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पाकिस्तान के ज़ेड-10 एमई हेलिकॉप्टर: भारत के अपाचे के सामने नया चैलेंजर
- Author, मुनज़्ज़ा अनवार
- पदनाम, बीबीसी उर्दू, इस्लामाबाद
- पढ़ने का समय: 8 मिनट
पिछले महीने सोशल मीडिया पर चीनी मूल के एक ज़ेड-10 एमई हेलिकॉप्टर की तस्वीर घूम रही थी, जो पाकिस्तान में एक फायरिंग रेंज में खड़ा नज़र आ रहा था.
कई लोगों ने इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बनी तस्वीर बताया, वहीं कुछ लोगों का मानना था कि यह ज़ेड-10 हेलिकॉप्टर का कोई पुराना वर्जन था, जो टेस्टिंग के लिए पाकिस्तान आया था.
इन्हीं अटकलों के बीच पाकिस्तानी सेना के जनसंपर्क विभाग (आईएसपीआर) ने चीनी मूल के ज़ेड-10 एमई अटैक हेलिकॉप्टरों को पाकिस्तान आर्मी एविएशन में शामिल किए जाने की औपचारिक घोषणा की.
यह खबर ऐसे समय पर सामने आई है, जब भारत ने अमेरिकी मूल के अटैक हेलिकॉप्टरों की पहली बड़ी खरीदारी की है. कुछ ही दिन पहले अमेरिका से तीन अपाचे अटैक हेलिकॉप्टरों की पहली खेप दिल्ली के पास हिंडन एयरबेस पर पहुंची थी.
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विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक तकनीक से लैस ज़ेड-10 एमई स्टेट-ऑफ-द-आर्ट हेलिकॉप्टर हर मौसम और दिन-रात के किसी भी समय सटीक निशाना साधकर हमला करने की क्षमता रखता है.
आधुनिक रडार और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम से लैस ज़ेड-10 एमई, हवाई और ज़मीनी ख़तरों का प्रभावी और समय पर जवाब देने में सेना की क्षमता को बढ़ाता है.
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि चीनी ज़ेड-10 एमई हेलिकॉप्टर और अमेरिकी अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर के बीच क्या अंतर है.
ज़ेड-10 एमई अटैक हेलिकॉप्टर की ख़ास बातें क्या हैं?
एयर कमोडोर (रिटायर्ड) मुज़म्मिल जिब्रान पाकिस्तान एयर फोर्स की जीडी (पी) ब्रांच से जुड़े थे और आजकल एयर यूनिवर्सिटी, मुल्तान में पढ़ाते हैं.
उनके अनुसार ज़ेड-10 एमई को डब्ल्यू-10 भी कहा जाता है. इसकी तैयारी साल 1994 में तब शुरू हुई, जब चीन को एक आधुनिक अटैक हेलिकॉप्टर की ज़रूरत महसूस हुई थी. यह चीन का पहला स्वदेश निर्मित अटैक हेलिकॉप्टर है.
एशियन मिलिट्री रिव्यू के मुताबिक, यह हेलिकॉप्टर कम दूरी में हवाई मदद, एंटी-टैंक कार्रवाइयों और सीमित स्तर पर एयर-टू-एयर लड़ाई की क्षमताओं से लैस है. इन ख़ूबियों के कारण इसकी तुलना भारत के एएच-64ई अपाचे गार्डियन से की जाती है.
मुज़म्मिल जिब्रान के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में इसके कई संस्करण आए हैं.
उनके अनुसार, आमतौर पर अधिकांश रडार धुंध वाले मौसम में प्रभावी तौर पर काम नहीं करते, लेकिन ज़ेड-10 एमई में लगाया गया रडार धुंध में भी शानदार काम करता है.
मुज़म्मिल जिब्रान कहते हैं, "इस हेलिकॉप्टर के कैनन्स, हेलमेट माउंटेड साइट्स के साथ जुड़े हुए हैं, यानी यह एक मोबाइल गन सिस्टम है जिसमें जिस दिशा में पायलट देखेगा, गन ख़ुद-ब-ख़ुद उस दिशा में फायर करेगी."
इसके आधुनिक मॉडल में एक नया शक्तिशाली इंजन लगाया गया है, जो उड़ान की क्षमता और रेंज, दोनों को बढ़ाता है.
डिफेंस सिक्योरिटी एशिया के अनुसार, "प्रदर्शन के हिसाब से ज़ेड-10 एमई की अधिकतम रफ़्तार करीब 300 किलोमीटर प्रति घंटा है, जबकि इसकी प्रभावी रेंज वज़न और अतिरिक्त फ्यूल पर निर्भर करते हुए 800 से 1120 किलोमीटर के बीच बताई जाती है."
