ईरानी मिसाइलों का सामना कर रहे सऊदी अरब, क़तर और कुवैत जैसे देशों के पास कितनी सैन्य ताकत?

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अमेरिका और इसराइल की ओर से हमले के बाद से ही ईरान ने उन खाड़ी देशों को निशाना बना शुरू कर दिया था, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं.
ईरान ने जिन देशों में अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए हैं उनके पास भी मजबूत सैन्य ताक़त है.
हालांकि इन देशों ने अभी तक ईरान पर हमला नहीं किया है.
खाड़ी के जिन देशों पर ईरान ने मिसाइलें दाग रहा है, उनमें सबसे बड़ी सेना सऊदी अरब के पास है.
अपनी मजबूत सैन्य क्षमता और बड़े रक्षा बजट के दम पर सऊदी अरब मध्य पूर्व में एक बड़ी ताक़त के तौर पर उभरा है.
सऊदी अरब सेना की सबसे बड़ी ताक़त उसकी एयरफ़ोर्स मानी जाती है.
1. सऊदी अरब

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रॉयल सऊदी एयर फोर्स के पास 300 से ज्यादा एफ-15 स्ट्राइक ईगल और यूरोफ़ाइटर टाइफ़ून जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान हैं जो इसे अपने आसपास के देशों की तुलना में मजबूत स्थिति में रखते हैं.
इसके अलावा सऊदी अरब के पास एडवांस एयर डिफ़ेंस सिस्टम 'पीस शील्ड' है. सऊदी अरब के पास मिसाइलें और एडवांस ड्रोन्स भी हैं.
सऊदी अरब की थलसेना भी मजबूत मानी जाती है. इसके पास अमेरिकी अबराम टैंक और अत्याधुनिक बख्तरबंद गाड़ियां हैं.
सऊदी अरब अपनी नौसेना को भी मजबूत कर रहा है ताकि वो अपने समुद्री मार्गों और ऊर्जा ठिकानों की सुरक्षा कर सके.
हालांकि, इतने बड़े रक्षा बजट के बावजूद सऊदी अरब की सेना काफ़ी हद तक विदेशी हथियारों और तकनीक पर निर्भर है. ये अपने ज़्यादातर हथियार और सैन्य साज़ो-सामान अमेरिका, ब्रिटेन और फ़्रांस से लेता है.
सालाना फ़ायर पावर रिव्यू के मुताबिक़ 2026 में 145 देशों में सऊदी अरब की रैंकिंग 25 है. इसका फ़ायर पावर इंडेक्स स्कोर है 0.4473.
ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स एक सालाना डेटा-आधारित रैंकिंग है, जो देशों की पारंपरिक सैन्य ताकत का आकलन करती है.
इसमें सैनिकों की संख्या, आर्मी, एयरफ़ोर्स और नेवी की क्षमता, लॉजिस्टिक्स और आर्थिक संसाधन को शामिल किया जाता है. इन सभी के आधार पर "पावरइंडेक्स" स्कोर तैयार किया जाता है.
इसमें कम स्कोर का मतलब अधिक मजबूत पारंपरिक सैन्य शक्ति होता है.
ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स में कम स्कोर बेहतर माना जाता है. सैद्धांतिक रूप से इसका एक परफेक्ट स्कोर 0.0000 है, हालांकि कोई भी देश अभी तक इस स्तर तक नहीं पहुंच पाया है.
अमेरिका इस सूची में 0.0857 के स्कोर के साथ शीर्ष स्थान पर है. दूसरे स्थान पर रूस और तीसरे पर चीन है.
भारत इस इंडेक्स में चौथे और पाकिस्तान 14 वें स्थान पर है. खाड़ी देशों में एक और देश है जो देशी से बड़ी मिलिटरी पावर के तौर पर उभर रहा है.
2. कुवैत

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खाड़ी देशों में एक और देश है जो तेज़ी से बड़ी सैन्य ताक़त के तौर पर उभर रहा है. खाड़ी क्षेत्र के अहम देश कुवैत ने अपनी मजबूत अर्थव्यवस्था और रणनीतिक साझेदारियों के दम पर एक ताक़तवर सेना खड़ी कर ली है.
साल 2024 में कुवैत का रक्षा बजट 7.79 अरब डॉलर का था. कुवैत ग्लोबल फ़ायर पावर इंडेक्स में 76वें नंबर पर है और इसका पावर इंडेक्स स्कोर 1.716.
कुवैत में 18 से 35 वर्ष के पुरुषों के लिए अनिवार्य सैन्य सेवा लागू है.
कुवैत की थलसेना के पास लगभग 367 बैटल टैंक हैं. एयरफ़ोर्स में 131 विमान शामिल हैं. इनमें 50 लड़ाकू विमान हैं.
क्षेत्र में बढ़ते ड्रोन और मिसाइल खतरों को देखते हुए कुवैत ने लगातार अपने एयर डिफेंस सिस्टम और वायुसेना को आधुनिक बना रहा है. उसके पास एफए-18 हॉरनेट जैसे लड़ाकू विमान हैं.
रणनीतिक रूप से कुवैत पश्चिमी देशों, ख़ासकर अमेरिका और ब्रिटेन के साथ मजबूत रक्षा साझेदारी बनाए हुए है, जो ट्रेनिंग, टेक्नोलॉजी और सुरक्षा सहयोग में अहम भूमिका निभाती है.
3. संयुक्त अरब अमीरात

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संयुक्त अरब अमीरात मध्य पूर्व की सबसे आधुनिक और मजबूत सैन्य ताकतों में से एक है. ईरान ने संयुक्त अरब में दुबई पर कई हमले किए हैं और इससे वहां ख़ासा नुक़सान भी पहुंचा है. उसने कई ईरानी मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया है लेकिन अभी तक जवाबी हमला नहीं किया है.
यूएई के पास टेक्नोलॉजी और सटीक हमलों की क्षमता है. 2024 में यूएई का सालाना रक्षा बजट 22.75 अरब डॉलर का था.
ग्लोबल फ़ायर पावर इंडेक्स में ये 54वें नंबर पर है और इसका पावर इंडेक्स है 1.0188.
रक्षा विश्लेषकों के मुताबिक़ यूएई डिफेंसिव नहीं बल्कि सक्रिय सैन्य शक्ति बन चुका है.
यूएई ने यमन और लीबिया के सैन्य अभियानों में हिस्सा लिया है. इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय अभियानों का भी उसने समर्थन किया है.
एयरफ़ोर्स यूएई की सबसे बड़ी ताक़त है, जिसमें एफ-16 और मिराज 2000 जैसे लड़ाकू विमान शामिल हैं.
यूएई के पास पैट्रियट और थाड जैसे एडवांस एडवांस एयर डिफ़ेंस सिस्टम हैं.
यूएई अपनी सेना के आधुनिकीकरण पर लगातार निवेश कर रहा है और अमेरिका, फ़्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों के साथ मजबूत रक्षा साझेदारी बनाए हुए है.
4. बहरीन

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खाड़ी में अपनी रणनीतिक अहमियत की वजह से बहरीन की सेना खुद को मजबूत करने में जुटी है.
बहरीन की सेना 'बहरीन डिफेंस फोर्स' कहा जाता है. ये सेना ए़डवांस और तकनीक के तौर पर मजबूत मानी जाती है. बहरीन की एयरफोर्स भी इसकी सबसे मजबूत यूनिट मानी जाती है.
2026 की ग्लोबल फायरपावर रैंकिंग में ये 75वें स्थान पर है.
बहरीन ने खाड़ी देशों में शुरुआती दौर में एफ-16 फ़ाइटिंग फाल्कन को शामिल किया था. ख़ासकर आधुनिक ब्लॉक 70 वैरिएंट के साथ ये इसकी सेना को और मजबूती देता है.
समुद्री सुरक्षा के लिहाज से रॉयल बहरीनी नेवल फोर्स के पास अमेरिकी मूल का ओलिवर हजार्ड-पेरी क्लास का युद्धपोत है.
वहीं थलसेना के पास एम60ए3 टैंक हैं.
बहरीन का रक्षा बजट करीब 1.75 अरब डॉलर है, जिसमें क्षेत्रीय तनाव के चलते लगातार वृद्धि हो रही है.
हालांकि, सेना का बड़ा हिस्सा विदेशी कॉन्ट्रैक्ट सैनिकों पर निर्भर है, जो इसकी एक प्रमुख कमजोरी मानी जाती है.
रणनीतिक रूप से बहरीन की सबसे बड़ी ताकत उसका अंतरराष्ट्रीय सहयोग है. देश में अमेरिका का पांचवां बेड़ा है. अमेरिकी नौसैनिक कमान की मौजूदगी इसे मध्य पूर्व में अमेरिका का प्रमुख सैन्य केंद्र बनाती है.
5. क़तर

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खाड़ी क्षेत्र का छोटा लेकिन समृद्ध देश क़तर अपनी सीमित आबादी के बावजूद आधुनिक सैन्य ताकत के जरिए वैश्विक ध्यान आकर्षित कर रहा है.
क़तर दुनिया के सबसे बड़े गैस उत्पादक देशों में एक है. ईरान ने हाल में क़तर की एक अहम गैस फैसिलिटी पर हमला किया था. क़तर की सेना आकार में भले छोटी हो, लेकिन तकनीक और अत्याधुनिक हथियारों के मामले में यह काफी आगे है.
ग्लोबल फ़ायर पावर इंडेक्स में ये 71वें नंबर पर है. इसका पावर इंडेक्स स्कोर है 1.409.
क़तर की एयरफोर्स उसकी बड़ी ताक़त मानी जाती है. क़तर के पास यूरो फ़ाइटर टाइफ़ून और रफाल जैसे आधुनिक फ़ाइटर प्लेट है. क़तर नौसेना छोटी है लेकिन उसके पास अत्याधुनिक पेट्रोलिंग जहाज है जो उसकी समुद्री सुरक्षा पर निगरानी रखती है,
हालांकि, क़तर की सबसे बड़ी चुनौती उसकी कम स्थानीय आबादी है. लगभग तीन लाख नागरिकों वाले इस देश की कुल आबादी में विदेशी नागरिकों की हिस्सेदारी 80 फ़ीसदी है.
इसका असर सेना पर भी दिखता है. क़तर अपनी सैन्य जरूरतों के लिए विदेशी विशेषज्ञों और कॉन्ट्रैक्ट सैनिकों पर काफी हद तक निर्भर है.
रणनीतिक रूप से क़तर की सेना आक्रामक नहीं, बल्कि रक्षात्मक भूमिका में तैयार की गई है, जिसका मुख्य उद्देश्य सीमाओं और ऊर्जा संसाधनों की सुरक्षा है.
इसके साथ ही, क़तर की सुरक्षा रणनीति में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की बड़ी भूमिका है. देश में स्थित अल उदैद एयरबेस अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा है, जो क़तर की सुरक्षा देता है.
अमेरिका और इसराइल के हमले के जवाब में ईरान अल उदैद पर हमला किया था.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित
































