अमरीकी अंतरिक्ष कार्यक्रम का एक अध्याय ख़त्म

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अमरीकी अंतरिक्ष यान अटलांटिस आख़िरी बार धरती पर उतर गया है.
अटलांटिस फ्लोरिडा में कैनेडी स्पेस सेंटर में कुछ समय पहले उतरा.
इसके साथ ही मानव के अंतरिक्ष अभियान में अमरीका के प्रभुत्व का एक दौर ख़त्म हो गया है क्योंकि इसके साथ ही अमरीकी अंतरिक्ष केंद्र नासा का तीस वर्षों का अंतरिक्ष कार्यक्रम ख़त्म हो गया है.
इन तीस वर्षों में नासा ने अंतरिक्ष यानों अटलांटिस, चैलेंजर, कोलंबिया, डिस्कवरी और एंडेवर नाम के अंतरिक्ष यानों का एक बेड़ा तैयार किया.
<link type="page"><caption> तस्वीरें: अंतरिक्ष यानों की यात्रा</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2011/07/110719_gallery_space_ruj.shtml" platform="highweb"/></link>
ये दुनिया का पहला ऐसा अंतरिक्ष यानों का बेड़ा था जिसका बार बार उपयोग किया जा सकता था. अंतरिक्ष में जाने और आने के लिए, उपग्रहों की तैनाती के लिए और अंतरिक्ष स्टेशन के निर्माण और वहाँ बार बार जाने के लिए.
अटलांटिस की वापसी के बाद अमरीका को अंतरिक्ष स्टेशन तक जाने के लिए रूस पर निर्भर करना पड़ेगा. कम से कम तब तक जब तक निजी कंपनियाँ नए अंतरिक्ष यानों का निर्माण नहीं कर लेतीं.
अंतिम उडा़न
अटलांटिस अपने चार यात्रियों के साथ फ़्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर में गुरुवार को अमरीका में सूर्योदय से कुछ समय पहले उतरा.
इसके साथ ही अटलांटिस ने अंतरिक्ष स्टेशन की अपनी तेरहवीं यात्रा पूरी कर ली.
इसके बाद अटलांटिस को डिस्कवरी और एंडेवर की तरह सेवामुक्त कर दिया जाना है.
इसके बाद अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा अपने अगले अंतरिक्ष अभियान के लिए निजी कंपनियों का रुख कर रही है.
नासा को उम्मीद है कि अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की कक्षा तक ले जाने और वापस लाने के अभियान के लिए कई निजी कंपनियाँ सामने आएँगीं.
अपने अंतिम उड़ान पर गए अटलांटिस ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में क़रीब चार टन की सामग्री पहुँचाई है, जिसमें बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री भी है.
भावुक क्षण
अटलांटिस के पहिए का विमानतल पर रुकना एक भावुक क्षण है.
सिर्फ़ इसलिए नहीं कि इसके बाद अमरीका का तीस वर्ष पुराना अंतरिक्ष अभियान ख़त्म हो रहा है बल्कि इसलिए भी कि इसके साथ ही इन अंतरिक्ष यानों को संचालित करने के लिए रखे गए तीन हज़ार लोगों का भी काम कुछ ही दिनों के भीतर ख़त्म हो जाएगा.
वैसे ऐसा नहीं है कि सब कुछ अगले कुछ महीनों में ख़त्म हो जाएगा.
इसमें कम से कम दो वर्षों का समय लगेगा जब अंतरिक्ष कार्यक्रमों से जुड़ी सारी गतिविधियाँ ख़त्म की जाएँ और बरसों में जुटाए गए अंतरिक्ष इंजीनियरिंग के आँकड़ों को संरक्षित किया जा सके.
अटलांटिस का जहाँ तक सवाल है तो इसे आने वाले दिनों में कैनेडी स्पेस सेंटर में दर्शकों के लिए रख दिया जाएगा.
ये यान वहाँ जिन आँकड़ों के साथ ख़डा होगा उसमें 33 उड़ानें, अंतरिक्ष में 307 दिन, पृथ्वी की 4,848 परिक्रमा और कुल 20 करोड़, 26 लाख 73 हज़ार 974 किलोमीटर की यात्रा शामिल होगी.
इसके साथ ही अमरीका के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक ऐसा शून्य पैदा हो जाएगा जो कम से कम तीन या चार वर्षों तक तो नहीं भरा जा सकेगा.
थोड़े समय के लिए अमरीका अपने अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक पहुँचाने के लिए रूस के सोयूज़ यानों का उपयोग का उपयोग करेगा.
अगले पड़ाव

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इसके बाद उम्मीद की जा रही है कि निजी अंतरिक्ष यान उपलब्ध होंगे जिसमें नासा अपने अंतरिक्ष यात्रियों के लिए सीटें बुक करेगा.
माना जा रहा है कि ये अंतरिक्ष यानों को संचालित करने की तुलना में काफ़ी सस्ता होगा.
जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में स्पेस पॉलिसी इंस्टिट्यूट के प्रोफ़ेसर एमेरिटस डॉ जॉन लॉग्सडन ने बीबीसी से कहा, "हम निजी कंपनियों से कोई आधुनिक तकनीक विकसित करने को नहीं कह रहे हैं, हम उनसे वही आसान क्षमताएँ हासिल करने को कह रहे हैं जो हमने 1960 के दशक में विकसित की थीं जिससे कि लोगों को अंतरिक्ष की कक्षा तक पहुँचाया जा सके."
उनका कहना था, "इसके लिए किसी नई या आधुनिक तकनीक की ज़रुरत ही नहीं है."
नासा चाहती है कि वह अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक लोगों को लेजाने के काम से मुक्त होकर अपने संसाधनों का उपयोग अंतरिक्ष स्टेशन से आगे जाने के लिए यानों के निर्माण में कर सके, जिसमें चंद्रमा, मंगल और कुछ दूसरे छोटे ग्रह शामिल हैं.
एक त्रिशंकु अंतरिक्ष यान जिसका नाम ओरियन है अपने विकास के अंतिम चरणों में हैं.
इसकी क्षमताओं के बारे में जानकारी नहीं है लेकिन अमरीका संसद ने नासा को इसकी क्षमताओं के बारे में बता दिया है और अब नासा एक निश्चित बजट में इन क्षमताओं के साथ इस यान को तैयार करने में जुटा है.
उम्मीद है कि आगामी गर्मियों से पहले इसका डिज़ाइन तैयार हो जाएगा.
































