बड़े स्तनों के कारण महिलाओं को क्या दिक्कतें होती हैं?

    • Author, रेबेका थॉर्न
    • पदनाम, ग्लोबल हेल्थ, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस
  • पढ़ने का समय: 6 मिनट

"मैं हमेशा कंधे झुकाकर चलती थी, सिर्फ इसलिए कि यह न दिखे कि मेरे स्तन बहुत बड़े हैं. मुझे यह बात आज भी इसलिए याद है, क्योंकि मुझे बहुत, बहुत शर्मिंदगी महसूस होती थी."

2010 में अर्जेंटीना की एक यूनिवर्सिटी प्रोफ़ेसर, रैक्वेल ने ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी कराने का फ़ैसला किया.

अब 52 साल की रैक्वेल कहती हैं कि इस सर्जरी के नतीजों ने उन्हें 'आज़ादी का अहसास' कराया, जैसा उन्होंने पहले कभी महसूस नहीं किया था.

दुनिया के कई हिस्सों में बड़े स्तनों को आकर्षक माना जाता है, लेकिन हकीकत में यह महिलाओं की सेहत और जीवन की गुणवत्ता के लिए काफ़ी मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं.

बीबीसी हिन्दी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

बड़े स्तनों को कई तरह की परेशानियों से जोड़ा गया है, जैसे लगातार पीठ दर्द, सिरदर्द, गलत पोस्चर, सुन्नपन, नींद में दिक्कतें, और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं.

खेल और कसरत भी प्रभावित

इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ एस्थेटिक प्लास्टिक सर्जरी के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में दुनियाभर में 6,52,676 ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी की गईं.

इनमें सबसे ज़्यादा ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी 1,15,647 ब्राज़ील में हुईं, उसके बाद अमेरिका में 67,478, फिर फ़्रांस में 38,780, जर्मनी में 32,068, तुर्की में 25,334 और भारत में 22,400 ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी हुईं.

रैक्वेल कहती हैं कि किशोरावस्था से ही उन्हें बड़े स्तनों की वजह से लगातार पीठ दर्द झेलना पड़ा.

उनके मुताबिक लेकिन अर्जेंटीना में बड़े स्तनों को अक्सर एक तरह का वरदान माना जाता है, "ज़्यादातर लोग, ख़ासकर महिलाएं, आपसे कहती हैं कि आप बहुत लकी हो."

वह कहती हैं, "मैं लकी नहीं थी. मैंने बहुत तकलीफ़ झेली. मैंने एक किशोरी के तौर पर दुख झेला, एक महिला के रूप में भी और एक मां के रूप में भी."

वह कहती हैं कि असल में अपने शरीर को छुपाने के लिए जिस तरह से वह चलती थीं, उसकी वजह से आज भी उन्हें पीठ दर्द रहता है.

एक एक्टिव इंसान होने के नाते, रैक्वेल को योगा, पिलाटीज़ और जिम जाना पसंद था. लेकिन आख़िरकार, बड़े स्तनों के बोझ ने उन्हें अपनी पसंदीदा गतिविधियों में हिस्सा लेना बंद करने पर मजबूर कर दिया.

ब्रिटिश एसोसिएशन ऑफ एस्थेटिक प्लास्टिक सर्जन्स की अध्यक्ष डॉक्टर नोरा न्यूजेंट कहती हैं कि जो महिलाएं ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी करवाने आती हैं उन्हें चलने-फिरने और कसरत करने में दिक्कत आती है.

वह कहती हैं, "व्यवहारिक नज़रिये से देखें तो बड़े स्तन भारी होते हैं, इसलिए वह शरीर को आगे की ओर खींचते हैं. इससे पीठ और गर्दन पर लगातार दबाव बढ़ता है."

"इससे एक्सरसाइज़ करना काफ़ी असहज हो जाता है, और सही फ़िटिंग वाली, सपोर्ट देने वाली ब्रा ढूंढना भी बहुत मुश्किल हो जाता है."

रैक्वेल कहती हैं कि उन्हें अपनी छाती को संभालने के लिए 'दो या तीन' ब्रा एक साथ पहननी पड़ती थीं. और अपने साइज़ की ब्रा ढूंढना उनके लिए एक अलग तरह का आर्थिक बोझ भी बन गया था.

वह कहती हैं, "अर्जेंटीना में बड़े स्तनों के लिए मिलने वाली ब्रा बहुत महंगी होती थीं."

'मुझे आज़ादी महसूस हुई'

न्यूजेंट बताती हैं कि उनके पास आने वाली ज़्यादातर महिलाओं की हर ब्रेस्ट से 500 ग्राम से 800 ग्राम तक वज़न कम किया जाता है.

वह बताती हैं, "कभी-कभी शरीर के कुल वज़न के हिसाब से यह बहुत ज़्यादा नहीं लगता, लेकिन शरीर के एक छोटे से हिस्से के लिए यह बहुत बड़ी मात्रा होती है."

रैक्वेल के मामले में, डॉक्टरों ने कुल मिलाकर उनके स्तनों से 2.5 किलो वज़न कम किया.

रैक्वेल कहती हैं, "मुझे याद है, सर्जरी के बाद जब मुझे फर्श से कुछ उठाना था... और मुझे ऐसा लगा जैसे 'वाह, यह तो बिल्कुल अलग शरीर है.' मुझे सच में, बहुत ज़्यादा आज़ादी महसूस हुई."

