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दो बाहुबलियों की पत्नियों के बीच चुनावी लड़ाई, वारिसलीगंज सीट का यह है हाल
- Author, सीटू तिवारी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वारिसलीगंज से
- पढ़ने का समय: 8 मिनट
बिहार के वारिसलीगंज विधानसभा क्षेत्र से आरजेडी के टिकट पर अनीता देवी और बीजेपी के टिकट पर अरुणा देवी मैदान में हैं. ये दोनों ही बीते ज़माने के बाहुबलियों की पत्नियां हैं.
यह विधानसभा सीट नवादा लोकसभा क्षेत्र के अंदर आती है.
अनीता, जेल ब्रेक कांड में 17 साल सज़ा काट चुके अशोक महतो की पत्नी हैं.
वहीं, अरुणा देवी 90 और 2000 के दशक के बाहुबली अखिलेश सिंह की पत्नी हैं.
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अखिलेश सिंह को स्थानीय स्तर पर अखिलेश 'सरदार' के नाम से भी जाना जाता है और उनका नवादा, शेखपुरा, जमुई और नालंदा के कुछ हिस्से में प्रभाव था.
बीते 20 साल से वारिसलीगंज सीट से अशोक महतो और अखिलेश सिंह के परिवार का कोई सदस्य ही जीतता आया है.
इस दौरान अशोक महतो के भतीजे प्रदीप महतो और अखिलेश सिंह की पत्नी अरुणा देवी ही इस सीट से विधायक बने.
'हमने हेलीकॉप्टर को ट्रैक्टर बना दिया है'
इस विधानसभा क्षेत्र के ज़्यादातर इलाके़ ग्रामीण पृष्ठभूमि के हैं. यहां आजकल धान की फसल कट रही है.
पकरीबरांवा के खेल मैदान में तेजस्वी का हेलीकॉप्टर उतरा. रोज़ाना 17-18 सभा करने वाले तेजस्वी यहां सिर्फ़ दो मिनट ही बोले.
वह कहते हैं, "हमने हेलीकॉप्टर को ट्रैक्टर बना दिया है और मोदी जी ने मेरे ख़िलाफ़ 30-30 हेलीकॉप्टर उतार दिए हैं."
यहां आई हुईं सुनीता कुमारी कहती हैं, "हमारे बच्चे पढ़कर सड़क पर बैठे हुए हैं, नौकरी नहीं मिल रही है. नीतीश जी ने सबको लटका रखा है. नौकरी नहीं निकाल रहे हैं. बच्चे कमाएंगे तब तो उनकी शादी होगी."
तेजस्वी यहां आरजेडी उम्मीदवार अनीता का प्रचार करने आए हैं. 47 साल की अनीता साल 2024 में तब सुर्खियों में आई थीं जब उन्होंने अशोक महतो से शादी की थी.
अशोक महतो की छवि बाहुबली की है. साल 2000 में बिहार के नवादा, शेखपुरा, जमुई और आसपास के इलाक़ों में सक्रिय 'महतो गुट' से उनका संबंध रहा था. अशोक महतो नवादा जेलब्रेक कांड में 17 साल की सज़ा काट चुके हैं और वेब सिरीज़ 'खाकी: द बिहार चैप्टर' उनके जीवन पर आधारित थी.
'अशोक जी एक विचारधारा हैं'
पेशे से फार्मासिस्ट अनीता, रेलवे सेंट्रल हॉस्पिटल में काम करती थीं. लेकिन उन्होंने अशोक महतो से शादी के बाद मार्च 2024 में सरकारी नौकरी से त्यागपत्र दे दिया.
जेल में सज़ा काट चुके अशोक महतो चुनाव नहीं लड़ सकते. अशोक महतो ने 60 साल की उम्र में शादी की. इस शादी के बाद अनीता को मुंगेर लोकसभा सीट से आरजेडी का टिकट मिला. हालांकि वो सीट जेडीयू के कद्दावर नेता राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने जीती लेकिन अनीता की उम्मीदवारी बहुत सुर्खियों में रही.
उस वक्त आरजेडी ने पिछड़ों के प्रतिनिधि चेहरे के तौर पर अनीता को प्रोजेक्ट किया था. साल 2025 में भी आरजेडी ने भूमिहार, कुर्मी और यादव वोटर बहुल सीट पर पिछड़ा कार्ड खेला है.
इस सीट पर बाहुबलियों की पत्नियों की लड़ाई के विषय में पूछने पर अनीता बीबीसी से कहती हैं, "मैं बस इतना समझती हूं कि अशोक महतो एक विचारधारा हैं. जनता ने उन्हें दिल में जगह दी है और मुझे भी दिल में जगह दी है."
लेकिन वो अखिलेश सिंह संबंधी किसी सवाल पर बात करने से बचती हैं.
वो कहती हैं, "मैं किसी को टक्कर देने नहीं आई हूँ. मैं अपने काम पर फ़ोकस करती हूं. मैंने देखा है कि वारिसलीगंज की जनता कई सालों से ख़ुद ठगा महसूस कर रही है. अपने हक़ और अधिकारों से वंचित महसूस कर रही है. जनता ने मुझ पर विश्वास किया है. वो मेरे प्रति आशा से भरे हैं."
जनता सबसे बड़ी बाहुबली है
बीजेपी उम्मीदवार अरुणा देवी पकरीबरांवा के गांव-गांव में आशीर्वाद यात्रा कर रही हैं. उनके साथ दो से तीन महिलाएं चल रही हैं और बाकी सभी पुरुष हैं.
अटारी गांव के लोगों में बिहार के दूसरे मतदाताओं की तरह बहुत उत्साह नहीं दिखता. कुछ महिलाएं गेंदे की छोटी माला अरुणा देवी को बीच-बीच में पहना देती हैं.
