पप्पू यादव 31 साल पुराने मामले में गए जेल, आख़िर क्या था वो केस?

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- Author, सीटू तिवारी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- पढ़ने का समय: 7 मिनट
बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ़ पप्पू यादव को गर्दनीबाग थाना मामले में ज़मानत मिल गई है, लेकिन अन्य मामले में ग़ैर ज़मानती वारंट के चलते उनकी रिहाई नहीं होगी.
साल 1995 के एक मामले में पटना पुलिस ने उन्हें बीते शुक्रवार की रात को गिरफ़्तार किया था. वो इस समय पटना के बेउर जेल में बंद हैं.
इस बीच पप्पू यादव ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एक लंबी चिट्ठी लिखी है जिसे उनके फ़ेसबुक पेज पर साझा किया गया है.
इसमें उन्होंने लिखा है, "नीतीश बाबू मुझसे किस बात का बदला लेना चाह रहे हैं, जबकि मैंने उनसे उनके 20 साल के कार्यकाल में कोई मदद तक नहीं मांगी. ना ही मैंने कभी शकुनी जी और सम्राट जी की व्यक्तिगत आलोचना की. लेकिन हम ज़रूर जानना चाहेंगे कि क्या वैचारिक लड़ाई को निजी बनाया जाना सही है?"
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इस गिरफ़्तारी के बाद से ही बिहार की राजधानी पटना सहित अलग अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए.
एनडीए के करीबी पूर्व सांसद आनंद मोहन, केन्द्रीय मंत्री जीतन राम मांझी, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, सांसद चंद्रशेखर आज़ाद, वरिष्ठ राजद नेता शिवानंद तिवारी ने पप्पू यादव के समर्थन में बयान दिया है.
पूर्व सांसद आनंद मोहन ने कहा, "मैं ऐसा मानता हूं कि 31 साल पुराना मामला था तो पहले ही गिरफ़्तारी होनी चाहिए थी. दुर्भावना से कोई बात नहीं होनी चाहिए."
वहीं केन्द्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा, "ऐसा कहा जा रहा है कि नीट छात्रा की मौत का मुद्दा उठाने के चलते पप्पू यादव की गिरफ़्तारी हुई. लेकिन ये क़ानूनी बात है इसलिए हम बहुत कुछ नहीं कह सकते."
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे नीट छात्रा का मामला उठाने पर पप्पू यादव से 'राजनीतिक प्रतिशोध' लेना बताया है.
वहीं प्रियंका गांधी ने एक्स पर लिखा, "भाजपा की सरकारें पीड़िता को न्याय दिलाने की जगह आरोपियों के साथ खड़ी हो जाती हैं. इस केस में आवाज़ उठा रहे सांसद पप्पू यादव जी की गिरफ़्तारी इसी असंवेदनशील रवैये की एक और कड़ी है."
इस बीच लोगों की दिलचस्पी इस मामले को लेकर भी देखने को मिल रही है कि पप्पू यादव को जिस मामले में गिरफ़्तार करके जेल भेजा गया, वो मामला क्या था?
क्या है मामला?

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साल 1995 का ये केस पटना के गर्दनीबाग थाना क्षेत्र के पुनाईचक मोहल्ले से जुड़ा हुआ है.
इस मोहल्ले में पप्पू यादव ने सांसद चुने जाने के बाद विनोद बिहारी लाल नाम के व्यक्ति से उनका घर किराए पर लिया था.
विनोद बिहारी लाल ने पप्पू यादव पर धोखाधड़ी से मकान किराए पर लेने का आरोप लगाया था.
पप्पू यादव इस मकान का इस्तेमाल अपने ऑफ़िस के तौर पर करते थे जिस पर मकान मालिक विनोद बिहारी लाल को आपत्ति थी. गर्दनीबाग थाने में दर्ज़ इस मामले की केस संख्या 552 / 95 है.
ये मामला एमपी -एमएलए की विशेष अदालत एसीजेएम-1 में चल रहा है.
पप्पू यादव की टीम में शामिल वकील शिवनंदन भारती ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से बताया, "इस मामले में पप्पू यादव, उनके पिता चंद्रनारायण प्रसाद और सहयोगी शैलेन्द्र कुमार पर केस हुआ था. साल 2020 तक इस केस में पप्पू यादव की रेगुलर हाज़िरी होती रही. लेकिन बाद में कोविड का वक़्त आया जब इस केस का रिकार्ड मिस- प्लेस हो गया."
ये केस आईपीसी की धारा 419, 420, 468, 448, 506, 120 (बी) के तहत दर्ज़ है.
शिवनंदन भारती के मुताबिक़, "कोविड के बाद इस केस में 29 जुलाई 2025 को बेल बॉन्ड कैंसिल कर दिया गया जिसकी सूचना पप्पू यादव को नहीं थी. इसके बाद 16 अक्तूबर 2025 को गैर ज़मानती वारंट जारी किया गया और 18 दिसंबर 2025 को 82 (फ़रारी) जारी हो गया."
इसके बाद 2 फ़रवरी 2026 को अभियुक्त की संपत्ति की कुर्की ज़ब्ती का आदेश जारी हुआ. इसके बाद ही पटना पुलिस ने 6 फ़रवरी की रात पप्पू यादव के आवास से उनकी गिरफ़्तारी की.
'ना पप्पू यादव, ना उनके वकील पेश हुए'

