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ईरान युद्ध के बाद से होर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़रने वाले क़रीब 100 जहाज़ किस-किस देश के हैं?
- Author, केलीन डेवलिन, टॉम एजिंटन, यी मा
- पदनाम, बीबीसी वेरिफ़ाई
- पढ़ने का समय: 7 मिनट
बीबीसी वेरिफ़ाई की एक डेटा स्टडी के मुताबिक़ मार्च की शुरुआत से अब तक होर्मुज़ स्ट्रेट से क़रीब सौ जहाज़ ही गुज़रे हैं.
इस क्षेत्र में ईरानी सेना की ओर से जहाज़ों पर समय-समय पर हमले किए जा रहे हैं, जिसकी वजह से आवाजाही पर फ़र्क पड़ा है.
हालाँकि दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज़ स्ट्रेट से ऊर्जा और रोज़मर्रा की ज़रूरतों के कुछ सामान की आवाजाही अभी भी जारी है, लेकिन 28 फ़रवरी से ईरान युद्ध शुरू होने के बाद यहाँ का दैनिक यातायात पहले की तुलना में क़रीब 5% ही रह गया है.
ज्वाइंट मैरिटाइम इन्फॉर्मेशन सेंटर के मुताबिक़, ईरान युद्ध से पहले होर्मुज़ स्ट्रेट से हर दिन क़रीब 138 जहाज़ गुज़रते थे. इन जहाज़ों के ज़रिए दुनिया की कुल तेल सप्लाई का पाँचवाँ हिस्सा यानी क़रीब 20% अलग-अलग देशों तक पहुंचता था.
शिपिंग का विश्लेषण करने वाले 'केप्लर' से मिले आंकड़ों से पता चलता है कि इस महीने अब तक इस संकरे समुद्री रास्ते से 99 जहाज़ गुज़रे हैं. यानी हर रोज़ औसतन केवल 5-6 जहाज़.
बीबीसी वेरिफ़ाई ने उन जहाज़ों पर नज़र डाली है जो यह सफ़र तय कर रहे हैं, और उन जोखिमों का भी आकलन किया है, जो ये जहाज़ उठा रहे हैं.
हमारे विश्लेषण से पता चलता है कि हाल के दिनों में हुई इन यात्राओं में से क़रीब एक-तिहाई यात्राएँ उन जहाज़ों ने की हैं, जिनका ईरान से कोई न कोई संबंध था.
इनमें ईरान के झंडे के साथ चलने वाले 14 जहाज़ शामिल थे. साथ ही इनमें कुछ अन्य जहाज़ भी थे जिन पर ईरान के साथ तेल व्यापार से जुड़े होने के संदेह में प्रतिबंध लगाया गया है.
इनमें नौ अन्य जहाज़ ऐसी कंपनियों के स्वामित्व में थे जिनके पते चीन से जुड़े हुए थे. जबकि छह जहाज़ों ने बताया कि वे भारत जा रहे हैं.
विश्लेषण से यह भी पता चलता है कि ईरान से जुड़े न होने वाले कई जहाज़ों ने बंदरगाहों पर लंगर डाला है, जिनमें ग्रीस की कंपनियों के जहाज़ भी शामिल हैं.
ऐसा लगता है कि इस समुद्री मार्ग को सफलतापूर्वक पार करने वाले कुछ जहाज़ों ने सामान्य से अधिक लंबा रास्ता अपनाया है.
जबकि पाकिस्तान के झंडे वाले एक तेल टैंकर के ट्रैकिंग डेटा से पता चलता है कि 15 मार्च को होर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़रते समय, उसने बीच से गुज़रने वाले आम रास्ते के बजाय, ईरानी तट के क़रीब से यात्रा की.
अमेरिकी डिफेंस थिंक टैंक रैंड कॉर्पोरेशन के सीनियर रिसर्चर ब्रैडली मार्टिन ने बताया कि यह जहाज़ शायद "ईरान से मिले कुछ निर्देशों का पालन कर रहा था."
उनका कहना है कि पाकिस्तानी जहाज़ का रास्ता यह संकेत दे सकता है कि होर्मुज़ स्ट्रेट में माइंस (बारूदी सुरंगें) हो सकती हैं, या फिर ईरानी अधिकारी जहाज़ की पहचान को आसान बनाने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए उसे ईरानी तट के क़रीब से गुज़रने को कहा गया.
विंडवार्ड मैरिटाइम एनालिटिक्स की मिशेल वीज़ बॉकमैन का कहना है कि जहाज़ों को रास्ता बदलने पर मजबूर करके, उन्हें ईरान के समुद्री क्षेत्र और उसके समुद्री नियमों के दायरे में लाया जा रहा है.
उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि ईरान हमला करने और माइंस बिछाए जाने का डर दिखाकर इस स्ट्रेट को बंद कर रहा है और उस पर अपना नियंत्रण जमा रहा है."
उन्होंने बीबीसी वेरिफ़ाई को बताया, "इसी वजह से सभी जहाज़ों को उस अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ते से गुज़रने के बजाय, घूमकर ईरान के समुद्री तट के क़रीब से गुज़रना पड़ रहा है."