49 साल की अरुणा देवी इस सीट पर चार बार जीत चुकी हैं. वहीं, अशोक महतो के भतीजे प्रदीप महतो ने इस सीट पर दो बार जीत हासिल की है.
अरुणा देवी और उनके आसपास के लोग बाहुबली के सवाल पर थोड़ा नाराज़ होते हैं.
अरुणा देवी नाराज़गी भरे स्वर में कहती हैं, "हमारा काम है कि समाज को लेकर चलें और हम जाति नहीं, हम जमात के प्रतिनिधि हैं. बाहुबली क्या होता है? बाहुबली तो सब पब्लिक लोग हैं. सब कुछ जनता है."
अरुणा देवी, बाहुबली अखिलेश सिंह की पत्नी हैं. 90 और 2000 के दशक में वो इस इलाके में सक्रिय रहे.
स्थानीय पत्रकार अशोक कुमार बताते हैं, "उस समय अखिलेश सिंह और अशोक महतो गुट में बहुत क्लैश हुए. इन दोनों गुटों में जातीय भिड़ंत हुईं जिसमें अनुमान के मुताबिक 200 से ज्यादा लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी."
नौकरी के लिए पैसा कहां से लाएंगे?
पकरीबरांवा में तेजस्वी यादव अपनी सभा में हर परिवार को सरकारी नौकरी का वादा करते हैं. वो जीविका दीदी, पढ़ाई, कमाई, सिंचाई की बात करते हैं.
लेकिन बीबीसी से बातचीत में अरुणा देवी सवाल करती हैं, "तेजस्वी यादव कहते हैं कि वो नौकरी बांटेंगे लेकिन उनकी क्षमता कहां है. हमारी सरकार बाहर कमाने जाने वाले नौजवान को यहीं रोज़गार देगी. हमारे विधानसभा क्षेत्र में बायोडीज़ल की फैक्ट्री लग रही है."
"1600 करोड़ रुपये की सीमेंट की फ़ैक्ट्री लग रही है. चीनी मिल तो 1993 में बंद हुआ लालू जी की सरकार में. हम 20 बार सवाल किए विधानसभा में. लेकिन जब कुछ नहीं हुआ तो नवयुवक को रोज़गार तो मिलना ही है. इसलिए फ़ैक्ट्री खुली. सीमेंट की फ़ैक्ट्री में क्या बुराई है?"
दरअसल अरुणा देवी सीमेंट फैक्ट्री का बचाव कर रही हैं, लेकिन वारिसलीगंज बाज़ार में इसको लेकर बहुत नाराज़गी है.
यहां काम करने वाले राजू कुमार कहते हैं, "पहले चीनी मिल थी, अब सीमेंट की फ़ैक्ट्री. हमारे मरने का ऑर्डर आ गया है. हम पहले चीनी मिल में काम करते थे. सीमेंट फैक्ट्री खुलने से धूल का डर है. बगल में घर है. हम लोग कैसे रहेंगे?"
बिंदेश्वरी सिंह भी कहते हैं, "हमारी तो सबसे बड़ी पूंजी चीनी मिल थी लेकिन उसको बंद करवा दिया गया. नीतीश कुमार ने उसकी जगह सीमेंट फैक्ट्री लगवा दी. किसानों ने धरना प्रदर्शन किया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. उसी से किसान, व्यापारी को फ़ायदा होता था. हमारे यहां शादी होती थी, पैसा नहीं रहता था तो कुछ रसीद व्यापारी को दे देते थे. सामान मिल जाता था."
पोस्ट ग्रेजुएट की पढ़ाई का भी टोटा
वारिसलीगंज विधानसभा क्षेत्र में एक ऐसा कॉलेज तक नहीं है जहां पोस्ट ग्रेजुएट की पढ़ाई होती हो. नतीजा ये है कि पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए भी स्टूडेंट्स को पटना, गया और नालंदा ज़िले में जाना पड़ता है.
अरुण सिंह कहते हैं, "यहां पीजी का कॉलेज ही नहीं है. या तो पटना जाइए या फिर गया."
वहीं नौजवान मोहित कुमार कहते हैं, "एक घर में बेरोज़गार बैठा हुआ है. हर घर में जॉब मिलना ज़रूरी है. यहां लोग शिक्षित ही नहीं हो पा रहे हैं. ऊपर से कोई व्यवस्था नहीं हो रही है."
वहीं वारिसलीगंज स्टेशन के पास बैठे दीपक कुमार कहते हैं, "हम लोग कॉलेज चाह रहे हैं. लेकिन एनडीए सरकार में बहुत विकास हुआ है. हम लोगों को विश्वास नहीं था कि रेल लाइन का दोहरीकरण होगा. लेकिन हो गया. हम मानते हैं कि बीजेपी की सरकार रहेगी तो हम लोगों का धीरे धीरे विकास होगा."
नीतीश कुमार सरकार की ओर से महिलाओं को दस हज़ार की मदद मिलने के सवाल पर मतदाता पुतुल कुमारी कहती हैं, "हम लोगों को दस हज़ार मिल भी जाएगा तो भी उसी को वोट देंगे जिसे देना है."
वारिसलीगंज में 11 नवंबर को मतदान होना है. साल 2000 और फरवरी 2005 का चुनाव अरुणा देवी ने जीता था लेकिन 2005 में ही अक्तूबर में जब विधानसभा के दोबारा चुनाव कराए गए तो उन्हें हार का सामना करना पड़ा. उस वक्त प्रदीप महतो ने जीत दर्ज की थी.
अरुणा देवी 2015 और 2020 का चुनाव जीत चुकी हैं. यहां ये देखना होगा कि क्या वो इस बार जीत की हैट्रिक लगा पाएंगी?
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित