बांग्लादेशी पीएम तारिक़ रहमान के 'जेनोसाइड डे' पर पाकिस्तान के बारे कही बातें चर्चा में

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बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक़ रहमान का एक सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा का विषय बना हुआ है.

उन्होंने बुधवार को 'जनसंहार दिवस' की बरसी पर एक्स पर जो पोस्ट किया उसमें पाकिस्तानी फौज के लिए बेहद कड़े लफ़्ज़ों का इस्तेमाल किया.

इसकी काफ़ी चर्चा हो रही है क्योंकि ऐतिहासिक रूप से तारिक़ रहमान की पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) को पाकिस्तान के प्रति नरम रुख़ अपनाने के लिए जाना जाता है.

इसके अलावा रहमान से पहले मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के कार्यकाल में पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच काफ़ी क़रीबी देखी गई थी.

25 मार्च का दिन बांग्लादेश में 'जेनोसाइड डे (नरसंहार दिवस)' के तौर पर याद किया जाता है.

इसकी वजह 25 मार्च 1971 की वह भयावह रात है, जब पाकिस्तान की सेना ने 'ऑपरेशन सर्चलाइट' शुरू किया था. पाकिस्तानी सेना की ओर से इस दिन ढाका में सामूहिक हत्याएं की गई थीं.

तारिक़ रहमान ने एक्स पर लिखा, "25 मार्च 1971 को 'नरसंहार दिवस' के रूप में मनाया जाता है. इस अवसर पर मैं सभी शहीदों को अपनी गहरी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं."

पाकिस्तान के बारे में क्या बोले रहमान?

तारिक़ रहमान ने लिखा,"स्वतंत्रता-प्रेमी बांग्लादेश के इतिहास में 25 मार्च 1971 का दिन सबसे शर्मनाक और क्रूरतम दिनों में से एक के रूप में दर्ज है. उस काली रात में पाकिस्तानी की सेना ने 'ऑपरेशन सर्चलाइट' के नाम पर बांग्लादेश के निहत्थे लोगों के ख़िलाफ़ इतिहास के सबसे जघन्य नरसंहारों में से एक को अंजाम दिया. उन्होंने ढाका यूनिवर्सिटी, पिलखाना और राजारबाग पुलिस लाइंस सहित विभिन्न स्थानों पर शिक्षकों, बुद्धिजीवियों और निर्दोष नागरिकों पर अंधाधुंध गोलियां चलाईं, जिससे कई लोगों की मौत हो गई."

तारिक रहमान ने इसे 'पूर्व-नियोजित सामूहिक हत्याकांड' क़रार दिया.

उन्होंने आगे लिखा, "इस संगठित हत्याकांड का प्रतिरोध क्यों नहीं हो सका इसे लेकर उस समय के राजनीतिक नेतृत्व की स्पष्ट भूमिका अब भी ऐतिहासिक शोध का विषय है."

उन्होंने ये भी लिखा, "वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों तक स्वतंत्रता के मूल्य और महत्व को पहुंचाने के लिए 25 मार्च के नरसंहार के बारे में जानना भी ज़रूरी है. आइए हम सभी महान मुक्ति संग्राम की भावना-समानता, मानव गरिमा और सामाजिक न्याय को राज्य और समाज में स्थापित कर शहीदों के बलिदान का सम्मान करने की कोशिश करें."

तारिक़ रहमान के सख़्त रवैये की चर्चा

अपनी पोस्ट में तारिक़ रहमान ने पाकिस्तानी सेना की ओर से बरती गई 'क्रूरता' का ज़िक्र किया जिसकी चर्चा हो रही है.

बांग्लादेश के इतिहास में शेख़ हसीना की पार्टी अवामी लीग की तुलना में तारिक़ रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) को पाकिस्तान के ज़्यादा क़रीब माना जाता है.

बीएनपी ने साल 1991 से 1996 और 2001 से 2006 तक शासन किया और हाल ही में सत्ता में आई है.

शेख़ हसीना ने जब अपने कार्यकाल में 1971 की हिंसा के लिए ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ केस चलाना शुरू किया था तब बीएनपी ने इस क़दम को राजनीति से प्रेरित बताया था.

इसके अलावा शेख़ हसीना ने पाकिस्तान पर कई बार 1971 में हुई हिंसा और हत्याकांड का आरोप लगाते हुए माफ़ी की मांग की. लेकिन बीएनपी का रवैया इसे लेकर कम आक्रामक रहा और उसने पाकिस्तान से कभी भी औपचारिक तौर पर माफ़ी की मांग नहीं की.

इन सब वजहों से तारिक़ रहमान के पाकिस्तान के प्रति इन कड़े शब्दों ने सबका ध्यान खींचा.

भारत और बीएनपी के रिश्ते

2001 से 2006 के बीच जब ख़ालिदा ज़िया (तारिक़ रहमान की मां) बांग्लादेश की प्रधानमंत्री थीं तब भारत-बांग्लादेश के रिश्तों में लगातार उतार-चढ़ाव आते रहे.

2024 में शेख़ हसीना सरकार गिरने के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के कार्यकाल में भी भारत और बांग्लादेश के संबंध में कड़वाहट आ गई थी जबकि बांग्लादेश और पाकिस्तान के संबंधों में गर्माहट देखी गई थी.

1971 में बांग्लादेश के मुक्ति युद्ध के बाद से पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच नवंबर 2024 में पहला समुद्री संपर्क हुआ था.

इससे पहले दोनों देशों के बीच समुद्री व्यापार सिंगापुर या कोलंबो के ज़रिए होता था.

मोहम्मद यूनुस पर आरोप लगा कि पाकिस्तान को वो ज़्यादा ढील दे रहे हैं.

भारत ने उनके कार्यकाल में बांग्लादेश पर आरोप लगाए कि बांग्लादेश की ज़मीन का इस्तेमाल भारत के ख़िलाफ़ आतंक फैलाने में हो रहा है.

शेख़ हसीना की सरकार के पतन के बाद से भारत ने कई बार आरोप लगाया कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ हिंसा हो रही है.

आशंका जताई जा रही थी कि अगर बांग्लादेश में बीएनपी सत्ता में आती है तो भारत और बांग्लादेश के रिश्ते चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं. बीएनपी ने कई बार मोदी सरकार से मांग भी कि 'भारत में शरण ली हुई शेख़ हसीना' को बांग्लादेश वापस भेजा जाय.

लेकिन जब तारिक़ रहमान के नेतृत्व में बीएनपी ने चुनाव जीता तो पीएम नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई संदेश भेजा और तारिक़ रहमान से फ़ोन पर बात भी की. बीएनपी ने भी इसके लिए उनका शुक्रिया अदा किया और भारत के साथ मिलकर काम करने की इच्छा ज़ाहिर की.

इसे भारत और बांग्लादेश संबंधी को नई शुरुआत के तौर पर देखा गया.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.