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इस मामले में पप्पू यादव के वकीलों का कहना है कि पप्पू यादव को बेल बॉन्ड कैंसिल होने और 82 जारी होने के बारे में कोई जानकारी नहीं थी.
जब किसी व्यक्ति के खिलाफ वारंट जारी हो और वह गिरफ्तारी से बचने के लिए छिप जाए या फरार हो जाए, तब अदालत सीआरपीसी के सेक्शन 82 के तहत लिखित आदेश जारी करती है.
वकील शिवनंदन भारती कहते हैं, "82 के जारी होने पर घर पर पर्ची चिपकाई जाती है और बाकायदा उसकी रिसीविंग, फ़ोटो आदि ली जाती है. लेकिन पप्पू यादव के घर पर ऐसी कोई पर्ची नहीं चिपकाई गई."
सरकारी अभियोजक संजीव कुमार सरकार की ओर से इस केस में पैरवी कर रहे हैं.
बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से उन्होंने कहा, "पप्पू यादव पर दो केस में ग़ैर ज़मानती वारंट जारी हुआ है. पहला ये केस जो 1995 का है जिसमें मकान मालिक की इच्छा के ख़िलाफ़ पप्पू यादव ने अपना ऑफ़िस बना लिया था."
"और दूसरा पटना के कोतवाली थाना में दर्ज़ साल 2017 का एक मामला है जो धरना प्रदर्शन से जुड़ा है. इस दोनों ही मामलों में अदालत के सामने ना तो पप्पू यादव के वकील और ना ख़ुद पप्पू यादव पेश हुए. इसके बाद ही बेल बॉन्ड टूटा."
शिकायतकर्ता की मौत, गिरफ़्तारी पर सवाल

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इस मामले में शिकायतकर्ता विनोद बिहारी लाल की मौत हो चुकी है.
पुनाईचक स्थित उनके दो मंजिला घर पर कोई इस मामले में बात नहीं करता.
लेकिन इलाक़े के एक दुकानदार ने नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर बताया, "जब वो यहां (पप्पू) रहते थे, तब बहुत हलचल रहती थी. यहीं उनका दफ़्तर चलता था. तरह – तरह के लोग आते थे. उनके पिताजी भी यहां रहते थे. स्टॉफ भी रहता था. लेकिन बाद में ये मकान खाली हो गया और वो मंदिरी वाले घर पर चले गए. यहां उनके बेटे रहते हैं लेकिन वो ज़्यादा किसी से संपर्क नहीं रखते."
पप्पू यादव के टीम के एक अन्य वकील विजय आनंद कहते हैं, "2009 से इस केस में शिकायकर्ता की तरफ़ से कोई आया ही नहीं. कोई गवाह ही नहीं आया. ऐसे में ये गिरफ़्तारी तो राजनीति से गाइडेड लगती है."
सरकारी अभियोजक संजीव कुमार इसे पप्पू यादव और उनके वकीलों की 'लापरवाही' मानते हैं. लेकिन अगर लापरवाही के नज़रिए से देखें तो पटना पुलिस पर भी सवाल उठते हैं.
जुलाई में बेल बॉन्ड कैंसिल, पुलिस देती रही सुरक्षा

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जुलाई 2025 में पप्पू यादव का बेल बॉन्ड कैंसिल हो गया था. पप्पू यादव इसके बाद कई दफ़े पटना आए.
वकील शिवनंदन भारती कहते हैं, "हर बार पटना आने पर पप्पू यादव एसएसपी को सूचित करते हैं. इस वक्त उन्हें वाई सुरक्षा मिली हुई है. जब बेल बॉन्ड कैंसिल हो गया था तो उसी वक़्त ज़रूरी क़दम क्यों नहीं उठाया गया. ग़ैर ज़मानती वारंट भी अक्तूबर 2025 में जारी हुआ, उसके बाद भी पुलिस ने गिरफ़्तार नहीं किया. तो पटना पुलिस की लापरवाही का ख़ामियाजा पप्पू यादव को जेल जाकर भुगतना पड़ रहा है."
इस मामले की तकनीकी पक्ष में इतर पप्पू यादव के समर्थक मानते हैं कि नीट छात्रा का मामला जोर शोर से उठाने के चलते उनकी गिरफ़्तारी हुई है.
उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर सवाल उठाया था कि नीट छात्रा के मामले में संवैधानिक पद पर आसीन किस नेता का पुत्र, मंत्री पुत्र संलिप्त है?
उनकी गिरफ़्तारी से निराश समर्थकों में शामिल राकेश यादव कहते हैं, "बिहार में कोई आपदा, कोई मर्डर हो जाए, नेता जी सामने आते हैं. नीट छात्रा मामले में भी वो इंसाफ़ की बात कर रहे थे. दिल्ली में वो बड़ा प्रदर्शन करते उससे पहले ही उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया. बिहार में कोई विपक्ष नहीं है तो पप्पू यादव अकेले ही विपक्ष बनते जा रहे हैं."
नीट छात्रा मौत का मामले उठाने पर पप्पू यादव की गिरफ़्तारी को लेकर सत्ता पक्ष बचाव की मुद्रा में है.
केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने पप्पू यादव की गिरफ़्तारी पर कहा, "कोई कानून तोड़ेगा तो कार्रवाई होगी. इसमें कोई राजनीतिक प्रतिशोध नहीं है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.