अच्छी ब्रा की ताकत

प्रोफ़ेसर जोआना वेकफ़ील्ड स्कर लगातार होने वाले ब्रेस्ट पेन के बारे में डॉक्टर से बात करने गईं, तो उन्हें सलाह दी गई कि उन्हें बस एक सही फिटिंग वाली ब्रा की ज़रूरत है.

बायोमैकेनिक्स की एक्सपर्ट होने के नाते, उन्होंने यह रिसर्च करने का फ़ैसला किया कि एक अच्छी ब्रा आखिर होती कैसी है.

वह कहती हैं, "मुझे एहसास हुआ कि असल में हमें यह बहुत कम पता है कि हमें ब्रा की ज़रूरत क्यों होती है, ब्रा के फ़ायदे क्या हैं, और एक ब्रा को कैसे काम करना चाहिए."

"इसके बजाय, ब्रा को ज़्यादातर एक फ़ैशन आइटम की तरह देखा गया है, न कि ऐसी चीज़ के तौर पर जो काम की हो, जिसका कोई मक़सद हो, और जिसके सेहत से जुड़े फायदे हों. यह बात मुझे वाकई बहुत निराशाजनक लगी."

इस बात ने उन्हें 2005 में ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ पोर्ट्समाउथ में ब्रेस्ट हेल्थ पर एक रिसर्च ग्रुप शुरू करने के लिए प्रेरित किया.

उनकी टीम ने ग़लत फ़िटिंग वाली ब्रा पहनने से होने वाले चार बड़े नकारात्मक असर पहचाने थे-

-दर्द, त्वचा में खिंचाव

-टिश्यू को नुकसान,

-सांस लेने के तरीके और दिल की धड़कनों के बीच के समय में बदलाव

- शारीरिक गतिविधियों में रुकावट

वह कहती हैं, "अगर आपके स्तन भारी हैं और वह ऊपर नीचे उछल रहे हैं, तो इससे आपकी सांस लेने का तरीका सच में बदल सकता है. यह इस बात को भी बदल देता है कि आप ज़मीन पर कितनी ताकत डालते हैं. यानी इसका असर पूरे शरीर के काम करने के तरीके पर पड़ता है."

उन्होंने यह समझा कि ब्रेस्ट पेन कम करने की सबसे अहम बात यह नहीं है कि ब्रेस्ट कितनी ज़्यादा हिलती हैं, बल्कि यह है कि उनकी मूवमेंट को कितना धीमा किया जा सकता है.

यह टीम अब इंग्लैंड की महिला फुटबॉल टीम 'लायनेसिस' जैसी एलीट एथलीट्स और दुनिया के कुछ टॉप गोल्फ़र्स के साथ मिलकर उनके लिए सबसे बेहतरीन ब्रा तैयार करने पर काम कर चुकी है.

वेकफ़ील्ड स्कर कहती हैं, "हम देख रहे हैं कि एफ़ए, वर्ल्ड रग्बी जैसी संस्थाएं महिला एथलीट्स की सेहत से जुड़ी पहल पर पैसा लगा रही हैं - और यह बदलाव असल में पिछले करीब पांच सालों में ही दिखा है."

"यह सब अभी नया नया है, लेकिन बहुत अच्छी बात है कि अब यह बदलाव दिखाई दे रहा है."

'मरीज़ अच्छी ज़िंदगी जीना चाहते हैं'

समाज बड़े स्तनों के बोझ को कैसे देखता और समझता है, यह बात रैक्वेल को खुद झेलनी पड़ी.

वह कहती हैं कि ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी करवाने के फ़ैसले पर उन्हें अपने आस-पास के लोगों से भेदभाद का सामना करना पड़ा. साथ ही उनके फ़ैसले की वजह को लेकर एक आम गलतफ़हमी थी.

वह कहती हैं, " ज़्यादातर लोगों को लगा कि यह सेहत का नहीं, बल्कि सिर्फ खूबसूरती से जुड़ा फ़ैसला था. जब मैंने यह सर्जरी करवाई, तो एक महिला ने मुझसे कहा, 'अब तुम्हें जाकर पेट भी निकलवाना चाहिए - जैसे लिपोसक्शन'."

ऐसी प्रतिक्रियाओं के बावजूद, रैक्वेल कहती हैं कि उन्हें अपने फ़ैसले पर कोई पछतावा नहीं है.

वह कहती हैं, "मैं बहुत खुश हूं और अब जब मैं मेनोपॉज़ के दौर में हूं, तो मुझे समझ नहीं आता कि बड़े स्तनों के साथ मैं कैसे जी पाती. मैं खुद को उस शरीर के साथ जूझते हुए सोच भी नहीं सकती."

न्यूजेंट का कहना है कि ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी कराने वाले मरीज़ों की बढ़ती संख्या शायद सेल्फ़ केयर में बढ़ती दिलचस्पी को दिखाती है.

वह कहती हैं, "बिल्कुल, सिर्फ महिलाएं ही नहीं, बल्कि सभी मरीज़ अब अच्छी ज़िंदगी जीना चाहते हैं."

"यह परफ़ेक्शन की तलाश नहीं है, बल्कि सेहत और वेलनेस की तलाश है."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हॉट्सऐप पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)