसे पूछा गया कि वे अपने जवाब के प्रति कितने आश्वस्त हैं. उनके जवाब को एक से छह के स्केल के तहत परखा गया.
जो लोग अपने जवाब को लेकर ज्यादा आश्वस्त थे उनके दिमाग़ के आगे के भाग में ज़्यादा कोशिकाएँ थी.
दिमाग़ के इस भाग को मानसिक बीमारियों से जोड़ कर देखा जाता है.
पहली बार इस अध्ययन में पाया गया है कि दिमाग़ के आकार में अंतर से लोगों के निर्णय के प्रति उनकी सोचने की प्रक्रिया प्रभावित होती है.
वैज्ञानिकों का मानना है कि दिमाग़ के आकार में इस अंतर की समझ से मानसिक बीमारियों के इलाज में फ़ायदा हो सकता है.
इस शोध से जुड़ी रही डॉक्टर रिमोना वेल का कहना था, "मैं समझती हूँ कि मानसिक बीमारियों से ग्रस्त लोगों के लिए यह शोध महत्वपूर्ण है चूँकि उन्हें ख़ुद अपनी बीमारियों के बारे में ज़्यादा समझ नहीं रहती. "
उन्होंने बताया कि मानसिक रोगियों को उनकी बीमारियों को स्वीकारने और समय पर दवा लेने की स्थिति में इससे सुधार होने की आशा है.
