अमेरिका स्थित सेंटर फ़ॉर नेवल एनालिसिस के माइकल कोनेल भी इस बात से सहमत हैं कि जहाज़ एक अलग रास्ते से गुज़र रहे हैं.
उनका कहना है, "शायद ईरानी अधिकारियों के साथ उनका कोई समझौता हुआ है, जिसके तहत अगर वे एक तय रास्ते पर चलते हैं, तो सुरक्षित रहेंगे."
शिपिंग के ख़तरे
जब से यह संघर्ष शुरू हुआ है, हमने ईरान के तट के पास 20 कमर्शियल जहाज़ों पर हुए हमलों की पुष्टि की है; ऐसा नहीं है कि इनमें से सभी जहाज़ होर्मुज़ स्ट्रेट के बहुत नज़दीक थे.
11 मार्च को, थाईलैंड का झंडा लगे एक बल्क कैरियर, 'मयूरी नारी' पर वहाँ से गुज़रने की कोशिश करते समय दो प्रोजेक्टाइल से हमला किया गया.
इसके 23 क्रू मेंबर्स में से तीन अभी भी लापता हैं. माना जा रहा है कि जब जहाज़ पर हमला हुआ, तो वे इंजन रूम में फँस गए थे.
जहाज़ के मालिकों ने बीबीसी वेरिफ़ाई को बताया कि जो क्रू मेंबर बच गए, वे "समुद्र में हुए दो धमाकों से बुरी तरह सदमे में थे"
उसी दिन दो अन्य जहाज़ों - ग्रीस के मालिकाना हक़ वाले 'स्टार ग्विनिथ' और अमेरिका के मालिकाना हक़ वाले 'एमटी सेफ़सी विष्णु' पर भी हमला हुआ था.
एमटी सेफ़सी विष्णु के मालिक एसवी अंचन ने बीबीसी वेरिफ़ाई से कहा, "व्यावसायिक शिपिंग रास्ते जंग के मैदान नहीं बन सकते हैं."
उन्होंने बताया, "जहाज़ पर हुए हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि वह इराक़ के तट पर लंगर डाले खड़ा था. जलते हुए जहाज़ से बचने के लिए सभी 28 क्रू मेंबर्स को पानी में कूदना पड़ा."
उन्होंने कहा, "ये पुरुष और महिलाएँ कोई सैनिक नहीं हैं. ये पेशेवर लोग हैं जो दुनिया में व्यापार को चालू रखते हैं."
किंग्स कॉलेज के फ़्रीमैन एयर एंड स्पेस इंस्टीट्यूट के अरुण डॉसन का कहना है कि अलग-अलग तरह के खतरों जैसे, ड्रोन, मिसाइल, तेज़ी से हमला करने वाली बोट और शायद बारूदी सुरंगें एक गंभीर चुनौती पेश करते हैं.
उन्होंने कहा, "एक पारंपरिक माइनस्वीपर, जो धीरे-धीरे और बहुत सावधानी से अपना काम करता है, उसके लिए बारूदी सुरंगों को खोजना और उन्हें निष्क्रिय करना मुश्किल हो जाएगा, ख़ासकर तब जब उस पर हवा और ज़मीन दोनों तरफ़ से हमला हो रहा हो."
ईरान इस समुद्री रास्ते की भौगोलिक बनावट का फ़ायदा भी उठा सकता है. यह न सिर्फ़ संकरी और उथली है, बल्कि इसका समुद्री किनारा भी पहाड़ी है. इसकी वजह से ईरान ऊँचाई से हमले कर सकता है, और जहाज़ों को उन हमलों पर प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय मिल पाता है.
इस इलाक़े में पकड़े जाने से बचने की कोशिश में, कई जहाज़ जानबूझकर अपना ट्रैकिंग सिस्टम, जिसे एआईएस (ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) कहते हैं, उसे बंद करते हुए दिख रहे हैं.
केप्लर के दिमित्रिस एम्पाटज़िडिस कहते हैं, "इनमें से ज़्यादातर जहाज़ अपना सिस्टम बंद करके गुज़र रहे हैं."
ओमान की खाड़ी में घुसते ही अपने ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर देने से, जहाज़ मैप से गायब हो जाते हैं और फिर कुछ घंटों या दिनों बाद किसी दूसरी जगह पर दोबारा दिखाई देते हैं.
हालांकि इससे जहाज़ों को अपनी जगह छिपाने में मदद मिलती है, लेकिन यह केप्लर जैसी उन कंपनियों के लिए चुनौतियां भी खड़ी करती है जो होर्मुज़ स्ट्रेट में होने वाली गतिविधियों पर नज़र रखती हैं.
एम्पाटज़िडिस ने बीबीसी वेरिफ़ाई को बताया, "हमारे विश्लेषकों ने मैन्युअल जाँच और सैटेलाइट तस्वीरों का इस्तेमाल करके हर चीज़ की पुष्टि की है."
अतिरिक्त रिपोर्टिंग: डैनिएल पालुम्बो और जोशुआ चीथम
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.