ईरान युद्ध पर पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, हालात चिंताजनक, भारत के सामने अप्रत्याशित चुनौतियाँ

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में 'मध्य पूर्व में चल रही जंग' पर सदन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के सामने भी 'अप्रत्याशित चुनौतियाँ' हैं.
उन्होंने इस संघर्ष का प्रभाव लंबे समय तक बने रहने की आशंका जताई.
उन्होंने कहा कि कोविड के दौरान भी सप्लाई चेन में संकट पैदा हुआ था और देश ने एकजुटता से उसका मुकाबला किया.
पीएम मोदी ने कहा, "पश्चिम एशिया की हालत चिंताजनक है. इस संकट को तीन हफ्तों से अधिक हो रहा है. इस जंग से पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था पर और लोगों के जीवन पर असर पड़ रहा है."
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उन्होंने कहा, "भारत के सामने भी इस युद्ध ने अप्रत्याशित चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं. ये चुनौतियाँ आर्थिक, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी हैं. साथ ही मानवीय चुनौतियाँ भी हैं."
प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के बाद संसद के बाहर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने इस सारे मुद्दे पर संसद की भीतर चर्चा की मांग दोहराई.
प्रियंका गांधी ने कहा, "उन्होंने देश को अवगत करवाया है कि परिस्थितियां क्या हैं. उन्होंने कुछ नई बात नहीं कही है. हमने जो नोटिस दिया है संसद में चर्चा के लिए वो होना चाहिए ताकि हम भी जवाब दे पाएं और सबका पक्ष सामने आ पाए. मेरे ख़्याल से वो अच्छा रहेगा."
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने वक्तव्य में मध्य पूर्व में मौजूदा हालात, ऊर्जा ढांचा पर हमले, होर्मुज़ स्ट्रेट में स्वतंत्र आवाजाही में बाधा को लेकर बात की.
साथ ही उन्होंने देश के अंदर पेट्रोल, डीज़ल, गैस और फ़र्टिलाइज़र्स के स्टॉक और सप्लाई को लेकर भी जानकारी दी.
उन्होंने कहा, "इस दौरान मैंने पश्चिम एशिया के देशों के नेताओं से दो राउंड बात की. उन देशों के नेताओं ने भारतीयों की सुरक्षा का विश्वास दिलाया है. हालांकि दुर्भाग्य से कुछ भारतीयों की मृत्यु हुई है."
उन्होंने कहा, "प्रभावित देशों में मौजूद भारतीय मिशन वहां गए भारतीय पर्यटकों और वहां रह रहे लोगों के साथ 24 घंटे जुड़ा हुआ है और उनकी मदद कर रहा है."
प्रधानमंत्री ने बताया, "युद्ध शुरू होने से लेकर अबतक 3 लाख 75 भारतीय सुरक्षित लौटे हैं. ईरान से 1000 भारतीय सुरक्षित लौटे हैं. इनमें 700 से अधिक मेडिकल पढ़ाई करने वाले युवा हैं. इन देशों में सीबीएसई ने 10वीं और 12वीं की परीक्षा रद्द कर दी है."
भारत के पास तेल, गैस की क्या स्थिति

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "भारत में बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, गैस और फ़र्टिलाइज़र जैसी अनेक ज़रूरी चीजें होर्मुज़ स्ट्रेट के रास्ते आती हैं. युद्ध के बाद से ही होर्मुज़ स्ट्रेट में जहाज़ों का आना-जाना बहुत चुनौतीपूर्ण हो गया है. बावजूद इसके, हमारी सरकार का ये प्रयास रहा है कि पेट्रोल-डीज़ल और गैस की सप्लाई बहुत ज़्यादा प्रभावित न हो."
उन्होंने कहा, "भारत के पास कच्चे तेल के 53 लाख मिट्रिक टन का स्ट्रेटेजिक रिज़र्व है. अतिरिक्त 65 लाख मिट्रिक टन रिज़र्व बनाने पर काम हो रहा है. तेल कंपनियों के पास अलग रिज़र्व है."
"हमारा प्रयास है, तेल, गैस, फ़र्टिलाइज़र वाले जहाज़ भारत सुरक्षित पहुंचें. सभी वैश्विक सहयोगियों से बातचीत कर रहे हैं. ऐसे प्रयासों के कारण होर्मुज़ स्ट्रेट में फंसे कई जहाज़ भारत आए भी हैं."
"संकट के इस समय में देश की एक और तैयारी भी बहुत काम आ रही है. पिछले 10 साल में इथेनॉल के उत्पादन और ब्लेंडिंग बढ़ी है. आज हम पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनाल ब्लेंडिंग कर रहे हैं. इससे साढ़े चार करोड़ बैरल कम तेल आयात करना पड़ रहा है. रेलवे के बिजलीकरण से हर साल 180 करोड़ लीटर डीज़ल की बचत हो रही है."
"आज मेट्रो का नेटवर्क 1100 किलोमीटर हो गया है. इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर बहुत अधिक बल दिया गया है. केंद्र ने राज्यों को 15 हज़ार इलेक्ट्रिक बसें दी हैं. वैकल्पिक ईंधन पर काम हो रहा है, उससे भारत का भविष्य और सुरक्षित होगा."
उन्होंने कहा, "भारत सरकार इस संकट में एक रणनीति के तहत काम कर रही है. हम हर सेक्टर के स्टेक होल्डर्स के साथ चर्चा कर रहे हैं. भारत सरकार ने एक इंटरमीनिस्ट्रियल ग्रुप भी बनाया है जो हर दिन मिलता है और आवश्यक समाधान पर काम करता है."
उन्होंने कहा कि 'भारत सरकार और उद्योग के साझा प्रयास से परिस्थितियों का सामना कर सकेगा.'
एलपीजी की सप्लाई

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लोकसभा में 'मध्य-पूर्व' की स्थिति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि हमने देश में एलपीजी प्रोडक्शन को बढ़ाया है.
पीएम मोदी ने कहा, "हम सभी जानते हैं कि देश अपनी ज़रूरत का 60 फ़ीसदी एलपीजी प्रोडक्शन करता है. देश में इसके उत्पादन को हमने बढ़ावा दिया है. पेट्रोल-डीज़ल की सप्लाई सुचारू रूप से जारी रहे, इसके पर काम जारी है."
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में एलपीजी के घरेलू उपभोक्ताओं की ज़रूरतों को प्राथमिकता दी जाएगी.
'होर्मुज़ स्ट्रेट में रुकावट अस्वीकार्य'
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "शुरुआत से ही हमने इस संघर्ष को लेकर शांति की अपील की है. तनाव को कम करने और संघर्ष ख़त्म करने का आग्रह किया है. एनर्जी, परिवहन और नागरिक ठिकानों पर हमला नहीं होना चाहिए. कमर्शियल जहाज़ों पर हमला, होर्मुज़ स्ट्रेट में रुकावट अस्वीकार्य है."
उन्होंने कहा कि बातचीत और कूटनीति ही इस समस्या का समाधान है. हमारे हर प्रयास तनाव कम करने और संघर्ष को समाप्त करने के लिए है.
उन्होंने ये भी बताया कि क़ानून व्यवस्था सुनिश्चित करने वाली सभी एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है. साइबर, कोस्टल और बॉर्डर सिक्युरिटी इसमें शामिल है.
पीएम मोदी ने कहा, "इस संघर्ष का प्रभाव लंबे समय तक बने रहने की संभावना है. हमें बहुत सावधान और सतर्क रहना है, हालात का फ़ायदा उठाने वाले झूठ फैलाने का प्रयास करेंगे, उनसे बचने की ज़रूरत है. शभी राज्य सरकारें कालाबाज़ारी और जमाखोरी करने वालों पर कड़ी निगरानी और त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए."
'किसानों के हित सुरक्षित रखेगी सरकार'
माना जा रहा है कि मौजूदा संघर्ष की वजह से फ़र्टिलाइज़र्स की सप्लाई पर भी असर पड़ेगा.
पीएम मोदी ने किसानों को खाद की आपूर्ति को लेकर आश्वस्त किया.
उन्होंने कहा, "देश में पर्याप्त खाद्यान्न है. खरीफ सीजन की ठीक से बुआई हो सके, यह ज़रूरी है यह सरकार की प्राथमिकता है. हमारी सरकार ने दुनिया के संकट का बोझ किसानों पर नहीं पड़ने दिया."
उन्होंने कहा, "कोरोना के दौरान भी सप्लाई चेन बाधित हो गया था. यूरिया की एक बोरी 3000 रुपये तक पहुंच गई लेकिन भारत ने 300 रुपये बोरी उपलब्ध कराया."
पीएम मोदी ने कहा, "बीते दस सालों में देश में छह यूरिया प्लांट शुरू किया गया है जिससे 76 लाख मिट्रिक ट्रन उत्पादन जुड़ा है. डीएपी का उत्पादन 50 लाख मिट्रिक टन बढ़ाया गया है.इसके अलावा किसानों को मेड इन इंडिया नैनो यूरिया का विकल्प दिया गया है. पीएम किसान योजना के तहत 22 लाख से ज़्यादा सोलर पंप दिए गए हैं."
उन्होंने कहा, "देश के किसानों को विश्वास दिलाता हूं कि भारत सरकार उनकी पर्याप्त मदद करती रहेगी."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
