इस हेलिकॉप्टर का ख़ाली वज़न लगभग 5,100 किलोग्राम है, जबकि अधिकतम टेक-ऑफ वज़न 7,200 किलोग्राम तक पहुंच सकता है, जो इसे लाइन ऑफ कंट्रोल के साथ लंबी उड़ानें भरने या गहराई में हमलों के लिए सक्षम बनाता है.
रक्षा विश्लेषक चौधरी फ़ारूक़ के अनुसार, इस हेलिकॉप्टर में कई तरह के हथियार लगाए जा सकते हैं.
ज़ेड-10 एमई पर 16 तक एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें, 32-ट्यूब वाले रॉकेट पॉड्स और टीवाई-90 एयर-टू-एयर मिसाइलें लगाई जा सकती हैं, जो ज़मीनी लक्ष्यों पर हमला करने और हवाई खतरों से निपटने के लिए इस्तेमाल होती हैं.
चीन के ज़ेड-10एमई और अमेरिकी अपाचे में अंतर
एयर कमोडोर (रिटायर्ड) मुज़म्मिल जिब्रान का कहना है कि अपाचे की तुलना में चीन ने ज़ेड-10 एमई में कई सुधार किए हैं.
उनके अनुसार, मिसाइलों में पहली प्राथमिकता आमतौर पर इंफ्रारेड यानी हीट-सीकिंग मिसाइलों को दी जाती है. "ऐसे में यह चीनी हेलिकॉप्टर एक महत्वपूर्ण बढ़त रखता है, क्योंकि इसके इंजन के एग्जॉस्ट क्षैतिज न होकर पीछे की तरफ़ 45 डिग्री के कोण पर झुके होते हैं, जिससे इसका हीट सिग्नेचर काफ़ी कम हो जाता है."
वह कहते हैं कि इस डिज़ाइन की वजह से दुश्मन के रडार या हीट सेंसर को हेलिकॉप्टर का पता लगाने में दिक्कत पेश आती है.
ग़ौरतलब है कि अमेरिकी अपाचे हेलिकॉप्टर कई युद्धों और विवादों में इस्तेमाल किए जाते रहे हैं. रक्षा विशेषज्ञों का दावा है कि ज़ेड-10 एमई को विशेष तौर पर पाकिस्तान के लिए बनाए गया है. ये अटैक हेलिकॉप्टर वर्तमान में पाकिस्तान की सेना के ऑपरेशनल इस्तेमाल में हैं.
हालांकि इन हेलिकॉप्टरों को अब तक किसी जंग में इस्तेमाल नहीं किया गया है.
एलेक्स प्लेटसास अटलांटिक काउंसिल के सीनियर फ़ेलो और पूर्व पेंटागन पदाधिकारी हैं. वह रक्षा, एयरोस्पेस और हाई-टेक क्षेत्र में काउंटर-टेररिज़्म और डिजिटल बदलाव के विशेषज्ञ हैं.
एलेक्स प्लेटसास बताते हैं कि ज़ेड-10 एमई वज़न में हल्का, आकार में थोड़ा छोटा और अधिक दूरी तय करने में सक्षम है, जो उसे ज़्यादा फुर्तीला बनाता है. हालांकि, एएच-64 की रफ़्तार अधिक है.
प्लेटसास बताते हैं, "यह हथियारों की बड़ी रेंज का इस्तेमाल कर सकता है और इसमें आधुनिक रडार व टारगेटिंग सिस्टम मौजूद हैं. ज़ेड-10 की क़ीमत काफ़ी कम है, लेकिन दोनों हेलिकॉप्टर एंटी-टैंक हमले के लिए बनाए गए हैं."
चीनी और पश्चिमी टेक्नोलॉजी की तुलना
पाकिस्तान और चीन के बीच रक्षा सहयोग की शुरुआत 1965 के पाकिस्तान-भारत युद्ध के बाद हुई, जब अमेरिकी हथियारों पर प्रतिबंध ने पाकिस्तान को चीन की ओर झुका दिया.
चीन ने दीर्घकालिक सैन्य और कूटनीतिक संबंधों का आधार रखते हुए पाकिस्तान को लड़ाकू विमान, टैंक और तोपखाने उपलब्ध कराए. यह साझेदारी शीत युद्ध के बाद और गहरी हो गई, जब पाकिस्तान ने अमेरिका की जगह चीन को अपने सैन्य हथियारों का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बना लिया.
चीन और पाकिस्तान ने 1963 में उस समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत सीमा विवाद का समाधान हुआ, और 1966 में चीन की ओर से पाकिस्तान को सैन्य सहायता की शुरुआत हुई.
पिछले कुछ दशकों में चीन ने अपने बनाए कई हथियार पाकिस्तान को उपलब्ध कराए हैं.
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीपरी) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच सालों (2020 से 2024) में पाकिस्तान ने जितने हथियार आयात किए, उनमें से 81 फ़ीसदी चीन से आए थे.
सीपरी के मुताबिक, पाकिस्तान ने 2015 से 2019 और 2020 से 2024 के बीच हथियारों के आयात में 61 फ़ीसदी की वृद्धि की है.
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने चीन से जो हथियार लिए, उनमें आधुनिक लड़ाकू विमान, मिसाइल, रडार और एयर डिफेंस सिस्टम शामिल हैं. पाकिस्तान में स्थानीय स्तर पर बनाए जाने वाले कुछ हथियारों में भी चीन की भूमिका है. ये हथियार या तो चीनी कंपनियों ने तैयार किए हैं, या इनमें चीनी तकनीक का इस्तेमाल हुआ है.
ज़ेड-10 एमई का चुनाव कैसे हुआ?
पाकिस्तानी सेना ने शुरुआत में एएच-1 ज़ेड वाइपर हेलिकॉप्टर लेने की योजना बनाई थी. साल 2015 में अमेरिका ने इस समझौते को मंज़ूरी भी दी थी, लेकिन भारत के साथ बढ़ते रक्षा संबंधों के कारण वॉशिंगटन ने इससे पीछे हट गया.
पाकिस्तान आर्मी एविएशन में एक वरिष्ठ पायलट (जिन्होंने नाम न बताने की शर्त पर बीबीसी से बात की) के अनुसार, अटैक हेलिकॉप्टर में सबसे अहम बात उनकी मेंटेनेंस यानी देखभाल होती है.
उन्होंने कहा, "अमेरिकी अपाचे एक बिल्कुल अलग मशीन है, जिसके लिए पूरी तरह नए इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत होती है. पाकिस्तान ने पहले 'सुपर कोबरा' या 'वाइपर' कहे जाने वाले अमेरिकी एएच-1ज़ेड हेलिकॉप्टर पर सभी हथियार और टेक्नोलॉजी फिट करने की तैयारी कर ली थी, मगर वह हेलिकॉप्टर अब तक नहीं मिला है.
इसके बाद पाकिस्तान ने तुर्की से टी129 हासिल करने की कोशिश की, लेकिन इंजन की समस्या के कारण वह विकल्प भी ख़त्म हो गया, जिसके बाद चीन का रुख किया गया."
वह बताते हैं कि 2015 में आने वाले चीनी हेलिकॉप्टरों को पाकिस्तान ने तकनीकी आधार पर रद्द कर दिया था, जिसके बाद 2019 में अंतिम निर्णय लिया गया.
पाकिस्तानी विशेषज्ञों ने ज़ेड-10 एमई हेलिकॉप्टर में अपाचे शैली का रडार, एयर-टू-एयर और एयर-टू-सर्फ़ेस मिसाइलें तथा अन्य आधुनिक हथियार प्रणालियां फिट करवाईं, ताकि उसे पाकिस्तानी ज़रूरतों के अनुसार ढाला जा सके.
एलेक्स प्लेटसास का कहना है कि ज़ेड-10 असल में पाकिस्तान की पहली पसंद नहीं थी.
वह बताते हैं, "पाकिस्तान तुर्की मूल के हेलिकॉप्टर लेना चाहता था, लेकिन अमेरिका ने इंजन के पुर्ज़ों के आयात पर रोक लगा दी. इसके बाद पाकिस्तान को चीन के साथ रक्षा सहयोग और संबंधों को और मज़बूत करने का एक और मौक़ा मिला."
इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक आईएसपीआर ने बीबीसी को समझौते की विस्तृत जानकारी नहीं दी है. हालांकि, पाकिस्तान आर्मी एविएशन में एक वरिष्ठ पायलट के अनुसार, पाकिस्तान ने चीन से 30 हेलिकॉप्टर ख़रीदे हैं, जो कई खेपों में पाकिस्तान पहुंचेंगे.
एयर कमोडोर (रिटायर्ड) मुज़म्मिल जिब्रान भी इस बात से सहमत दिखे.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित